AI Summit 2026: ‘टेक्नोलॉजी का फायदा आम लोगों तक पहुंचे’, एआई समिट में अश्विनी वैष्णव ने रखा पीएम मोदी का विजन
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ग्लोबल साउथ के पहले और अब तक के सबसे बड़े AI समिट का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य है टेक्नोलॉजी को सबके लिए सुलभ और उपयोगी बनाना।

विस्तार
गुरुवार को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कार्यक्रम को संबोधित किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह ग्लोबल साउथ का पहला और अब तक का सबसे बड़ा AI समिट है। उन्होंने देश-विदेश से आए सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए इस आयोजन को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का भी जिक्र किया। वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री का मानना है कि किसी भी टेक्नोलॉजी की असली ताकत तभी साबित होती है, जब उसका लाभ आम लोगों तक पहुंचे।
उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य टेक्नोलॉजी को लोकतांत्रिक बनाना है, यानी इसे कुछ लोगों तक सीमित न रखकर बड़े पैमाने पर अपनाना और हर नागरिक के लिए आसान बनाना उनका लक्ष्य है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई जैसी उभरती तकनीकें केवल उद्योग या विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में आम जनता के जीवन को बेहतर बनाने में मददगार होनी चाहिए।

मंत्री ने किया एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स का एलान
एआई के इस महाकुंभ में मंत्री ने एक और बड़े वैश्विक समझौते का एलान किया है। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स' की घोषणा की। इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल विदेशी कंपनियां ही नहीं, बल्कि भारत के अपने उभरते हुए इनोवेटर्स जैसे सर्वम (Sarvam), भारतजन (Bharatjan), यानी (Yani) और सॉकेट (Soket) भी शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर एक साझा विजन तैयार किया है जो एआई को अधिक जिम्मेदार और समावेशी बनाएगा।
इस समझौते के तहत मुख्य रूप से दो बड़े वादों पर मुहर लगी है। पहला वादा एआई के कारण रोजगार और कौशल विकास पर पड़ने वाले असर को गहराई से समझने से जुड़ा है। कंपनियां अपने डेटा के जरिए यह बताएंगी कि एआई असल दुनिया में कैसे इस्तेमाल हो रहा है, ताकि सरकार नौकरियों और आर्थिक बदलावों को लेकर पुख्ता नीतियां तैयार कर सके। इससे यह डर कम होगा कि एआई इंसान का काम छीन लेगा, बल्कि यह इंसान की मदद के लिए एक बेहतर टूल बनकर उभरेगा।
दूसरा बड़ा वादा एआई को भाषाओं के बंधन से आजाद करने का है। अश्विनी वैष्णव ने जोर देकर कहा कि अब एआई सिस्टम को केवल अंग्रेजी या किसी एक संस्कृति तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे भारत की विभिन्न भाषाओं और स्थानीय संदर्भों के हिसाब से परखा और सुधारा जाएगा। इसका सीधा फायदा 'ग्लोबल साउथ' यानी उन विकासशील देशों को मिलेगा जहां भाषा और संस्कृति की विविधता बहुत अधिक है। अब एआई का फायदा गाँव के उस व्यक्ति को भी मिलेगा जो अपनी मातृभाषा में बात करना चाहता है।
ग्लोबल साउथ का नेतृत्व कर रहा है भारत
आईटी मंत्री ने गर्व के साथ कहा कि यह कदम भारत को एआई गवर्नेंस के मामले में दुनिया के नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करता है। अब तक एआई के नियम केवल कुछ विकसित देशों की सोच के हिसाब से तय होते थे, लेकिन अब भारत ने एक ऐसा रास्ता दिखाया है जो विकास और समानता के बीच संतुलन बनाता है। यह ऐतिहासिक समझौता यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य की तकनीक केवल शक्तिशाली न हो, बल्कि हर इंसान के काम आने वाली और भरोसेमंद भी हो।
एआई समिट में 100 से ज्यादा देशों की भागीदारी
एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन 16 से 20 फरवरी के बीच नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस समिट में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा सहित 15-20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 50 से ज्यादा मंत्री इसमें हिस्सा लेंगे। भारत मंडपम के 70,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 'एआई इम्पैक्ट एक्सपो' का आयोजन किया जा रहा है जिसमें 300 से ज्यादा कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। यहां दर्शक लाइव डेमो के जरिए देख सकेंगे कि एआई असल जिंदगी में कैसे काम करता है। प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन के बाद 17 फरवरी से यह एक्सपो आम लोगों के लिए खोल दिया गया है।
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