इस महिला ने तोड़ी मंदिर में चली आ रही 500 साल पुरानी परंपरा
- महिला ने अपनी दो बेटियों के साथ किए बाबा बालक नाथ के दर्शन
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खुले थे महिलाओं के लिए मंदिरों के द्वार
- पूर्व में महिलाएं नहीं जाती थीं पवित्र गुफा के नजदीक, दूर से करतीं थीं दर्शन
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उत्तर भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ मंदिर में 500 साल पुरानी परंपरा टूट गई। महिला ने अपनी दो बेटियों के साथ शनिवार सायं पवित्र गुफा के समीप पहुंचकर बाबा बालक नाथ के दर्शन किए और पूजा अर्चना की। हमीरपुर के भोटा की रहने वाली महिला पेशे से स्कूल लेक्चरर हैं, जबकि उसकी दोनों बेटियां स्कूल में पढ़ती हैं।
सदियों से मंदिर की पवित्र गुफा में महिलाओं को अघोषित रूप से प्रवेश वर्जित था। वर्ष 2001 में गुफा के सामने बने चबूतरे से ही महिलाएं बाबा बालक नाथ के दर्शन करने लगी। यहां तक कि मंदिर परिसर में पुरुषों और महिलाओं के लिए बाबा के दर्शन करने के लिए भी अलग-अलग रास्ते हैं।
महिला गृहरक्षक जवान ने रोका लेकिन नहीं मानी
पुरुषों के लिए बना रास्ता सीधा बाबा बालक नाथ की पवित्र गुफा तक जाता है, जबकि महिलाओं के लिए बना रास्ता चबूतरे तक जाता है। शनिवार सायं महिला अपनी बेटियों सहित बाबा के दर्शनों के लिए मंदिर परिसर पहुंची तो महिलाओं के रास्ते से न जाकर पुरुषों के रास्ते मंदिर में प्रवेश हुई।
हालांकि, गेट पर तैनात महिला गृहरक्षक जवान ने महिला और उसकी बेटियों को रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन महिला ने महिला गृहरक्षक जवान की परवाह किए बिना पुरुषों के रास्ते से आगे बढ़ी। इतना ही नहीं पुरुषों के रास्ते में कुछेक पुजारियों ने भी महिला को पुरानी परंपरा के बारे में बताया, लेकिन महिला अपनी बेटियों के साथ बाबा की पवित्र गुफा तक बढ़ती रही।
महिला की पहल की मंदिर परिसर में खूब चर्चा
शाम के समय एक महिला ने अपनी दो बेटियों के साथ पुरुषों की कतार में पवित्र गुफा के पास आकर बाबा के दर्शन किए हैं। -ईश्वर दास शर्मा, मंदिर अधिकारी बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट दियोटसिद्ध
पवित्र गुफा के पास महिला और उसकी दो बेटियों द्वारा माथा टेकने की सूचना मंदिर अधिकारी ने मुझे दूरभाष के माध्यम से दी है। -अक्षय सूद, चेयरमैन बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट एवं एसडीएम बड़सर