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Shimla News: महिलाओं ने चीड़ की पत्तियों से सीखा सजावटी सामान बनाना
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शोघी में आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला में 35 महिलाओं को दिया गया प्रशिक्षण
सर्दियों के लिए कोयला बनाने का भी दिया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। विज्ञान शिक्षण एवं सृजनात्मकता केंद्र शोघी महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर कर रहा है। केंद्र में महिलाओं चीड़ की पत्तियों से सजावटी सामान बनाना भी सिखाया जा रहा है ताकि महिलाएं इसे स्वरोजगार के रूप में अपना सकें।
ईआईसीएपी-पीसी हब हिमाचल प्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकोस्ट) इस केंद्र को संचालित कर रहा है। केंद्र महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से आजीविका सृजन और वन अग्नि प्रबंधन में दक्ष कर रहा है। केंद्र के सौजन्य से आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला में शिमला, सोलन, चंबा और लाहौल स्पीति की 35 महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से उत्पाद बनाने सिखाए गए। ईआईएसीपी पीसी-हब हिमकोस्ट शिमला की वैज्ञानिक अधिकारी एवं समन्वयक प्रियंका शर्मा ने बताया कि महिलाएं इसे स्वरोजगार के रूप में अपना सकती हैं।
उपयुक्त प्रौद्योगिकी केंद्र सुंदरनगर (एटीसी) के वैज्ञानिक रमेश ठाकुर और फील्ड असिस्टेंट तेजेंद्र ने कोयला (ब्रिकेट्स) बनाने का प्रशिक्षण दिया। इन ब्रिकेट्स का उपयोग ईंधन के रूप में, खाना बनाने, पानी गर्म करने और सेंकने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इन्हें बेचकर आय अर्जित भी कर सकते हैं।जागृति स्वयं सहायता समूह कंडाघाट की अंजना देवी और रिया ने प्रतिभागियों को चीड़ की पत्तियों (पाइन नीडल) से हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया। इसमें टेबल मैट, कोस्टर, टोकरी, फूलदान, ट्रे आदि बनाना सिखाए गए। कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने अपने द्वारा बनाए उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई और प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव साझा किए। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए।
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सर्दियों के लिए कोयला बनाने का भी दिया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। विज्ञान शिक्षण एवं सृजनात्मकता केंद्र शोघी महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर कर रहा है। केंद्र में महिलाओं चीड़ की पत्तियों से सजावटी सामान बनाना भी सिखाया जा रहा है ताकि महिलाएं इसे स्वरोजगार के रूप में अपना सकें।
ईआईसीएपी-पीसी हब हिमाचल प्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकोस्ट) इस केंद्र को संचालित कर रहा है। केंद्र महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से आजीविका सृजन और वन अग्नि प्रबंधन में दक्ष कर रहा है। केंद्र के सौजन्य से आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला में शिमला, सोलन, चंबा और लाहौल स्पीति की 35 महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से उत्पाद बनाने सिखाए गए। ईआईएसीपी पीसी-हब हिमकोस्ट शिमला की वैज्ञानिक अधिकारी एवं समन्वयक प्रियंका शर्मा ने बताया कि महिलाएं इसे स्वरोजगार के रूप में अपना सकती हैं।
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उपयुक्त प्रौद्योगिकी केंद्र सुंदरनगर (एटीसी) के वैज्ञानिक रमेश ठाकुर और फील्ड असिस्टेंट तेजेंद्र ने कोयला (ब्रिकेट्स) बनाने का प्रशिक्षण दिया। इन ब्रिकेट्स का उपयोग ईंधन के रूप में, खाना बनाने, पानी गर्म करने और सेंकने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इन्हें बेचकर आय अर्जित भी कर सकते हैं।जागृति स्वयं सहायता समूह कंडाघाट की अंजना देवी और रिया ने प्रतिभागियों को चीड़ की पत्तियों (पाइन नीडल) से हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया। इसमें टेबल मैट, कोस्टर, टोकरी, फूलदान, ट्रे आदि बनाना सिखाए गए। कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने अपने द्वारा बनाए उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई और प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव साझा किए। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए।
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