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इस पौराणिक मंदिर में पति-पत्नी ने एक साथ दर्शन किए तो हो जाता है बिछोड़ा

Tue, 15 Oct 2019 06:09 PM IST
Krishan Singh धर्मेंद्र बोज्ञाटो, अमर उजाला, रामपुर
धर्मेंद्र बोज्ञाटो, अमर उजाला, रामपुर Published by: Krishan Singh Updated Tue, 15 Oct 2019 06:09 PM IST
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When the husband and wife visit together in this mythical temple, they separated
- फोटो : अमर उजाला

देवभूमि हिमाचल के मंदिरों से सदियों से ऐसी अनोखी परंपराएं जुड़ी हैं जिन्हें लोग आज भी मानते चले आ रहे हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक एवं पौराणिक मंदिर शिमला जिले के रामपुर में 11000 फीट की ऊंचाई पर श्री श्राईकोटी माता का है।

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यहां पति-पत्नी मंदिर में एक साथ तो जाते हैं लेकिन मां की मूर्ति के साथ दर्शन नहीं करते। दोनों में से एक मंदिर के बाहर रहता है। जब एक माथा टेककर बाहर आएगा, तभी दूसरा भीतर जाएगा। ऐसा सदियों से होता आ रहा है।
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हालांकि, शास्त्रों के अनुसार पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान पति-पत्नी के एक साथ करने पर ही पूर्ण होते हैं। लेकिन यहां ऐसा करने से मां नाराज हो जाती हैं।  मान्यता है कि श्री श्राईकोटी मंदिर में माता शैलपुत्री के रूप में विराजमान है।
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एकसाथ माथा टेकने से माता नाराज हो जाती हैं और दंपती में बिछोड़ा हो जाता है। यही कारण है कि पांडवों के समय से बने इस मंदिर में आज भी पति-पत्नी एक साथ देवी के दर्शन नहीं करते हैं। 

हर साल पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु

When the husband and wife visit together in this mythical temple, they separated

इस अनोखी परंपरा के बावजूद मंदिर में हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी हरिनंद बताते हैं कि दंत कथा के अनुसार जब भगवान शिव और देवी पार्वती ने अपने दोनों बेटों की परीक्षा ली और उन्हें पूरे ब्रह्मांड का चक्कर काटने को कहा तो गणेश ने शिव और पार्वती की परिक्रमा कर परीक्षा जीत ली। कार्तिक पूरे ब्रह्मांड का चक्कर काटने निकल पड़े।

कार्तिक लौटे तब तक गणेश का विवाह हो गया। इसके बाद कार्तिक ने विवाह न करने का प्रण लिया। आज भी श्री श्राईकोटी के द्वार पर गणेश अपनी पत्नी के साथ विराजमान हैं। कार्तिक के शादी न करने के प्रण से देवी पार्वती बहुत दुखी हो गईं और कहा कि जो भी पति-पत्नी एक साथ यहां उनके दर्शन करेगा उस दंपती को बिछुड़ने का दंड मिलेगा।

पुजारी कहते हैं कि यही कारण है कि आज भी यहां पति-पत्नी एक साथ पूजा नहीं करते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी का दावा है कि देवी उन लोगों को भी संतान देती है, जिनकी हर जगह से उम्मीद टूट चुकी होती है। देवी ने ऐसे लोगों को भी संतान का सुख दिया है जिनको चिकित्सकों ने भी मना कर दिया था।

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