नासा ने पहली बार जारी की ब्लैकहोल Sagittarius A* की तस्वीरें, इसकी ताकत के आगे सब फेल

Harendra Chaudhary
टेक डेस्क, अमर उजालाHarendra Chaudhary
Wed, 10 Apr 2019 08:18 PM IST
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Nasa revealed the first ever picture of Black hole Sagittarius A*
Nasa blackhole - फोटो : NASA

    नासा के खगोलशात्रियों ने पहली बार ब्लैकहोल की तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों को विज्ञान जगत की बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह ब्लैक सुदूर आकाशगंगा में स्थित था। माना जा रहा है कि यह ब्लैकहोल पृथ्वी से 4000 करोड़ किमी दूर स्थित था।

    इस ब्लैकहोल (इवेंट होराइजन टेलिस्कोप) प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए पूरी दुनिया में अलग-अलग 6 टेलीस्कोप लगाए गए। साथ ही, बड़ी संख्या में कई शोधकर्ताओं को इस मिशन में लगाया है। इस प्रोजेक्ट के लिए हवाई, एरिजोना, स्पेन, मेक्सिको, चिलि और दक्षिणी ध्रुव में इवेंट हॉरिजन टेलीस्कोप लगाया गया था। इसका निर्माण खासतौर पर ब्लैक होल की तस्वीर लेने के लिए ही किया गया था।

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    दूसरा ब्लैक होल सूरज से 6 बिलियन गुना ज्यादा बड़ा है और Sagittarius A* से 1500 गुना बड़ा है। यह आकाश गंगा ए87 में स्थित है और धरती से 5350 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है।

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    तस्वीरें जारी करते हुए तस्वीरें गोथ यूनिवर्सिटी फ्रैंकफर्ट की लुसिआनो रेजोला का कहना था कि बेहद साधारण भाषा में कहा जाए तो यह ऐसा गड्ढा है, जिसे भरा नहीं जा सकता है। गौरतलब है कि आकाश में मौजूद एक छोटे से स्पेस में बहुत बड़े द्रव्यमान को ब्लैक होल कहा जाता है।

    ब्लैकहोल का गुरुत्वाकषर्ण इतना शक्तिशाली होता है कि इससे न तो अणुओं बच सकते हैं, वहीं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकरण जैसे प्रकाश का भी इससे बाहर आना नामुमकिन है। जिसके चलते इसे ब्लैक होल कहा जाता है, क्योंकि यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है और कुछ भी बाहर नहीं जाने देता है।

    वैज्ञानिकों का कहना है कि Sagittarius A* में सूर्य के मुकाबले 40 लाख गुना ज्यादा द्रव्यमान है, बावजूद इसके धरती से देखने पर यह छोटे धब्बे जैसा दिखाई देता है, जबकि पृथ्वी से यह 26 हजार प्रकाशवर्ष दूर है। इसका डायामीटर पृथ्वी और सूर्य के बीच के 1/ 5 डायामीटर जितना है।

    इससे पहले ब्रिटिश वैज्ञानिक स्टिफन हाकिंग ने 1974 में पहली बार ब्लैकहोल से निकलने वाली हॉकिंग रेडिएशन की परिकल्पना की थी। हाकिंग की पिछले साल ही मौत हो गई थी। वहीं 1915 में जर्मन वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टिन ने सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत दिया था, इस सिद्धांत के तहत ब्लैकहोल की गुरुत्वाकर्षण शक्ति इतनी अधिक होती है कि यह आसपास की सभी चीजों को अपने अंदर खींच लेगा। वहीं आइंस्टिन के इस सिद्धांत से ब्लैकहोल के बारे में जानने में बेहद मदद मिली। इससे पहले बताया गया था कि गुरुत्वाकर्षण प्रकाश की गति को प्रभावित करता है।

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