वीरभद्र की गुगली ने उलझाए नेता, कांग्रेस में बढ़ सकती है गुटबाजी
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पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने लोकसभा चुनाव में कांगड़ा से सुधीर शर्मा और हमीरपुर से अभिषेक राणा को कांग्रेस टिकट देने की सार्वजनिक तौर पर पैरवी कर सियासत गरमा दी है। वीरभद्र सिंह की इस गुगली से टिकट के दावेदारों समेत कई कांग्रेसी उलझ गए हैं।
भले ही इसे जानकार इसे एक तीर से दो निशाने के रूप में देख रहे हैं, लेकिन हिमाचल कांग्रेस में इससे गुटबाजी को और हवा मिल सकती है। बेशक, लोस चुनाव में टिकट पार्टी हाई कमान तय करेगा, लेकिन छह बार मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के इस धुरंधर नेता के बयान ने खलबली मचा दी है।
वीरभद्र सिंह हालांकि खुद मंडी सीट से चुनाव लड़ने से फिलहाल मना कर रहे हैं, परंतु कांगड़ा और हमीरपुर संसदीय सीटों पर टिकट के लिए सुधीर शर्मा और विस चुनाव में धूमल का हराने वाले राजेंद्र राणा के बेटे के पक्ष में सार्वजनिक मंच से एलान कर कई नेताओं की नींद उड़ा दी है।
कांगड़ा सीट से सुधीर का नाम लेकर परोक्ष रूप से राजनीतिक विरोधी जीएस बाली की परेशानी बढ़ा दी है। हमीरपुर क्षेत्र में अभिषेक का नाम आगे कर जहां धूमल और अनुराग ठाकुर को उन्हीं के घर में घेरने की कोशिश की, वहीं प्रदेश
क्या कहते हैं पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर
अध्यक्ष सुक्खू पर भी निशाना साधा है। राजेंद्र राणा ने भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेमकुमार धूमल को पिछले विधानसभा चुनाव में हराकर हिमाचल की सियासत का रुख मोड़ दिया था।
हमीरपुर संसदीय सीट से लोक सभा चुनाव लड़ चुके पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर कहते हैं कि लोकसभा चुनाव कौन लड़ेगा, यह कांग्रेस हाईकमान तय करेगा। पूर्व मंत्री और कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री
जीएस बाली कहते हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले ऐसी बयानबाजी पर कोई टिप्पणी करना पसंद नहीं करूंगा। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का मैं सम्मान करता हूं। लोकसभा टिकटों के बारे में अभी कुछ भी कहना उचित नहीं है।