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विश्व धरोहर दिवस: 113 सालों में एक इंच आगे नहीं बढ़ पाया कालका-शिमला ट्रैक

विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 18 Apr 2022 01:51 PM IST
सार

1930 में महात्मा गांधी इसी टॉय ट्रेन से लार्ड इरविन से मिलने शिमला आए थे। ब्रिटिश इंजीनियर मिस्टर बड़ोग के नाम पर बड़ोग रेलवे स्टेशन का नाम रखा गया है। अपने 119 वर्षों के सफर में यह रेलमार्ग कई इतिहास संजोए है।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहर घोषित कालका-शिमला हेरिटेज रेल ट्रैक 119 साल का हो गया है। अंग्रेजों ने साल 1903 में कालका और शिमला के बीच रेल सेवा शुरू की थी। 1909 में शिमला रेलवे स्टेशन से शिमला एक्सटेंशन (भलखू रेल संग्रहालय) तक 890 मीटर विस्तार हुआ था। 113 सालों में कालका-शिमला ट्रेन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाई है।


1814 से 1816 तक हुए एंग्लो नेपाल युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शिमला को बेस कैंप बनाया था।

1864 में शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी और ब्रिटिश आर्मी का मुख्यालय बनाया गया। कालका से शिमला को जोड़ने के लिए दिल्ली अंबाला कालका रेलवे कंपनी ने रेल लाइन बिछाने का काम शुरू किया। प्रोजेक्ट के चीफ  इंजीनियर एचएस हैरिंगटन थे। 1898 में प्रोजेक्ट शुरू हुआ और 5 साल बाद 1903 में पूरा हुआ। 9 नवंबर 1903 को ट्रेन का संचालन शुरू हो गया। अंग्रेजों ने किन्नौर जिले के कल्पा तक रेल ट्रैक बिछाने की योजना बनाई थी, जो पूरी नहीं हो सकी। 1905 में बना स्टीम इंजन केसी 520 अभी भी शिमला और कैथलीघाट के बीच संचालित किया जाता है।


1930 में महात्मा गांधी इसी टॉय ट्रेन से लार्ड इरविन से मिलने शिमला आए थे। ब्रिटिश इंजीनियर मिस्टर बड़ोग के नाम पर बड़ोग रेलवे स्टेशन का नाम रखा गया है। अपने 119 वर्षों के सफर में यह रेलमार्ग कई इतिहास संजोए है। यह रेलमार्ग उत्तर रेलवे के अंबाला डिवीजन में आता है। देश विदेश के सैलानी शिमला के लिए इसी रेलमार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का लुत्फ  उठाते हैं। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।  

कालका और शिमला के बीच 19 स्टेशन
कालका, टकसाल, गुम्मन, कोटी, जाबली, सनवारा, धर्मपुर, कुमारहट्टी, सोलन, सोलन ब्रूरी, सलोगड़ा, कंडाघाट, कनोह, कैथलीघाट, शोघी, तारादेवी, जतोग, समरहिल, शिमला
 
जुलाई 2008 में मिला विश्व धरोहर का दर्जा
कालका-शिमला रेललाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया था। कनोह रेलवे स्टेशन पर ऐतिहासिक आर्च गैलरी पुल 1898 में बना था। शिमला जाते यह पुल 64.76 किमी पर मौजूद है। आर्च शैली में निर्मित चार मंजिला पुल में 34 मेहराबें हैं।

बाबा भलखू के सहयोग से पूरी हुई थी सुरंग
कालका से 41 किमी दूर बड़ोग रेलवे स्टेशन के पास बड़ोग सुरंग है, जिसे सुरंग नंबर 33 भी कहते हैं। 1143.61 मीटर लंबी सीधी सुरंग है। इसे बनाते हुए जब दोनों सिरे नहीं मिले थे तो ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग ने एक रुपया जुर्माना लगने के कारण आत्महत्या कर ली थी। बाद में बाबा भलखू के सहयोग से यह सुरंग पूरी हुई थी।

बॉलीवुड के लिए रहा है आकर्षण का केंद्र
कालका-शिमला रेललाइन बॉलीवुड के लिए आकर्षण का केंद्र रही है। 1974 में सुपरहिट फिल्म दोस्त का गाना गाड़ी बुला रही है, इसी मार्ग पर फिल्माया गया था। 1960 में शम्मी कपूर की फिलम ब्वाय फ्रेंड का गाना मुझको अपना बना लो, कालका-शिमला रेलमार्ग पर शूट हुआ। साल 2000 में प्रीति जिंटा की फिल्म क्या कहना के साथ ऑल इज वेल, जब वी मेट, सनम रे और रमैया वस्तावेया जैसी फिल्मों की शूटिंग इस ट्रैक पर हो चुकी है।

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