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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   World Forestry Day: Chief Minister started the campaign 'Hategi Fulnu ,lautegi chauragaha'

विश्व वानिकी दिवस: शिमला में मुख्यमंत्री ने शुरू किया ‘हटेगी फुलणू, लौटेगी चरागाह’ अभियान

Tue, 21 Mar 2023 09:02 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 21 Mar 2023 09:02 PM IST
सार

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वनों की आग न केवल वन संपदा, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता, वातावरण और पारिस्थितिकी को प्रभावित करता है। गर्मियों में सूखे के दौरान वन चीड़ की पत्तियों और सूखे घास-फूस से भर जाते हैं। 

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World Forestry Day: Chief Minister started the campaign 'Hategi Fulnu ,lautegi chauragaha'
मुख्यमंत्री ने किया ‘हटेगी फुलणू, लौटेगी चरागाह’ अभियान का शुभारंभ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को शिमला में विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर ‘हटेगी फुलणू, लौटेगी चरागाह’ अभियान आरंभ किया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को वनों की आग की रोकथाम और लैंटाना प्रभावित क्षेत्रों में पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के बारे में जागरूक करना है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वनों की आग न केवल वन संपदा, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता, वातावरण और पारिस्थितिकी को प्रभावित करता है। गर्मियों में सूखे के दौरान वन चीड़ की पत्तियों और सूखे घास-फूस से भर जाते हैं। उन्होंने कहा कि वनों में आग के कारण न सिर्फ वन संपदा प्रभावित होती है, बल्कि भूमि की उर्वरता के साथ-साथ जल स्रोतों को भी नुकसान पहुंचता है। मुख्यमंत्री ने वन संपदा संरक्षण और हानिकारक खरपतवार को जड़ से उखाड़ने के संबंध में लोगों को जागरूक करने के लिए जागरुकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। आ

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ठ दिन तक चलने वाला यह अभियान 28 मार्च को संपन्न होगा। मुख्यमंत्री ने वनों के संरक्षण में जन जागरुकता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि वन राज्य के लिए बहुमूल्य संपत्ति है और हर वर्ष गर्मियों के दौरान वनों में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे करोड़ों की वन संपदा और अन्य जीव-जंतुओं का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से इसे रोकने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जंगल की आग से पारिस्थितिकी तंत्र और अर्थव्यवस्था दोनों पर दुष्प्रभाव पड़ता है। उन्होंने लोगों से इस अभियान को सफल बनाने के लिए वन विभाग को पूर्ण सहयोग देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि लैंटाना खरपतवार विशेष तौर पर राज्य के निचले क्षेत्रों में पारिस्थितिकी तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है और इसमें लोगों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लैंटाना कृषि और वन भूमि दोनों के लिए ही हानिकारक है।
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मुख्यमंत्री ने लैंटाना उन्मूलन पर पोस्टर और वनों में आग पर एक पुस्तिका भी जारी की। प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल (एचओएफएफ) राजीव कुमार ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और अभियान की गतिविधियों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि आठ दिनों के इस अभियान के दौरान प्रचार टीम पारिस्थितिकी बहाली के तहत 48 केंद्रों तक पहुंचकर लोगों को जागरूक करेगी। इन वाहनों में लोगों को वनों में आग से निपटने के प्रति जागरूकता सामग्री उपलब्ध होगी। मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक हरीश जनारथा, हिमाचल प्रदेश वन निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची, प्रधान सचिव ओंकार चंद शर्मा, कैंपा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नागेश कुमार सहित अन्य गणमान्य और वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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