खुफिया रहस्यों को इस कोड मशीन से पता लगाता था हिटलर

दुनिया को खौफ से थर्राने वाला तानाशाह हिटलर तकनीकी संपन्न भी था। उसके पास ऐसी कोड मशीन थी कि बड़े से बड़ा खुफिया राज उससे बेनकाब हो जाता था। मशीन का इस्तेमाल हिटलर अपनी सेना के जनरल के साथ करता था।
इंग्लैंड के एसेक्स में एक छप्पर में पड़ी इस मशीन को बेचने का इश्तेहार ऑनलाइन शॉपिंग साइट ईबे पर लगा था। टेलीग्राम मशीन के तौर पर इसकी कीमत 9.50 पाउंड यानी आज के करीब 932 रुपए 39 पैसे लगाई गई थी। यूके के ब्लेचली पार्क स्थित नेशनल म्यूजियम ऑफ कंप्यूटिंग के इतिहासकारों ने इसे 10 पाउंड यानी करीब 981 रुपए 46 पैसे की रकम देकर खरीद लिया।
म्यूजियम के एक वॉलिंटियर जॉन वेट्टर ने बताया कि उनके एक सहकर्मी ने ऑनलाइन शॉपिंग साइट ईबे देख रहे थे तभी एक टेलीप्रिंटर का इश्तेहार देखा। इसके बाद वे उस इलाके में गए जहां एक छप्पर में कबाड़ की हालत पड़ी मशीन को बरामद किया गया था। उन्होंने मशीन की कीमत पूछी और बिना मोल भाव उसे खरीद लिया। उसकी अहमियत वे जानते थे इसलिए चिल्लर वापस लेने के लिए भी नहीं रुके।
दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इस मशीन से एक सिफर मशीन भी जुड़ी होती थी। मशीन के जरिए कमांड दी जाती थी। मशीन में 12 खास व्हील लगे हैं जिनसे सीक्रेट कोड तैयार होता था।
बकिंघमशायर स्थित म्यूजियम ने लोगों से इसकी खोई हुई मोटर को खोजने के लिए भी कहा है।

म्यूजियम के वॉलिंटियरों के मुताबिक मशीन पर ठीक वैसे ही आधिकारिक वारटाइम नंबर हैं जो कि हाल ही में नॉर्बे से बरामद हुई एक और मशीन से मिले थे। नॉर्बे से आई लॉरेंज एसजेड42 मशीन एक टाइपराइटर की तरह है जो दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इस्तेमाल की गई 200 लॉरेंज मशीनों की तरह लगता है।
फिलहाल ऐसी चार मशीनें ही बची हैं। इस मशीन पर सीरियल नंबर 1137 अंकित है। इसे नॉर्बे के लिलीहैमर स्थित जर्मन हेडक्वॉर्टर में इस्तेमाल किया जाता था।
युद्ध के आखिर में नॉर्बे पर जर्मन ने कब्जा जमा लिया था, इसलिए म्यूजियम को पूरा भरोसा है कि 8 मई 1945 की रात ठीक 12 बजे दिया गया आत्मसमर्पण के साथ युद्ध की समाप्ती का संदेश इस मशीन के जरिए ही दिया गया होगा।
म्यूजियम के चेयरमैन एंडी क्लार्क ने इस उपलब्धि पर खुशी और आभार जताते हुए कहा कि सब पहेलियां बुझाते हैं लेकिन सच ये है कि लॉरेंज मशीनें रणनीतियों के संचार के लिए इस्तेमाल में लाई जाती थीं।
लॉरेंज मशीन को बरामद करने पर म्यूजियम की हर तरफ से सराहना हो रही है।
स्टोरी सोर्स- डेलीमेल