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महिला दिवस: पति की मौत के बाद हार नहीं मानी खड़ा कर दिया महिलाओं का समूह, बेजुबानों के लिए खोले घर के द्वार

Sat, 08 Mar 2025 01:14 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, राजा का तालाब (कांगड़ा)
संवाद न्यूज एजेंसी, राजा का तालाब (कांगड़ा) Published by: Krishan Singh Updated Sat, 08 Mar 2025 01:14 PM IST
सार

रजनी की शादी 2001 में जवाली की नाणा पंचायत के वीर सिंह से हुई। 2020 में किडनी फेल होने की वजह से रजनी के पति का देहांत हो गया।

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Women's Day: After the death of her husband, she did not give up and formed a group of women
रजनी, त्रिशला ठाकुर - फोटो : संवाद

विस्तार

जीवन में आई विभिन्न परेशानियों को पार करके रजनी ने आज उस मुकाम को हासिल करके बता दिया है कि स्वाभिमान का जीवन जीना है, तो किसी पर आश्रित होकर नहीं रहना चाहिए। दसवीं पास 48 वर्षीय रजनी पत्नी दिवंगत वीर सिंह के जीवन की कहानी भी कुछ ऐसी है।  रजनी की शादी 2001 में जवाली की नाणा पंचायत के वीर सिंह से हुई। 2020 में किडनी फेल होने की वजह से रजनी के पति का देहांत हो गया। दो साल मानसिक तनाव के बीच ननद और अन्य हितैषी महिलाओं ने कुछ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद घर से लगभग पचास किलोमीटर दूर इंदौरा के मलाहड़ी में समूह के साथ अचार, मुरब्बे और चटनी बनाने का कार्य शुरू किया। मई 2024 में जब गृहिणी स्वयं स्वरोजगार संघ दयनीय स्थिति से गुजर रहा था। तब रजनी ने उसकी सचिव बनकर अन्य महिलाओं को अपने साथ जोड़कर एक समूह बनाया और संस्था को फिर से खड़ा करने में विशेष भूमिका निभाई। आज इस समूह संस्था में कार्य करके 15 से 20 महिलाएं अपनी रोजी रोटी को सुचारू रूप से चला रही हैं। आज वह और अन्य सहयोगी महिलाएं 10 से 15 हजार रुपये महीने का कमाकर अपना जीवन यापन बेहतरीन रूप से चला रही हैं, जो कि अन्य के लिए प्रेरणा स्वरूप है। रजनी का कहना है कि मन में ठान लें तो कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता।

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त्रिशला बेजुबानों के लिए खोले घर के द्वार
राजा का तालाब (कांगड़ा)। जब दुनिया सिर्फ अपने खुद के लाभ और आराम के बारे में सोचती है, तब कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो दूसरों की पीड़ा को महसूस करते हुए उनके लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। त्रिशला ठाकुर, कांगड़ा जिले के भरमाड़ गांव की 53 वर्षीय महिला, ऐसे ही एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं। जहां एक ओर कुछ लोग आवारा और घायल जानवरों को सड़कों पर छोड़कर उन्हें तिरस्कृत कर देते हैं, वहीं त्रिशला जैसे लोग उनके लिए आश्रय और इलाज प्रदान करते हैं, बिना किसी स्वार्थ के। त्रिशला ठाकुर के घर में फिलहाल एक गाय, सप्ताह पहले महाशिवरात्रि के दिन जन्मी उसकी एक बछड़ी, एक बछड़ा और एक बैल, जिसकी डेढ़ साल पहले किसी ने टांग तोड़ दी थी। वह इनकी सेवा में दिन-रात डटीं हैं। खास बात यह है कि उन्होंने इन अनजान पशुओं के अलग-अलग नाम रखे हैं। इस कार्य में उनके पति चुनाव आयोग में सेवानिवृत्त निर्वाचन अधिकारी प्रताप सिंह ठाकुर पूर्ण सहयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्य में उनकी पड़ोसी नीलम कुमारी भी उनका सहयोग करती हैं। त्रिशला के अनुसार जब भी कोई जानवर मरण शैय्या पर होता है तो उसे गंगाजल पिलातीं हैं और गीता का पाठ भी सुनाती हैं। उनकी आनंदी नाम की एक बेटी भी है। 

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