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Shimla News: आईजीएमसी में नहीं हो रहे कैंसर मरीजों के ईको टेस्ट
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टेस्ट के लिए जाना पड़ रहा चमियाना अस्पताल
मरीजों को टैक्सी के माध्यम से पहुंचना पड़ रहा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के टर्शरी कैंसर सेंटर में मरीजों को ईको टेस्ट की सुविधा नहीं मिल रही है। इस कारण मरीजों को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हैरत की बात यह है कि भर्ती मरीजों को भी टैक्सी के माध्यम से अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। इससे मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। वहीं भर्ती मरीजों को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ईको टेस्ट करवाने के लिए लंबी कतार में भी खड़ा होना पड़ता है। बताया जा रहा है कि जब से कार्डियोलॉजी विभाग चमियाना में स्थानांतरित हुआ है, तब से ईको टेस्ट की सुविधा वहीं दी जा रही है। इस कारण कैंसर से पीड़ित मरीजों या शुरुआती जांच के लिए ईको टेस्ट करवाने वाले मरीजों को आईजीएमसी से चमियाना के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। भीड़ अधिक होने पर मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वहीं चमियाना अस्पताल दूर होने के कारण कई मरीज निजी क्लीनिकों में ही ईको टेस्ट करवा रहे हैं। निजी क्लीनिकों में इसके लिए 400 से 2,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों पर दोहरी मार पड़ रही है और उन्हें अलग से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आईजीएमसी से सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना करीब सात किलोमीटर दूर है। ईको टेस्ट करवाने के लिए भर्ती मरीजों को एंबुलेंस या टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है। कई बार मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल पाती है। ऐसे में उन्हें टैक्सी से अस्पताल जाना पड़ता है। मरीजों के अनुसार, टैक्सी चालक करीब 1,000 रुपये तक किराया लेते हैं। अगर टेस्ट में अधिक समय लग जाए तो टैक्सी का किराया 1,500 से 2,000 रुपये तक पहुंच जाता है। इससे पहले से उपचार का खर्च उठा रहे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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केस स्टडी
आकाश ने बताया कि वह जिला मंडी के रहने वाले हैं। माता के गले में बार-बार गांठें बन रही थीं। पहले टांडा मेडिकल कॉलेज में जांच करवाई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। इसके बाद आईजीएमसी के ईएनटी विभाग में उपचार करवाया। इसी दौरान कई टेस्ट करवाए गए, लेकिन रिपोर्ट में कुछ दिक्कत आने के बाद मामला कैंसर विभाग को भेजा गया।शुरुआती जांच के दौरान चिकित्सक ने ईको, बायोप्सी समेत अन्य टेस्ट करवाने के लिए कहा। अस्पताल में पता चला कि ईको टेस्ट के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना जाना पड़ेगा। इसके बाद टैक्सी करके सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचे। वहां लंबी कतार में लगने के बाद करीब दो घंटे में ईको टेस्ट हो पाया।
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मरीजों को टैक्सी के माध्यम से पहुंचना पड़ रहा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के टर्शरी कैंसर सेंटर में मरीजों को ईको टेस्ट की सुविधा नहीं मिल रही है। इस कारण मरीजों को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हैरत की बात यह है कि भर्ती मरीजों को भी टैक्सी के माध्यम से अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। इससे मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। वहीं भर्ती मरीजों को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ईको टेस्ट करवाने के लिए लंबी कतार में भी खड़ा होना पड़ता है। बताया जा रहा है कि जब से कार्डियोलॉजी विभाग चमियाना में स्थानांतरित हुआ है, तब से ईको टेस्ट की सुविधा वहीं दी जा रही है। इस कारण कैंसर से पीड़ित मरीजों या शुरुआती जांच के लिए ईको टेस्ट करवाने वाले मरीजों को आईजीएमसी से चमियाना के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। भीड़ अधिक होने पर मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वहीं चमियाना अस्पताल दूर होने के कारण कई मरीज निजी क्लीनिकों में ही ईको टेस्ट करवा रहे हैं। निजी क्लीनिकों में इसके लिए 400 से 2,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों पर दोहरी मार पड़ रही है और उन्हें अलग से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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आईजीएमसी से सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना करीब सात किलोमीटर दूर है। ईको टेस्ट करवाने के लिए भर्ती मरीजों को एंबुलेंस या टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है। कई बार मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल पाती है। ऐसे में उन्हें टैक्सी से अस्पताल जाना पड़ता है। मरीजों के अनुसार, टैक्सी चालक करीब 1,000 रुपये तक किराया लेते हैं। अगर टेस्ट में अधिक समय लग जाए तो टैक्सी का किराया 1,500 से 2,000 रुपये तक पहुंच जाता है। इससे पहले से उपचार का खर्च उठा रहे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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केस स्टडी
आकाश ने बताया कि वह जिला मंडी के रहने वाले हैं। माता के गले में बार-बार गांठें बन रही थीं। पहले टांडा मेडिकल कॉलेज में जांच करवाई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। इसके बाद आईजीएमसी के ईएनटी विभाग में उपचार करवाया। इसी दौरान कई टेस्ट करवाए गए, लेकिन रिपोर्ट में कुछ दिक्कत आने के बाद मामला कैंसर विभाग को भेजा गया।शुरुआती जांच के दौरान चिकित्सक ने ईको, बायोप्सी समेत अन्य टेस्ट करवाने के लिए कहा। अस्पताल में पता चला कि ईको टेस्ट के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना जाना पड़ेगा। इसके बाद टैक्सी करके सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचे। वहां लंबी कतार में लगने के बाद करीब दो घंटे में ईको टेस्ट हो पाया।