विधानसभा चुनाव 2017- हिमाचल में वोटर खामोश और नेता बेचैन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल में चुनाव प्रचार की बदली हुई सूरत राजनीतिक पंडितों को उलझाए हुए है। वोटरों की खामोशी ने नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है। आमतौर पर हिमाचल में सत्ता बेशक कांग्रेस और भाजपा के बीच घूमती रही हो, लेकिन इस बार माहौल कई मायनों में बदला हुआ है।
ऐसे में अब राजनीतिक दलों के चिंतक और रणनीतिकार चुनावी सभाओं की भीड़ और जोश के आधार पर ही आकलन कर रहे हैं। हालांकि, यह बात अलग है कि सभी दलों के शीर्ष नेता उनके पक्ष में हवा होने का दावा कर रहे हैं।
2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले परिदृश्य इस बार बदला हुआ है। राज्य के चुनाव में इस बार मतदाता चुप्पी साधे हुए हैं। राजनीतिक दलों के नेता इसकी वजह चुनाव आयोग की बंदिशों को मान रहे हैं।
चुनावी खर्च को लेकर प्रत्याशी हिसाब-किताब में उलझे हुए हैं। झंडे और बैनरों से लेकर लड़ियों का तामझाम भी नाममात्र का नजर आ रहा है। चुनावी खर्च की जवाबदेही के डर से चुनाव बिना शोरगुल के हो रहा है।
प्रत्याशियों के साथ-साथ समर्थकाें में भी पूर्ववर्ती चुनावों की तरह जोश नहीं दिख रहा है। उधर, भाजपा-कांग्रेस सहित कई अन्य दलों के राष्ट्रीय नेता इन दिनों हिमाचल में चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। ऐसे में चुनावी रैलियां ही आकलन का आधार बनी हुई हैं।
चुनाव प्रचार को बचे सिर्फ पांच दिन
हिमाचल विधानसभा के चुनाव प्रचार को अब सिर्फ पांच दिन बचे हैं। सात नवंबर को प्रचार थम जाएगा और नौ नवंबर को मतदान होगा। ऐसे में अंतिम दिनों में सभी राजनीतिक दलों ने सारी ताकत झोंकना शुरू कर दी है। हालांकि, मतदान के बाद चुनाव परिणाम के लिए 18 दिसंबर तक यानी करीब सवा महीना इंतजार करना पड़ेगा।
सोशल मीडिया पर गरमाई है राजनीति
शिमला। हिमाचल में इन दिनों सोशल मीडिया पर राजनीति खूब गरमाई हुई है। भाजपा ने हिसाब मांगे हिमाचल नाम से फेसबुक पर पेज बनाया है, जबकि कांग्रेस जवाब देगा हिमाचल पेज से भाजपा के खिलाफ मुखर है। भाजपाई अपने पेज को वायरल कर जहां कांग्रेस को घेर रहे हैं, वहीं कांग्रेसियों ने केंद्र सरकार की नाकामियों को अपने पेज पर मुद्दा बनाया है। भाजपा और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशी भी सोशल मीडिया को प्रचार-प्रसार का मुख्य हथियार बनाए हुए हैं।
बड़े नेताओं के लाइव चल रहे भाषण
फेसबुक पर भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं के भाषणों का भी लाइव प्रसारण किया जा रहा है। भाजपा की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित प्रेमकुमार धूमल सहित प्रदेश के दौरे पर आ रहे केंद्रीय मंत्रियों और कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे भाषणों को फेसबुक पर लाइव दिखाया जा रहा है। इसके अलावा बड़े नेताओं की प्रेस कांफ्रेंस भी फेसबुक पर लाइव चली हुई हैं।
कई नेताओं ने बनाए हैं स्पांसर पेज
शिमला। भाजपा और कांग्रेस की ओर से विधानसभा चुनाव में उतरे कई प्रत्याशियों ने फेसबुक पर अपने नाम से विशेष स्पांसर पेज भी शुरू किए हैं। इन पेज के माध्यम से प्रत्याशी मतदाताओं से वोट अपील करने के साथ-साथ अपने प्रतिद्वंद्वी की कमियों को भी उजागर कर रहे हैं। इन पेज को लाइक करने वालों के फेसबुक होम पेज पर प्रत्याशी की हर गतिविधि की दिख रही है।
व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर हो रहा प्रचार
शिमला। प्रत्याशियों ने पंचायत, गांव, वार्ड और मोहल्लों के स्तर पर प्रचार करने के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप भी बनाए हैं। इन ग्रुप के माध्यम से प्रत्याशियों के समर्थक वोट की अपील कर रहे हैं। किस प्रत्याशी की कब और कहां बैठक, नुक्कड़ सभा और जनसभा होगी, इसकी जानकारी पहुंचाई जा रही है। व्हाट्सऐप ग्रुप में आने वाले अपडेट्स को समर्थक दूसरे ग्रुप में भेजकर वायरल कर रहे हैं।