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हिमाचल: छोटी काशी मंडी में खत्म होगा गैस सिलिंडर का झंझट! पाइपलाइन से घरों तक पहुंचेगी रसोई गैस; जानें
Tue, 13 Oct 2026 10:12 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 13 Oct 2026 10:12 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर में पाइपलाइन से रसोई गैस पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा है। टारना और चडयारा में जमीन चिह्नित कर ली गई है, जबकि नेरचौक मेडिकल कॉलेज में अंतिम मंजूरी का इंतजार है। परियोजना आगे बढ़ने पर लोगों को गैस सिलिंडर की बुकिंग और डिलीवरी की परेशानी से राहत मिल सकती है।
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मंडी में अब पाइस से मिलेगी गैस।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी मंडी में आने वाले समय में लोगों को रसोई गैस सिलिंडर की बुकिंग और डिलीवरी के इंतजार से राहत मिल सकती है। शहर में पाइपलाइन के माध्यम से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए मंडी शहर के टारना और चडयारा में जमीन चिह्नित कर ली गई है। वहीं, श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल नेरचौक में जमीन की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही आगामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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हिमाचल प्रदेश में फिलहाल ऊना जिले में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है। अब मंडी के साथ कांगड़ा, हमीरपुर और सिरमौर जिलों में भी इस सुविधा को शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए गैसोनेट कंपनी को गैस की आपूर्ति का जिम्मा सौंपा गया है। शुरुआती चरण में मंडी शहर और नेरचौक में आधारभूत ढांचा तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
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टारना और चडयारा में जमीन चिह्नित
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के जिला नियंत्रक बृजेंद्र सिंह ने बताया कि मंडी शहर के टारना और चडयारा में जमीन का चयन कर लिया गया है। नेरचौक मेडिकल कॉलेज में भी जमीन चिह्नित करने के बाद आगामी कार्रवाई की जा रही है। वहां अंतिम मंजूरी मिलने के बाद अगले चरण का काम शुरू होगा। इस परियोजना के तहत आधारभूत ढांचे और वितरण व्यवस्था को विकसित किया जाएगा। इसके बाद घरों तक पाइपलाइन बिछाने और उपभोक्ताओं को कनेक्शन उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। हालांकि, शहर के सभी घरों तक गैस पहुंचने में कितना समय लगेगा, इसकी समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के जिला नियंत्रक बृजेंद्र सिंह ने बताया कि मंडी शहर के टारना और चडयारा में जमीन का चयन कर लिया गया है। नेरचौक मेडिकल कॉलेज में भी जमीन चिह्नित करने के बाद आगामी कार्रवाई की जा रही है। वहां अंतिम मंजूरी मिलने के बाद अगले चरण का काम शुरू होगा। इस परियोजना के तहत आधारभूत ढांचे और वितरण व्यवस्था को विकसित किया जाएगा। इसके बाद घरों तक पाइपलाइन बिछाने और उपभोक्ताओं को कनेक्शन उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। हालांकि, शहर के सभी घरों तक गैस पहुंचने में कितना समय लगेगा, इसकी समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
पाइपलाइन से सीधे रसोई तक पहुंचेगी गैस
पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी प्राकृतिक गैस का वह रूप है, जिसकी आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों और अन्य उपभोक्ताओं तक की जाती है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन होती है। घरों में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध होने के बाद उपभोक्ताओं को सिलिंडर की बुकिंग, डिलीवरी का इंतजार करने और खाली सिलिंडर बदलवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गैस की आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से होगी। इससे रसोई में गैस की उपलब्धता अधिक सुविधाजनक हो सकती है। हालांकि, इसके लिए घरों तक वितरण नेटवर्क पहुंचाना और आवश्यक कनेक्शन उपलब्ध करवाना जरूरी होगा। परियोजना के तहत इन व्यवस्थाओं को विकसित किए जाने के बाद ही उपभोक्ता इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी प्राकृतिक गैस का वह रूप है, जिसकी आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों और अन्य उपभोक्ताओं तक की जाती है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन होती है। घरों में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध होने के बाद उपभोक्ताओं को सिलिंडर की बुकिंग, डिलीवरी का इंतजार करने और खाली सिलिंडर बदलवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गैस की आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से होगी। इससे रसोई में गैस की उपलब्धता अधिक सुविधाजनक हो सकती है। हालांकि, इसके लिए घरों तक वितरण नेटवर्क पहुंचाना और आवश्यक कनेक्शन उपलब्ध करवाना जरूरी होगा। परियोजना के तहत इन व्यवस्थाओं को विकसित किए जाने के बाद ही उपभोक्ता इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
एलपीजी के विकल्प के रूप में बढ़ रहा पीएनजी का इस्तेमाल
पाइप्ड नेचुरल गैस को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी के विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। एलपीजी की आपूर्ति सिलिंडर के माध्यम से होती है, जबकि पीएनजी सीधे पाइपलाइन से घर तक पहुंचती है। इस कारण उपभोक्ताओं को सिलिंडर रखने, उठाने और बदलने की परेशानी से राहत मिल सकती है। पीएनजी का वास्तविक खर्च गैस की खपत, स्थानीय दरों और कनेक्शन शुल्क पर निर्भर करेगा। सुरक्षा के लिहाज से भी पाइपलाइन नेटवर्क, उपकरणों और कनेक्शन का निर्धारित मानकों के अनुसार रखरखाव जरूरी होगा। मंडी और नेरचौक में प्रस्तावित व्यवस्था आगे बढ़ने से क्षेत्र के उपभोक्ताओं को भविष्य में रसोई गैस का एक और विकल्प मिल सकता है। फिलहाल परियोजना की अगली प्रक्रिया नेरचौक मेडिकल कॉलेज में अंतिम मंजूरी मिलने पर निर्भर है।
पाइप्ड नेचुरल गैस को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी के विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। एलपीजी की आपूर्ति सिलिंडर के माध्यम से होती है, जबकि पीएनजी सीधे पाइपलाइन से घर तक पहुंचती है। इस कारण उपभोक्ताओं को सिलिंडर रखने, उठाने और बदलने की परेशानी से राहत मिल सकती है। पीएनजी का वास्तविक खर्च गैस की खपत, स्थानीय दरों और कनेक्शन शुल्क पर निर्भर करेगा। सुरक्षा के लिहाज से भी पाइपलाइन नेटवर्क, उपकरणों और कनेक्शन का निर्धारित मानकों के अनुसार रखरखाव जरूरी होगा। मंडी और नेरचौक में प्रस्तावित व्यवस्था आगे बढ़ने से क्षेत्र के उपभोक्ताओं को भविष्य में रसोई गैस का एक और विकल्प मिल सकता है। फिलहाल परियोजना की अगली प्रक्रिया नेरचौक मेडिकल कॉलेज में अंतिम मंजूरी मिलने पर निर्भर है।
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