जलसंरक्षण परियोजना के लिए तीन जिलों का हुआ चयन, 708 करोड़ जारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलसंरक्षण परियोजना की शुरुआत के लिए हिमाचल प्रदेश के तीन जिलों के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों का ही चयन किया गया है। इन जिलों में मंडी, हमीरपुर और बिलासपुर जिलों के कुछ क्षेत्र शामिल हैं। 4751 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए केंद्र ने 708.87 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है। यह जानकारी सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने दी।
मंत्री ने बताया कि 2.5 लाख छोटे और सीमांत किसानों को सुदृढ़ करना तथा हिमाचल में पांच नदियों तक फैली हुई हिमालयी परिस्थितियों को बनाए रखना भी इस योजना का उद्देश्य है। मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
हालांकि, प्रथम चरण में यह परियोजना जल की कमी वाले चुनिंदा क्षेत्रों में लागू की जाएगी। इनमें मंडी जिले के धर्मपुर, लड़भड़ोल और थुनाग, हमीरपुर जिले के बमसन, सुजानपुर और बिलासपुर जिले के घुमारवीं में 708.87 करोड़ रुपये के विभिन्न जल सरंक्षण कार्य किए जाएंगे।
परियोजना के माध्यम से मुख्य तौर पर कृषि क्षेत्र में विकास के स्रोतों पर बल दिया गया है। वर्ष 2017 तक 2.691 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाएं दी गई हैं जबकि 65,885 हेक्टेयर क्षेत्र पर अभी भी सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य जल का अनुकूलतम उपयोग करना है।
चैक डैम, उप सतह बांध, पुनर्भरण शॉफ्ट और रिसाव टैंक बनाए जाएंगे
मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा है कि प्रोजेक्ट के तहत ढांचा, मेड़बंदी, बेलनाकार ढांचा, खोद कर कुएं बनाना, गाद अवधारण संरचना, चैक डैम, उप सतह बांध, पुनर्भरण शॉफ्ट और रिसाव टैंक बनाए जाएंगे। जल के उत्तम इस्तेमाल, समेकित कृषि और कृषि विविधीकरण के लिए सिंचाई सुविधाओं के निर्माण पर 377.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य प्रमुख फसलों जैसे गेहूं, मक्की और धान का उत्पादन बढ़ाकर इसे विश्व स्तर की फसल उत्पादकता के बराबर ले जाना है। मुख्य उद्देश्य 2022-23 तक किसानों की आय को दोगुना करने के अतिरिक्त जल संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के लिए कृषि अनुकूलन क्षमता को बढ़ाना है।