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जिला परिषद सदस्यों ने दी चेतावनी, बजट न मिला तो देंगे सामूहिक इस्तीफा
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 22 Jan 2017 12:00 AM IST
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जिला परिषद शिमला की शनिवार को बचत भवन में हुई बैठक में सदस्यों ने पंचायती राज मंत्री के 13वें वित्तायोग के तहत विकास कार्यों की बची राशि वापस मंगवाने और इसे अपने हिसाब से खर्च करने का पुरजोर विरोध किया। जिप सदस्य दलीप कायथ, डीआर हस्टा, नीलम सरैक, अरविंद धीमान, अनीता और अन्य सदस्यों ने कहा कि बची विकास राशि को खर्च करने का अधिकार सदन का है।
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इसे कैसे पंचायती राज विभाग खर्च करने का फैसला ले सकता है? इन सदस्यों ने प्रदेश सरकार से हरियाणा सरकार की तर्ज पर जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए राज्य स्तर पर बजट का प्रावधान करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि हरियाणा सरकार ने इसके लिए 63 करोड़ बजट प्रावधान किया है, मगर प्रदेश सरकार बजट प्रावधान किए जाने के एक साल से सिर्फ आश्वासन दे रही है।
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नीलम और दलीप ने कहा कि बिना बजट के वे कैसे अपने क्षेत्र में विकास कार्य करवाएंगे। इसलिए उन्होंने राज्य के पांचवें वित्तायोग में हर हाल में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए अलग से बजट प्रावधान किए जाने की मांग एकमत से उठाई। इसको लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। जिप सदस्यों ने दो टूक कहा कि अगर बजट न मिला तो वे सामूहिक त्यागपत्र दे देंगे। जिला परिषद अध्यक्ष धर्मिला हरनोट ने कहा कि जल्द मुख्यमंत्री से इस मांग को लेकर मुलाकात की जाएगी।
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पूर्व में वित्तायोग से 50:30:20 के अनुपात में मिलता था बजट
13वें वित्तायोग तक जिला परिषद को कुल बजट का 50 फीसदी, पंचायत समिति सदस्यों को 30 और पंचायतों को 20 फीसदी के अनुपात में विकास बजट दिया जाता था। चौदहवें वित्तायोग में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए कोई विकास बजट देने का प्रावधान नहीं है। सारे बजट को सीधे पंचायतों को दे दिया गया है। जिससे जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों को अपने क्षेत्र के विकास पर खर्च करने को सरकार से बजट आवंटित नहीं किया जा रहा ।
69 से 80 लाख तक है जिला भर में बची विकास राशि
सदस्यों का आरोप है कि जिला शिमला में पंचायती राज संस्थाओं के लिए विकास कार्यों को 13वें वित्तायोग के तहत मिले बजट में से अभी करीब 69 से 80 लाख तक की राशि है, जिसे पंचायत राज मंत्री के आदेशों पर वापस लेकर विभाग अपने हिसाब से चुनिंदा पंचायतों के पंचायत भवन निर्माण जैसे कार्यों में खर्च किए जाने का फैसला ले रहा है। उन्होंने इसका विरोध किया और कहा कि 13वें वित्तायोग के प्रावधानों के मुताबिक ही बाकायदा जिला परिषद और पंचायत समिति सदन में ही इस राशि को खर्च करने का फैसला लिया जाए।
जिप सदस्यों को करवाया जाए बाहरी राज्यों का भ्रमण
जिला परिषद सदस्य मोती लाल सिथटा और अन्य सदस्यों ने मांग उठाई कि जिला परिषद पदाधिकारियों और कर्मचारियों को पंचायती राज से संबंधित जानकारी प्राप्त करने को बाहरी राज्यों का भ्रमण करवाया जाए। इसके लिए उपलब्ध निधि से पैसा खर्च किए जाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया।