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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Virendra Chauhan is the constitutional president of HGTU

Shimla Court: राजकीय अध्यापक संघ के प्रधान वीरेंद्र चौहान ही संवैधानिक अध्यक्ष

Mon, 03 Oct 2022 08:25 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 03 Oct 2022 08:25 PM IST
सार

राजकीय अध्यापक संघ के प्रधान की बर्खास्तगी को जिला अदालत ने गलत ठहराया है।  सत्र न्यायाधीश शिमला अशोक शर्मा ने संघ के नाम, पंजीकरण संख्या, सिंबल और संघ के पैसों के प्रयोग पर रोक लगा दी है।

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Virendra Chauhan is the constitutional president of HGTU
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रधान की बर्खास्तगी को जिला अदालत ने गलत ठहराया है।  सत्र न्यायाधीश शिमला अशोक शर्मा ने संघ के नाम, पंजीकरण संख्या, सिंबल और संघ के पैसों के प्रयोग पर रोक लगा दी है। अदालत ने पाया कि वीरेंद्र चौहान को संविधान की प्रक्रिया सत्र 2019 से 22 तक चुना गया है। उन्हें प्रधान पद से हटाए जाने वाला निर्णय असंवैधानिक है।  प्रधान पर सरकार के खिलाफ बयानबाजी करने और संगठन के नाम पर 18 लाख रुपये के गबन करने संबंधित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। प्रतिवादी कैलाश ठाकुर ने 10 अप्रैल को उन्हें अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर खुद को कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर लिया था।

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दलील दी गई कि 10 अप्रैल को हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ की कोई बैठक नहीं हुई। संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया कि न तो  संघ के नाम पर किसी ने स्वीकृति मांगी और न ही स्कूल में कोई बैठक हुई है। अदालत ने पाया कि  जिन 212 लोगों के अपने हस्ताक्षर किए हैं, उनमें से अधिकतर लोगों ने इस बैठक के बारे में अनभिज्ञता जताई है। अदालत ने कैलाश ठाकुर, महावीर कैंथला, श्याम लाल हांडा, देवराज ठाकुर और सुनील शर्मा के निष्कासन को भी सही ठहराया है। ये अब संगठन के न तो किसी पद पर बने रहेंगे और न ही किसी अन्य संगठन के सदस्य होंगे।
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अध्यापक संघ की आम सभा आठ को चंबा में 
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ की राज्य स्तरीय आम सभा आठ अक्तूबर को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय छात्रा चंबा में रखी गई है। इसमें संघ की आगे की रणनीति और रूपरेखा पर चर्चा होगी। प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि एसएमसी टीचर, कंप्यूटर टीचर्स, वोकेशनल टीचर भी अपने लिए पॉलिसी की मांग कर रहे हैं ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। 
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वाहन दुर्घटना के आश्रितों को 16.17 लाख का मुआवजा
 वाहन दुर्घटना में मृतक के आश्रितों को 16.17 लाख रुपये का मुआवजा अदा करने के आदेश दिए गए हैं। प्रवीण चौहान वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण शिमला ने अपने आदेश में कहा कि इंश्योरेंस कंपनी इस मुआवजे को नौ फीसदी ब्याज दर के साथ अदा करेगी। आश्रितों में मृतक की पत्नी और दो बच्चे शामिल हैं। 31 दिसंबर 2011 को छैला के समीप सड़क हादसे में व्यक्ति की मौत हो गई थी। मृतक के आश्रितों ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण शिमला के समक्ष मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी। दलील दी गई कि मृतक पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत था। उसका मासिक वेतन 29,000 हजार रुपये था। याचिकाकर्ता पूरी तरह से मृतक की आय पर आश्रित थे। यह भी दलील दी गई कि इस दुर्घटना का मुख्य कारण चालक की लापरवाही थी। चालक और गाड़ी के मालिक की ओर से दलील दी गई कि गाड़ी का बीमा इंश्योरेंस कंपनी की ओर से करवाया गया था। मुआवजे की इंश्योरेंस कंपनी को दिए जाने का आग्रह किया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आश्रितों की ओर से मुआवजे के लिए दायर की गई याचिका को स्वीकार किया।  

 

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