एआई समिट में बोले एंथ्रोपिक के सीईओ: एआई में अपार संभावनाएं, लेकिन गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Thu, 19 Feb 2026 11:26 AM IST
सार

Anthropic CEO at India AI Impact Summit 2026:

दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने भारत को एआई क्रांति का केंद्र बताया है। उन्होंने एआई से होने वाले फायदों के साथ-साथ इसके गलत इस्तेमाल और रोजगार पर मंडराते खतरों के प्रति आगाह करते हुए भारत की भूमिका को अहम बताया।

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डारियो अमोडेई, सीईओ, एंथ्रोपिक - फोटो : पीटीआई

    विस्तार

    एंथ्रोपिक (Anthropic) के सीईओ डारियो अमोडेई ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और उसके संभावित दुरुपयोग के बीच भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को संबोधित करते हुए अमोडेई ने कहा कि एआई मॉडल्स के स्वायत्त (ऑटोनॉमस) व्यवहार, उनके गलत इस्तेमाल और आर्थिक अस्थिरता जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

    ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करेगा भारत

    अमोदेई ने याद दिलाया कि 2023 में जब एआई समिट की शुरुआत हुई थी, तब से अब तक इस तकनीक ने हैरान कर देने वाली छलांग लगाई है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल तकनीक को अपनाने में आगे है, बल्कि यह एआई से जुड़ी सामाजिक और नैतिक समस्याओं का हल निकालने में भी दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। उनके अनुसार, भारत के पास वह टैलेंट और विजन है जो एआई को सुरक्षित और सबके लिए फायदेमंद बना सकता है।

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    इंटेलिजेंस का 'मूर लॉ' जैसा विकास

    अमोडेई ने कहा कि पिछले लगभग एक दशक से एआई तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसकी तुलना इंटेलिजेंस के "मूर लॉ" से की। यानी जिस तरह कंप्यूटर चिप्स की क्षमता समय के साथ लगातार दोगुनी होती रही, उसी तरह एआई की बौद्धिक क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है।

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    उनके मुताबिक, दुनिया अब उस मोड़ के करीब है जहां एआई मॉडल अधिकांश कामों में इंसानों की सोचने-समझने की क्षमता से आगे निकल सकते हैं। उन्होंने इसे “डेटा सेंटर में प्रतिभाओं के देश” जैसा बताया जहां एआई एजेंट्स ज्यादातर काम इंसानों से बेहतर और कहीं तेज तालमेल के साथ कर सकेंगे।

    अपार संभावनाएं भी, गहरे जोखिम भी

    अमोडेई ने कहा कि AI की यह ताकत मानवता के लिए बड़े अवसर लेकर आ सकती है। हजारों वर्षों से लाइलाज बीमारियों का इलाज संभव हो सकता है, स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार आ सकता है और अरबों लोगों को, खासतौर पर ग्लोबल साउथ में गरीबी से बाहर निकाला जा सकता है।

    इसके साथ ही उन्होंने एआई को लेकर चेतावनी भी दी। उनके अनुसार, एआई सिस्टम का खुद से फैसले लेने वाला व्यवहार, व्यक्तियों या सरकारों द्वारा उसका दुरुपयोग, और बड़े पैमाने पर रोजगार पर असर, ये सभी गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अवसरों और जोखिम दोनों ही मोर्चों पर भारत की भूमिका बिल्कुल केंद्र में है।

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