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Vimal Negi Case: विमल नेगी मौत मामले में सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, शिमला पुलिस की FIR को बनाया केस का आधार

Tue, 27 May 2025 06:00 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 27 May 2025 06:00 PM IST
सार

सीबीआई ने विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 और 3(5) के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। 

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Vimal Negi Case: CBI filed FIR in Vimal Negi death case, handed over investigation to DSP
विमल नेगी(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंजीनियर विमल नेगी की मौत के मामले में सीबीआई ने नई दिल्ली स्थित विशेष अपराध शाखा में केस दर्ज कर लिया है। सीबीआई ने आत्महत्या के लिए उकसाने और सामूहिक इरादे से अपराध को अंजाम देने की धाराएं लगाते हुए एफआईआर दर्ज की है। यह केस भारतीय न्याय संहिता का धाराओं 108 और 3(5) के तहत पंजीकृत किया गया है। सीबीआई ने शिमला पुलिस की एफआईआर को केस का आधार बनाया है। इस एफआईआर में पावर कॉरपोरेशन के तत्कालीन निदेशक रहे देसराज और तत्कालीन एमडी हरीकेश मीणा को भी नामजद किया है।

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केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 23 मई के आदेशों की अनुपालना का उल्लेख करते हुए सीबीआई की विशेष अपराध शाखा-1 पुलिस स्टेशन नई दिल्ली में मामला दर्ज किया है। आरुषि हत्याकांड की जांच भी इसी विशेष अपराध शाखा के अधिकारियों ने की थी। इस मामले के जांच अधिकारी ब्रजेंद्र प्रसाद सिंह नियुक्त किए गए हैं। सीबीआई की ओर से दर्ज प्राथमिकी में शिमला पुलिस की एफआईआर को आधार बनाया है। प्राथमिकी की विषयवस्तु में देसराज और निगम के उस समय के प्रबंध निदेशक का हवाला है। पुलिस की प्राथमिकी की ही तरह इसमें प्रबंध निदेशक का नाम नहीं है।
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यह उल्लेखनीय है कि उस समय मीणा प्रबंध निदेशक थे। इसमें आरोपी की पत्नी किरण नेगी की ओर से इन अधिकारियों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और दुर्व्यवहार करने के आरोप हैं। हालांकि संदिग्ध आरोपी और अभियुक्त के कॉलम में अभी किसी का नाम नहीं है। इसमें अज्ञात व्यक्ति लिखा है। एफआईआर दर्ज होने के बाद सीबीआई की जांच टीम बुधवार को शिमला पहुंच सकती है। हालांकि सीबीआई की स्थानीय एंटी करप्शन शाखा के अधिकारियों को इस संबंध में रिकॉर्ड एकत्र करने को कहा है।
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जानें क्या है पूरा मामला
बता दें, विमल नेगी बीते 10 मार्च को लापता हो गए थे। 18 मार्च को बिलासपुर की गोबिंदसागर झील में उनका शव मिला। 19 मार्च को एम्स बिलासपुर में पोस्टमॉर्टम करवाया गया। इसी दिन परिजन शव को लेकर पावर कॉरपोरेशन कार्यालय कसुम्पटी के बाहर धरने पर बैठ गए और रात 10: बजे तक धरना दिया। परिजनों की मांग पर 19 मार्च को रात में एफआईआर हुई। इसी दिन निदेशक देसराज को निलंबित किया गया और  एमडी हरिकेश मीणा को पद से हटाया गया। इस बीच सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा को भी प्रशासनिक जांच करने को कहा। 15 दिन की जांच के बाद किरण नेगी ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए और हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका डालकर केस सीबीआई को देने का आग्रह किया। इस पर फैसला देने से पहले कोर्ट ने एसीएस, डीजीपी और एसपी शिमला को कोर्ट में स्टेट्स रिपोर्ट देने को कहा। तीनों रिपोर्ट अलग अलग थी। कोर्ट ने भी एसीएस और डीजीपी की स्टेट्स रिपोर्ट को आधार बनाते हुए शिमला पुलिस को फटकार लगाई और यह केस सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए।
 

क्या है बीएनएस की धारा 108 व 3(5) 
बीएनएस की धारा 108 आत्महत्या के लिए उकसाने पर लगती है।  इसमें यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है और जो कोई भी उसे ऐसा करने के लिए मजबूर करता है, तो उसे 10 साल तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किए जाने का प्रावधान है। वहीं बीएनएस की धारा 3(5) में उन मामलों में लागू होती है। जहां एक ही इरादे से कई व्यक्तियों की ओर से अपराध किया जाता है। यह प्रावधान बताता है कि ऐसे अपराध में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को अपराध के लिए जिम्मेदार माना जाएगा, जैसे कि उन्होंने इसे अकेले किया हो।

जानिए मामले में कब क्या हुआ
10 मार्च 2025 : चीफ इंजीनियर विमल नेगी शिमला से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए।
11 मार्च : पत्नी किरण नेगी की शिकायत पर थाना सदर में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई।
15 मार्च : डीजीपी ने एडीजीपी हेडक्वार्टर ज्ञानेश्वर सिंह की निगरानी में डीएसपी अमित कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी बनाई। इसमें एसएचओ सदर धर्मसेन नेगी, एसएचओ घुमारवीं अमिता देवी, एएसआई सदर यशपाल को शामिल किया।
18 मार्च : विमल नेगी का शव जिला बिलासपुर में गोबिंद सागर झील से थाना तलाई के अंतर्गत गाह धनीपखर से बरामद।
19 मार्च : एम्स बिलासपुर में पोस्टमार्टम करने के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।
19 मार्च : शाम को परिजनों ने शव एचपीपीसीएल मुख्यालय बीसीएस शिमला में रखकर चक्का जाम और प्रदर्शन किया। उन्होंने कॉरपोरेशन के उच्च अधिकारियों पर प्रताड़ित और गलत काम करने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए।
19 मार्च : किरण नेगी की शिकायत पर थाना न्यू शिमला में कॉरपोरेशन के निदेशक देशराज, एमडी हरिकेश मीणा और निदेशक शिवम प्रताप सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया।
19 मार्च : प्रदेश सरकार ने निदेशक देशराज को सस्पेंड किया और आईएएस व एमडी पॉवर कॉरपोरेशन हरिकेश मीणा को पद से हटाया।
 
19 मार्च : प्रदेश सरकार ने हाई पावर कमेटी का गठन किया गया। इसका जिम्मा अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा को सौंपा गया।
20 मार्च : विमल नेगी का उनके पैतृक गांव कटगांव किन्नौर में अंतिम संस्कार किया गया।
20 मार्च : एसपी शिमला ने एएसपी नवदीप सिंह की अध्यक्षता में विमल नेगी के मौत के कारणों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। इसमें डीएसपी शक्ति सिंह, डीएसपी विक्रम चौहान, इंस्पेक्टर मनोज कुमार शामिल थे।
26 मार्च : प्रदेश उच्च न्यायालय ने देशराज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
4 अप्रैल : देशराज को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली।
7 अप्रैल : आईएएस हरिकेश मीणा को प्रदेश उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत मिली।
21 अप्रैल : विमल नेगी की पत्नी ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
20 मई : प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिमला पुलिस को कोर्ट की अनुमति के बिना चार्जशीट दायर नहीं करने पर आदेश दिए।
21 मई : प्रदेश उच्च न्यायालय ने सीबीआई को जांच सौंपने की याचिका का फैसला सुरक्षित रखा।
23 मई : प्रदेश उच्च न्यायालय ने विमल नेगी मौत के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए।
26 मई: सीबीआई ने मामले में दिल्ली में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। 

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