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Shimla News: रंग-बिरंगे धागों से महिलाएं साकार कर रही स्वरोजगार के सपने
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धामी में प्रशिक्षण केंद्र महिलाओं को सिखाए जा रहे बुनाई के सरल आधुनिक डिजाइन
पहले बैच में 30 महिलाएं ले रही हैं प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। रंग-बिरंगे धागों को आपस में जोड़कर महिलाएं स्वरोजगार की राह पर अग्रसर हैं। हाथों से बुने गरम कपड़ों की मांग बाजार में भी बढ़ने लगी है। ऐसे में महिलाओं को आधुनिक बुनाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें घर बैठे ही रोजगार मुहैया करवाया जा रहा है।
धामी में ग्रामीण महिलाओं के नीटिंग (बुनाई) प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को बुनाई के सरल डिजाइन सिखाए गए। प्रशिक्षण केंद्र में इस समय 30 महिलाएं आधुनिक बुनाई करने आ रही हैं और अपना भविष्य संवार रही हैं। इनमें कुछ महिलाएं पहले से बेसिक बुनाई जानती हैं जिन्हें आधुनिक बुनाई की तकनीकें सिखाई जा रही हैं। कुछ महिलाएं पहली बार यह कार्य सीख रही हैं जिन्हें शुरुआत से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें उन्हें बुनाई की सामग्री यानी ऊन और सही आकार की दो सिलाई चुनने के बारे में बताया गया। इसके बाद महिलाओं को फंदे डालने यानी बुनाई पर पहला फंदा (इसे लोकल भाषा में घर डालना भी कहा जाता है) या स्लिप नॉट बनाकर शुरुआत करना, सीधा बुनना यानी बुनियादी टांका लगाना सिखाया गया।
मास्टर ट्रेनर चंपा देवी ने बताया कि पहले दिन उन्होंने महिलाओं से हेयर बैंड यानी रबड़, सूरज मुखी फूल सहित कई सजावटी उत्पाद बनाना सिखाया। इन्हें सरलता से बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके बाद वह महिलाओं को की-रिंग, हैंड पर्स, बैग, स्वेटर, बेबी फ्राक, बेबी सेट, टोपियां, शोपीस, दस्ताने और मफलर आधुनिक डिजाइन के साथ बनाना सिखाएंगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह सशक्त भी बनती हैं। ज्यादातर ग्रामीण महिलाओं को बुनाई तो आती है लेकिन आधुनिक डिजाइन की बुनाई सीखना भी जरूरी है ताकि उन्हें आर्थिक मजबूती भी मिले। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हेल्पिंग हैंड वेलफेयर संस्था की ओर से सीएमएस फाउंडेशन के सहयोग से चलाया जा रहा है।
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पहले बैच में 30 महिलाएं ले रही हैं प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। रंग-बिरंगे धागों को आपस में जोड़कर महिलाएं स्वरोजगार की राह पर अग्रसर हैं। हाथों से बुने गरम कपड़ों की मांग बाजार में भी बढ़ने लगी है। ऐसे में महिलाओं को आधुनिक बुनाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें घर बैठे ही रोजगार मुहैया करवाया जा रहा है।
धामी में ग्रामीण महिलाओं के नीटिंग (बुनाई) प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को बुनाई के सरल डिजाइन सिखाए गए। प्रशिक्षण केंद्र में इस समय 30 महिलाएं आधुनिक बुनाई करने आ रही हैं और अपना भविष्य संवार रही हैं। इनमें कुछ महिलाएं पहले से बेसिक बुनाई जानती हैं जिन्हें आधुनिक बुनाई की तकनीकें सिखाई जा रही हैं। कुछ महिलाएं पहली बार यह कार्य सीख रही हैं जिन्हें शुरुआत से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें उन्हें बुनाई की सामग्री यानी ऊन और सही आकार की दो सिलाई चुनने के बारे में बताया गया। इसके बाद महिलाओं को फंदे डालने यानी बुनाई पर पहला फंदा (इसे लोकल भाषा में घर डालना भी कहा जाता है) या स्लिप नॉट बनाकर शुरुआत करना, सीधा बुनना यानी बुनियादी टांका लगाना सिखाया गया।
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मास्टर ट्रेनर चंपा देवी ने बताया कि पहले दिन उन्होंने महिलाओं से हेयर बैंड यानी रबड़, सूरज मुखी फूल सहित कई सजावटी उत्पाद बनाना सिखाया। इन्हें सरलता से बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके बाद वह महिलाओं को की-रिंग, हैंड पर्स, बैग, स्वेटर, बेबी फ्राक, बेबी सेट, टोपियां, शोपीस, दस्ताने और मफलर आधुनिक डिजाइन के साथ बनाना सिखाएंगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह सशक्त भी बनती हैं। ज्यादातर ग्रामीण महिलाओं को बुनाई तो आती है लेकिन आधुनिक डिजाइन की बुनाई सीखना भी जरूरी है ताकि उन्हें आर्थिक मजबूती भी मिले। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हेल्पिंग हैंड वेलफेयर संस्था की ओर से सीएमएस फाउंडेशन के सहयोग से चलाया जा रहा है।
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