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कोरोना के बीच मौसम की मार
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शिमला। जिले में सेब बागवानों को ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। पहले ही कोरोना महामारी के चलते सेब बागवान काफी नुकसान उठा चुके हैं, अब ओलावृष्टि ने इनकी कमर तोड़कर रख दी है। लगातार दो दिन हुई ओलावृष्टि से सेब और अन्य गुठलीदार फलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। आजकल सेब फ्लावलिंग और फलों की सेटिंग का समय है। ऐसे में ओलावृष्टि से फूल झड़ रहे हैं और लगे फल भी जमीन पर गिर जाते हैं।
कोरोना कर्फ्यू के चलते बागवानों को हेलनेट लगाने के लिए मजदूर नहीं मिले। इस कारण ओलावृष्टि से सेब की फसल भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से ऊपरी शिमला की करीब 16 पंचायतों में सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है। बागवानों का कहना है कि फ्लावरिंग के दौरान इस तरह अधिक ओलावृष्टि पिछले पंद्रह सालों में कभी नहीं देखी। इससे चेरी, खुमानी, बादाम, सेब और गुठलीदार फलों को क्षति पहुंची है। भरेड़ी की रहने वाली मीरा भैक, ठियोग के किशोरी, अजय, बलदेव और राकेश ने बताया कि ओलावृष्टि से उनकी सारी फसल बर्बाद हो गई है। ऋण की किस्तें तक चुकाना मुश्किल हो गई हैं। ओलावृष्टि से मटर और फूलगोभी की फसल को भी नुकसान हुआ है। तीन दिन से हो रही बारिश और ओलावृष्टि से जिले के किसानों को लाखों की क्षति हुई है।
बागवानी विशेषज्ञ एवं उद्यान विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर नरेश ने कहा कि फ्लावरिंग और सेब की सेटिंग के समय बारिश तथा ओलावृष्टि खतरनाक है। इस समय हेलनेट ही सेब को बचाने में कारगर सिद्ध हो सकता है। ओलावृष्टि से मझार, जैस, मतयाणा, गड़ी, शिलारू, ड्यूटी घाट, सरोग, बसा ठयोग, भराड़ा, घुड़, तयाली, संदू, नाहोल, फागु, बडी और कुफरी आदि पंचायतों में भारी नुकसान हुआ है।
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हेलनेट ही बचाव का तरीका : शर्मा
उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक केएल शर्मा ने कहा कि सेब की फसल को जाल से ही बचाया जा सकता है। नुकसान का आकलन किया जाएगा। उन्होंने बागवान को सलाह दी कि वह बगीचों में हेलनेट लगा लें।
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कोरोना कर्फ्यू के चलते बागवानों को हेलनेट लगाने के लिए मजदूर नहीं मिले। इस कारण ओलावृष्टि से सेब की फसल भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से ऊपरी शिमला की करीब 16 पंचायतों में सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है। बागवानों का कहना है कि फ्लावरिंग के दौरान इस तरह अधिक ओलावृष्टि पिछले पंद्रह सालों में कभी नहीं देखी। इससे चेरी, खुमानी, बादाम, सेब और गुठलीदार फलों को क्षति पहुंची है। भरेड़ी की रहने वाली मीरा भैक, ठियोग के किशोरी, अजय, बलदेव और राकेश ने बताया कि ओलावृष्टि से उनकी सारी फसल बर्बाद हो गई है। ऋण की किस्तें तक चुकाना मुश्किल हो गई हैं। ओलावृष्टि से मटर और फूलगोभी की फसल को भी नुकसान हुआ है। तीन दिन से हो रही बारिश और ओलावृष्टि से जिले के किसानों को लाखों की क्षति हुई है।
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बागवानी विशेषज्ञ एवं उद्यान विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर नरेश ने कहा कि फ्लावरिंग और सेब की सेटिंग के समय बारिश तथा ओलावृष्टि खतरनाक है। इस समय हेलनेट ही सेब को बचाने में कारगर सिद्ध हो सकता है। ओलावृष्टि से मझार, जैस, मतयाणा, गड़ी, शिलारू, ड्यूटी घाट, सरोग, बसा ठयोग, भराड़ा, घुड़, तयाली, संदू, नाहोल, फागु, बडी और कुफरी आदि पंचायतों में भारी नुकसान हुआ है।
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हेलनेट ही बचाव का तरीका : शर्मा
उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक केएल शर्मा ने कहा कि सेब की फसल को जाल से ही बचाया जा सकता है। नुकसान का आकलन किया जाएगा। उन्होंने बागवान को सलाह दी कि वह बगीचों में हेलनेट लगा लें।