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Shimla News: शराब ठेके चलाने में निगम के हाथ खड़े, वापस लेने के लिए सरकार को लिखा पत्र
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खास खबर...
सरकार ने कुल 19 ठेकों के संचालन का नगर निगम को दिया था जिम्मा, डेढ़ माह में ही निगम के हाथ खड़े
निगम का तर्क, मासिक लाइसेंस फीस काफी ज्यादा, नहीं दे सकते इतनी फीस, ठेके चलाने के लिए स्टाफ भी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में शराब के ठेके चलाने से नगर निगम ने हाथ खड़े कर दिए हैं। संचालन के डेढ़ महीने के भीतर ही नगर निगम ने सरकार को पत्र लिखकर इन्हें वापस लेने का आग्रह कर दिया है। शहर में कुल 19 ठेकों का संचालन नगर निगम को सौंपा गया है। नगर निगम का तर्क है कि आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से शराब ठेकों का जो मासिक शुल्क तय किया गया है, वह काफी ज्यादा है, इसे चुकाना मुश्किल है।
नगर निगम पहली बार इस काम को कर रहा है जिसके चलते ठेके चलाने का अनुभव भी नहीं है। इसके अलावा नगर निगम को इन ठेकों के संचालन के लिए होमगार्ड जवान से लेकर अपने कर्मचारी तैनात करने पड़े हैं। इससे नगर निगम का काम भी प्रभावित हो रहा है। निगम की संपदा शाखा, टैक्स, स्वास्थ्य शाखा से मजदूर, कर्मचारी और इंस्पेक्टर तक इस काम में लगाने पड़े हैं। इसके बावजूद कमाई उतनी नहीं है कि सरकार की ओर से तय फीस चुकाई जा सके। इसलिए इन ठेकों का संचालन सरकार किसी दूसरे महकमे से करवाए। नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि सरकार को इस बारे में पत्र लिखा गया है। नगर निगम शराब के ठेके सरेंडर करने जा रहा है। सरकार से इस पर आगामी दिशा निर्देश मिलने का इंतजार है।
ठेके चलाने पर पार्षद भी उठा चुके हैं सवाल
शहर में शराब के ठेके चलाने पर पार्षद भी नगर निगम पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा के अलावा कांग्रेस के कई अपने पार्षद भी सवाल उठा रहे हैं कि नगर निगम का काम जनता को सुविधाएं देना है, शराब बेचना नहीं। सदन में भी पार्षदों ने इस पर सवाल उठाए थे। उधर, नगर निगम भी न चाहते हुए शराब बेचने को मजबूर है। सरकार के आदेशों के चलते निगम को न सिर्फ इस काम के लिए हामी भरनी पड़ी, बल्कि रातोंरात उपनगरों में कई दुकानें भी खड़ी करनी पड़ीं। बिना नक्शे के किए गए इनके निर्माण पर भी सवाल उठ चुके हैं।
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सरकार ने कुल 19 ठेकों के संचालन का नगर निगम को दिया था जिम्मा, डेढ़ माह में ही निगम के हाथ खड़े
निगम का तर्क, मासिक लाइसेंस फीस काफी ज्यादा, नहीं दे सकते इतनी फीस, ठेके चलाने के लिए स्टाफ भी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में शराब के ठेके चलाने से नगर निगम ने हाथ खड़े कर दिए हैं। संचालन के डेढ़ महीने के भीतर ही नगर निगम ने सरकार को पत्र लिखकर इन्हें वापस लेने का आग्रह कर दिया है। शहर में कुल 19 ठेकों का संचालन नगर निगम को सौंपा गया है। नगर निगम का तर्क है कि आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से शराब ठेकों का जो मासिक शुल्क तय किया गया है, वह काफी ज्यादा है, इसे चुकाना मुश्किल है।
नगर निगम पहली बार इस काम को कर रहा है जिसके चलते ठेके चलाने का अनुभव भी नहीं है। इसके अलावा नगर निगम को इन ठेकों के संचालन के लिए होमगार्ड जवान से लेकर अपने कर्मचारी तैनात करने पड़े हैं। इससे नगर निगम का काम भी प्रभावित हो रहा है। निगम की संपदा शाखा, टैक्स, स्वास्थ्य शाखा से मजदूर, कर्मचारी और इंस्पेक्टर तक इस काम में लगाने पड़े हैं। इसके बावजूद कमाई उतनी नहीं है कि सरकार की ओर से तय फीस चुकाई जा सके। इसलिए इन ठेकों का संचालन सरकार किसी दूसरे महकमे से करवाए। नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि सरकार को इस बारे में पत्र लिखा गया है। नगर निगम शराब के ठेके सरेंडर करने जा रहा है। सरकार से इस पर आगामी दिशा निर्देश मिलने का इंतजार है।
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ठेके चलाने पर पार्षद भी उठा चुके हैं सवाल
शहर में शराब के ठेके चलाने पर पार्षद भी नगर निगम पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा के अलावा कांग्रेस के कई अपने पार्षद भी सवाल उठा रहे हैं कि नगर निगम का काम जनता को सुविधाएं देना है, शराब बेचना नहीं। सदन में भी पार्षदों ने इस पर सवाल उठाए थे। उधर, नगर निगम भी न चाहते हुए शराब बेचने को मजबूर है। सरकार के आदेशों के चलते निगम को न सिर्फ इस काम के लिए हामी भरनी पड़ी, बल्कि रातोंरात उपनगरों में कई दुकानें भी खड़ी करनी पड़ीं। बिना नक्शे के किए गए इनके निर्माण पर भी सवाल उठ चुके हैं।
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