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Shimla News: विश्वबैंक ने पूछा, कौन पी रहा है बिना बिल वाला 40 फीसदी पानी
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विश्वबैंक की टीम ने किया कार्यों का निरीक्षण
पेयजल कंपनी के दफ्तर में चला बैठकों का दौर
पूछा, क्यों नहीं किया 850 करोड़ का दूसरा टेंडर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पेयजल सुविधा देने की योजना का जायजा लेने शिमला पहुंची विश्वबैंक की 11 सदस्यीय टीम ने इसके काम का निरीक्षण शुरू कर दिया है। बैंक के अधिकारियों ने इस दौरान पूछा कि आखिर बिना बिल के 40 फीसदी पानी कौन पी रहा है। सोमवार को दिनभर पेयजल कंपनी के यूएस क्लब स्थित कार्यालय में बैंक की टीम के साथ कई बैठकें चलीं।
बैंक ने पेयजल कंपनी से इस योजना के काम की रिपोर्ट भी तलब की है। पूछा कि 850 करोड़ रुपये के दूसरे प्रोजेक्ट का काम क्यों शुरू नहीं किया गया। कंपनी ने रिपोर्ट दी कि इस प्रोजेक्ट का टेंडर आमंत्रित किया जा चुका है। सरकार से मंजूरी मिलते ही इसे अवार्ड कर दिया जाएगा। पहले दिन बैंक के साथ शहर में बिना बिल के सप्लाई हो रहे पानी पर लंबी चर्चा हुई। आंकड़ों के अनुसार शिमला शहर में आ रहा पानी का करीब 40 फीसदी हिस्सा अभी बिना बिल के सप्लाई हो रहा है। कंपनी को इस पानी से कोई बिल नहीं आ रहा। उधर विश्व बैंक की शर्ताें के अनुसार यह मात्रा 15 फीसदी या इससे कम होनी चाहिए। बैंक के अधिकारियों ने पूछा कि आखिर बिना बिल के 40 फीसदी पानी कौन पी रहा है। इसकी मात्रा घटाई जाए। कंपनी ने लीकेज कम करने, बेकार बह रहे पानी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। कहा कि नॉन रेवन्यू वाटर की मात्रा अब काफी घट गई है। कंपनी की रिपोर्ट से बैंक के अधिकारी संतुष्ट दिखे, लेकिन इसे और कम करने को कहा है।
दूसरे कामों का भी जायजा लेगी टीम
विश्वबैंक की यह टीम अब सतलुज से शिमला के लिए बिछाई जा रही पेयजल लाइन और सीवरेज नेटवर्क को बिछाने के काम का भी जायजा ले सकती है। विश्वबैंक शिमला शहर में 24 घंटे पेयजल सुविधा देने और हर घर को सीवरेज लाइन से जोड़ने की 1813 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना पर काम कर रहा है। करीब 1100 करोड़ रुपये विश्वबैंक देगा जबकि बाकी पैसा सरकार वहन करेगी। बैठक में पेयजल कंपनी के प्रबंध निदेशक पंकज ललित, महाप्रबंधक राजेश कश्यप और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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पेयजल कंपनी के दफ्तर में चला बैठकों का दौर
पूछा, क्यों नहीं किया 850 करोड़ का दूसरा टेंडर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पेयजल सुविधा देने की योजना का जायजा लेने शिमला पहुंची विश्वबैंक की 11 सदस्यीय टीम ने इसके काम का निरीक्षण शुरू कर दिया है। बैंक के अधिकारियों ने इस दौरान पूछा कि आखिर बिना बिल के 40 फीसदी पानी कौन पी रहा है। सोमवार को दिनभर पेयजल कंपनी के यूएस क्लब स्थित कार्यालय में बैंक की टीम के साथ कई बैठकें चलीं।
बैंक ने पेयजल कंपनी से इस योजना के काम की रिपोर्ट भी तलब की है। पूछा कि 850 करोड़ रुपये के दूसरे प्रोजेक्ट का काम क्यों शुरू नहीं किया गया। कंपनी ने रिपोर्ट दी कि इस प्रोजेक्ट का टेंडर आमंत्रित किया जा चुका है। सरकार से मंजूरी मिलते ही इसे अवार्ड कर दिया जाएगा। पहले दिन बैंक के साथ शहर में बिना बिल के सप्लाई हो रहे पानी पर लंबी चर्चा हुई। आंकड़ों के अनुसार शिमला शहर में आ रहा पानी का करीब 40 फीसदी हिस्सा अभी बिना बिल के सप्लाई हो रहा है। कंपनी को इस पानी से कोई बिल नहीं आ रहा। उधर विश्व बैंक की शर्ताें के अनुसार यह मात्रा 15 फीसदी या इससे कम होनी चाहिए। बैंक के अधिकारियों ने पूछा कि आखिर बिना बिल के 40 फीसदी पानी कौन पी रहा है। इसकी मात्रा घटाई जाए। कंपनी ने लीकेज कम करने, बेकार बह रहे पानी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। कहा कि नॉन रेवन्यू वाटर की मात्रा अब काफी घट गई है। कंपनी की रिपोर्ट से बैंक के अधिकारी संतुष्ट दिखे, लेकिन इसे और कम करने को कहा है।
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दूसरे कामों का भी जायजा लेगी टीम
विश्वबैंक की यह टीम अब सतलुज से शिमला के लिए बिछाई जा रही पेयजल लाइन और सीवरेज नेटवर्क को बिछाने के काम का भी जायजा ले सकती है। विश्वबैंक शिमला शहर में 24 घंटे पेयजल सुविधा देने और हर घर को सीवरेज लाइन से जोड़ने की 1813 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना पर काम कर रहा है। करीब 1100 करोड़ रुपये विश्वबैंक देगा जबकि बाकी पैसा सरकार वहन करेगी। बैठक में पेयजल कंपनी के प्रबंध निदेशक पंकज ललित, महाप्रबंधक राजेश कश्यप और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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