शिमला-कालका रेलवे ट्रैक पर तोड़फोड़, देरी से चली ट्रेनें
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हैरिटेज कालका-शिमला रेलवे ट्रैक के साथ कुछ शरारती तत्वों ने आधी रात को तोड़फोड़ कर रेल सेवा ठप कर दी। रबौण के पास शरारती तत्वों ने पानी की पाइपें तोड़ दी। इस कारण सोलन से साढ़े छह बजे रवाना होने वाली ट्रेन करीब ढाई घंटे देरी से शिमला की ओर रवाना हुई। दूसरी ट्रेन भी गंतव्य के लिए कुछ देरी से छूटी।
बताया जा रहा है कि ट्रैक की सुरक्षा को ताक पर रखकर आईपीएच ने पटरी के किनारे पानी की नई पाइपें खुले में बिछा दी। देर रात कुछ शरारती तत्वों ने पाइपें तोड़ दी जिससे भारी मात्रा में पानी बहने लगा। इससे पहाड़ी से भूस्खलन हुआ और कीचड़ ट्रैक पर आ गया।
इसकी सूचना स्थानीय लोगों ने सुबह रेल विभाग को दी। करीब 6 बजे रेल अधिकारियों को अंबाला से सूचना मिली जिसके बाद रेलवे कर्मियों की टीम मौके पर पहुंची। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद ट्रैक बहाल किया गया। इस दौरान पहली ट्रेन को धर्मपुर में ही रोक दिया गया।
कीचड़ में फंसी पहली ट्रेन
ट्रैक को आठ बजे के बाद क्लीयर किया गया। ट्रेन को धर्मपुर से हरी झंडी मिली, लेकिन जैसे ही रेल स्पाट पर पहुंची सवारियों से भरी ट्रेन कीचड़ में फंस गई। कुछ देर रेल ट्रैक पर रूकी ही रही। उसके बाद मौके पर मजूदरों ने ट्रैक को फिर साफ किया तब जाकर सेवा बहाल हो सकी।
इस दौरान यात्रियों में काफी रोष दिखा। रोजाना सफर करने वालों का कहना था कि आज एक बार फिर सुबह के समय कालका से शिमला रेल मार्ग से सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
सुरक्षा पर सवाल
सुरक्षा पर सवाल उठता है कि शरारती तत्व कभी भी ट्रैक को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं? सवाल उठ रहे हैं कि क्या आईपीएच को खुले में ट्रैक किनारे पाइपें बिछाने के लिए रेलवे ने नहीं रोका? अगर बिछा दी गई थी तो क्या रेल विभाग ने इसे नोटिस नहीं किया? एक ओर रेलवे विभाग हेरिटेज धरोहर को बचाने और साख बढ़ाने की बात करता है ऊपर से इस तरह की सुरक्षा में खामियां किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है?
13 नवंबर को हांफी थी ट्रेन
इससे पहले 13 नंबवर को भी ट्रेन सोलन के दोहरी दीवार के पास हांफ गई थी। इस दौरान यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। एक घंटे तक ट्रेन ट्रैक पर ही खड़ी रही। कंडाघाट से नया इंजन मंगवाने के बाद रेल मार्ग बहाल हो सका था। उधर, आए दिन रेल हांफने या ट्रैक बाधित होने से रेलवे की साख पर भी असर पड़ रहा है।
छह बजे मिली थी सूचना
मौके पर मौजूद रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर कृष्ण लाल शर्मा ने बताया कि सुबह 6 बजे एमपीएस अंबाला से उन्हें सूचना मिली थी। जानकारी दी गई कि टनल नंबर 37 के पास ट्रैक पर मलबा गिरा हुआ है। सूचना पाते ही टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैक को खोलने में कामयाब हो सके। उसके बाद शिमला जाने वाली ट्रेन रवाना हो सकी।
शरारती तत्वों ने पहुंचाया नुकसान
आईपीएच के सहायक अभियंता राजपाल ठाकुर ने बताया कि कुछ समय पहले ही विभाग द्वारा नई पाइप लाइन बिछाई गई थी। जगह न होने के कारण पाइपों को खुले में छोड़ना पड़ा। उन्होंने आशंका जताई कि शरारती तत्वों द्वारा इन पाइपो को नुकसान पहुंचाया गया।