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Shimla News: शिल्ली-मैहला में गांव छोड़े 10 चीयर फीजेंट
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चायल प्रजनन केंद्र में पाले गए हैं पक्षी
पक्षियों पर ट्रांसमीटर के जरिये रखी जाएगी नजर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। वन्य जीव सप्ताह के अवसर पर प्रदेश वन विभाग ने जिले के शिल्ली मैहला गांव में 10 चीयर फीजेंट पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा।
चीयर फीजेंट को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने संकटग्रस्त पक्षियों की श्रेणी में रखा है। चीयर फीजेंट की घटती आबादी को बढ़ाने के मकसद यह प्रयास किया है। यह पक्षी हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कुछ खास इलाकों में पाया जाता है। प्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2007 में चायल के खारियों में चीयर फीजेंट संरक्षण प्रजनन केंद्र की स्थापना की थी। पूरे भारत में केवल चायल में ही इनका प्रजनन करवाया जाता है।
कार्यक्रम के तहत आज जिन 10 पक्षियों को शिल्ली मैहला गांव में छोड़ा गया उन्हें चायल प्रजनन केंद्र में ही पाला गया था। प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यप्राणी) अमिताभ गौतम ने बताया कि चीयर फीजेंट संरक्षण कार्यक्रम के तहत 2019 से अब तक 53 पक्षियों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा चुका है। इन पक्षियों पर ट्रांसमीटर लगाए गए हैं जिनके माध्यम से उनकी गतिविधियों पर एक साल तक नजर रखी जाएगी।
संरक्षण के लिए हो रहे प्रयास : गौतम
प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यप्राणी) अमिताभ गौतम ने बताया कि प्रदेश न केवल चीयर फीजेंट बल्कि पश्चिमी ट्रगोपन और मोनाल जैसे दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। वन्य जीव सप्ताह पर आज का यह कार्यक्रम वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रदेश के जंगलों में इन दुर्लभ पक्षियों की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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पक्षियों पर ट्रांसमीटर के जरिये रखी जाएगी नजर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। वन्य जीव सप्ताह के अवसर पर प्रदेश वन विभाग ने जिले के शिल्ली मैहला गांव में 10 चीयर फीजेंट पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा।
चीयर फीजेंट को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने संकटग्रस्त पक्षियों की श्रेणी में रखा है। चीयर फीजेंट की घटती आबादी को बढ़ाने के मकसद यह प्रयास किया है। यह पक्षी हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कुछ खास इलाकों में पाया जाता है। प्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2007 में चायल के खारियों में चीयर फीजेंट संरक्षण प्रजनन केंद्र की स्थापना की थी। पूरे भारत में केवल चायल में ही इनका प्रजनन करवाया जाता है।
कार्यक्रम के तहत आज जिन 10 पक्षियों को शिल्ली मैहला गांव में छोड़ा गया उन्हें चायल प्रजनन केंद्र में ही पाला गया था। प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यप्राणी) अमिताभ गौतम ने बताया कि चीयर फीजेंट संरक्षण कार्यक्रम के तहत 2019 से अब तक 53 पक्षियों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा चुका है। इन पक्षियों पर ट्रांसमीटर लगाए गए हैं जिनके माध्यम से उनकी गतिविधियों पर एक साल तक नजर रखी जाएगी।
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संरक्षण के लिए हो रहे प्रयास : गौतम
प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यप्राणी) अमिताभ गौतम ने बताया कि प्रदेश न केवल चीयर फीजेंट बल्कि पश्चिमी ट्रगोपन और मोनाल जैसे दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। वन्य जीव सप्ताह पर आज का यह कार्यक्रम वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रदेश के जंगलों में इन दुर्लभ पक्षियों की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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