HP High Court: सरकार की गैर कानूनी कार्रवाई से संवैधानिक जनादेश का उल्लंघन
प्रदेश हाईकोर्ट ने भूमिगत जल के उपयोग के मामले में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने कहा कि सरकार की गैर कानूनी कार्यवाई से संवैधानिक जनादेश का उल्लंघन होता है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भूमिगत जल के उपयोग के मामले में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने कहा कि सरकार की गैर कानूनी कार्यवाई से संवैधानिक जनादेश का उल्लंघन होता है। सरकार की मनमानी रोकने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप करना जरूरी बन जाता है। कल्याणकारी सरकार को अनुदान, नौकरियों में कोटा, ठेके, लाइसेंस इत्यादि देने में निष्पक्ष रूप से कार्य करना चाहिए। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश विरेन्दर सिंह की खंडपीठ ने यह व्यवस्था दी है। अदालत ने ठियोग के बासा गांव में ताज रिसोर्ट को राज्य सरकार की ओर से दी गई भू जल उपयोग की अनुमति को रद्द कर दिया। अदालत के समक्ष ताज रिसोर्ट ने अपने खिलाफ रिट याचिका की मान्यता पर सवाल उठाया था। दलील दी गई थी कि विवादित आदेशों को चुनौती देने का वैकल्पिक उपाय मौजूद हाने के कारण रिट याचिका मान्य नहीं है। जैस गांव निवासी रमेश वर्मा और अन्यों ने याचिका दायर कर आरोप लगाया गया था कि ताज रिसोर्ट को भू जल निकालने की अनुमति नियमों को दरकिनार कर दी गई है।
मामले का रिकॉर्ड देखने पर कोर्ट ने पाया कि हिमाचल प्रदेश भूजल प्राधिकरण ने रिसोर्ट के ऑनलाइन आवेदन को नियमानुसार दो दैनिक अखबारों में प्रकाशित नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि सरकार की निष्पक्ष कार्रवाई सुशासन की आत्मा होती है। जनधन के मनमाने वितरण से कानून का उल्लंघन ही होता है। यह अदालत का विवेकाधिकार है कि वह किसी भी मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए रिट याचिका पर विचार किया जा सकता है। उच्च न्यायालयों ने खुद ही वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने की वजह से अपने ऊपर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। अदालत ने स्पष्ट कि कि वैकल्पिक उपाय की उपलब्धता के कारण रिट क्षेत्राधिकार के निषेध का नियम बाध्यता का नहीं बल्कि विवेक का है।
प्रदेश फुटबाल संघ के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर
जिला सिरमौर फुटबाल संघ ने हिमाचल प्रदेश फुटबाल संघ के महासचिव दीपक शर्मा के खिलाफ पद का दुरुपयोग करने पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। अदालत ने हिमाचल प्रदेश फुटबाल संघ को याचिका में अपना पक्ष रखने के लिए 27 सितंबर के लिए तलब किया है। अदालत ने अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ में नाम नामित करने के संबंध में मौजूदा याचिका के अंतिम निर्णय पर निर्भर होने के आदेश किए हैं। जिला सिरमौर फुटबाल संघ ने आरोप लगाया है कि अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) के संविधान के मुताबिक जो अस्थायी सदस्य दो वर्ष तक महासंघ का सदस्य होगा, वही इसका स्थायी सदस्य बन सकता है। हिमाचल प्रदेश फुटबाल संघ ने न तो अपनी वेबसाइट पर अपना संविधान दर्शाया है और न ही आय और व्यय का लेखाजोखा दिया है। प्रदेश फुटबाल संघ के महासचिव दीपक शर्मा ने कोई बैठक किए बिना स्वयं ही अनाधिकृत रूप से अपना नाम अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ के सदस्य के लिए नामित कर दिया।