Protest: शिमला में व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने बारिश के बीच पांच घटे किया प्रदर्शन
स्कूलों और कॉलेजों में व्यावसायिक कोर्स के प्रशिक्षकों ने गुरुवार को शिमला के चौड़ा मैदान में मांगों के समर्थन में पांच घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। इनमें महिला प्रशिक्षकों की संख्या अधिक रही। छोटे बच्चों के साथ महिला प्रशिक्षक धरने पर बैठी रहीं।
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हिमाचल प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों में व्यावसायिक कोर्स के प्रशिक्षकों ने गुरुवार को शिमला के चौड़ा मैदान में मांगों के समर्थन में पांच घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। इनमें महिला प्रशिक्षकों की संख्या अधिक रही। छोटे बच्चों के साथ महिला प्रशिक्षक धरने पर बैठी रहीं। हल्की बारिश के बीच जुटे सैकड़ों प्रशिक्षकों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग की। हरियाणा की तर्ज प्रदेश में ठेका प्रथा बंद करने और नीति के तहत 30,500 रुपये मासिक वेतन और सालाना इसमें पांच फीसदी की वृद्धि करने की मांग की। प्रदेश वोकेशनल ट्रेनर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष यशवंत ठाकुर, राज्य मीडिया प्रभारी लीलाधर, सुचिता की अगुवाई में जुटे सैकड़ों प्रशिक्षकों ने करीब पांच घंटे तक धरना प्रदर्शन किया।
यशवंत ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में 2013 से प्रशिक्षण दे रहे 1994 और कॉलेजों में 2017 से प्रशिक्षण दे रहे 138 प्रशिक्षकों की इस जायज मांग को सरकार जल्द पूरा करे। करीब साढ़े 12 बजे संघ के पदाधिकारी मुख्यमंत्री से मिलने के लिए विधानसभा गए। करीब दो बजे मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात कर विधानसभा समाप्त होने पर शाम को अलग से विस्तृत चर्चा करने का समय दिया। करीब तीन बजे विधानसभा से सीएम से मुलाकात करने के बाद प्रशिक्षक संघ पदाधिकारियों ने धरना स्थल चौड़ा मैदान में पहुंच धरने को समाप्त करने का एलान किया। मुख्यमंत्री ने एसोसिएशन के विभिन्न मुद्दों को ध्यान से सुना और इन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।
सात माह के बच्चे और मां के साथ धरने में शामिल हुईं ज्योति
चौड़ा मैदान में सैकड़ों व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने बारिश के बावजूद धरना प्रदर्शन जारी रखा। प्रदर्शन में शामिल सुनयना, तनुजा, किशोर, कुश भारद्वाज, गौरव, दिनेश कुमार सहित बिलासपुर के जैजबीं स्कूल की प्रशिक्षक ज्योति अपने सात माह के बच्चे और अपनी माता पुष्पा देवी के साथ धरने पर डटी रहीं। पुष्पा देवी ने कहा कि महज पंद्रह हजार से अपना खर्च भी पूरा नहीं होता, इससे परिवार कैसे चलेगा।