{"_id":"619c98a9d92ad03e2920682d","slug":"young-entrepreneur-earning-35-lakh-rupee-honey-bee-farming-in-rohru-shimla","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली, मुंबई से डिमांड: शहद बेचकर सनी कमा रहा है सालाना 35 लाख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली, मुंबई से डिमांड: शहद बेचकर सनी कमा रहा है सालाना 35 लाख
Tue, 23 Nov 2021 01:02 PM IST
अरविन्द ठाकुर
रतन चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, रोहडू
रतन चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, रोहडू
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Tue, 23 Nov 2021 01:02 PM IST
सार
नौणी विवि से मौन पालन का प्रशिक्षण लेने के बाद सनी आज दूसरे लोगों को भी मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दे रहे हैं। सनी ने तीन युवकों को भी रोजगार दिया है। सनी ने अपने छोटे भाई दिनेश चौहान को भी इस व्यवसाय में जोड़ दिया है।
विज्ञापन
युवा उद्यमी सनी।
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मधुमक्खी पालन में 32 साल का युवा स्वरोजगार अपनाने वालों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। शहद बेचकर रोहड़ू का युवा एक साल में 35 लाख रुपये कमा रहा है। शहद 1500 रुपये किलो तक बिक रहा है। सनी ने ऑनलाइन भी शहद का कारोबार शुरू किया है। ऑनलाइन भी शहद की मांग बढ़ती जा रही है। रोहडू के युवा सुरज चौहान (सनी) ने 22 साल की उम्र में वर्ष 2011 में मौन पालन का काम शुरू किया।
विज्ञापन
नौणी विवि से मौन पालन का प्रशिक्षण लेने के बाद सनी आज दूसरे लोगों को भी मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दे रहे हैं। सनी ने तीन युवकों को भी रोजगार दिया है। सनी ने अपने छोटे भाई दिनेश चौहान को भी इस व्यवसाय में जोड़ दिया है। दिनेश चौहान दिल्ली में एक निजी बैंक में मैनेजर के पद पर तैनात थे। सनी ने कहा कि उनको भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक के नियमों में शहद बेचने के लिए लाइसेंस मिल गया है।
विज्ञापन
सनी ने कहा कि क्वालिटी के आधार पर शहद के दाम चार सौ से पंद्रह सौ रुपये प्रति किलो तय किए हैं। प्रदेश के अलावा दिल्ली, मुंबई से ऑनलाइन शहद की डिमांड बढ़ती जा रही है। हर महीने करीब तीन क्विंटल तक शहद को बाजार और लोगों के घरों तक पहुंचा रहे हैं। सनी ने बताया कि सेब के बगीचों में मधुमक्खियों के प्रागण से साठ प्रतिशत तक अधिक पैदावार की संभावनाएं होती हैं।
विज्ञापन