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Shimla News: बाल साहित्य उत्सव में बच्चों ने सीखा कहानियां लिखना

Thu, 20 Aug 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:59 PM IST
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Children learned to write stories at the children's literature festival.
गेयटी में आयोजित महोत्सव में शब्दावली की भी दी जानकारी, पर्यायवाची, विलोम और मुहावरों बारे बच्चों ने पूछे सवाल
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विकास जोशी की पुस्तक माई नेम इज सिनेमन पर की चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। मीमांसा-बाल साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन गेयटी थियेटर में बच्चों की रचनात्मकता और प्रतिभा का रंग देखने को मिला। लेखकों ने बच्चों को कहानी लिखना सिखाया। इसके साथ शब्दावली की जानकारी दी।

भाषा एवं संस्कृति विभाग और कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट शिमला की ओर से आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव में विद्यार्थियों, लेखकों, कलाकारों और साहित्य प्रेमियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। शुरुआत कक्षा छह से आठ के विद्यार्थियों की शब्दावली प्रतियोगिता से हुई। विद्यार्थियों से हिंदी और अंग्रेजी में पर्यायवाची, विलोम, मुहावरों और भाषा-कौशल से जुड़े सवाल पूछे गए। लिखित परीक्षा के बाद मौखिक चरण में उनकी त्वरित सोच और आत्मविश्वास को परखा गया। निर्णायक मंडल में प्रमिला नंदा, डॉ. अभिषेक प्रिंस रोहता और लेखक विकास प्रकाश जोशी शामिल रहे। इस दौरान लेखक प्रोबल जे. भट्टाचार्य की पुस्तक ऑलमोस्ट एडल्टिंग पर डॉ. अनीता शर्मा के संचालन में संवाद हुआ।
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विकास प्रकाश जोशी की पुस्तक माई नेम इज सिनेमन पर हुए सत्र में हर्ष ठाकुर, फलक और एकांश कुमार ने लेखक से बातचीत की। दूसरे दिन का खास आकर्षण लेखक और पर्यटन विशेषज्ञ सुमित राज के नेतृत्व में हुआ विरासत भ्रमण रहा। विद्यार्थियों ने रिज और गेयटी परिसर के आसपास के ऐतिहासिक स्थलों को देखा। इस दौरान उन्होंने शिमला की वास्तुकला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रोचक किस्से सुने। लेखिका और स्तंभकार पूजा प्रियंवदा ने कहानी-कथन एवं लेखन कार्यशाला में बच्चों को रोजमर्रा की जिंदगी से कहानी तलाशने और उसे प्रभावी ढंग से लिखने के गुर बताए। रितांजलि हस्तिर के संचालन में हुई कार्यशाला में पात्र, परिवेश और विचारों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया। महोत्सव में बाल काव्यधारा के लेखक ओम प्रकाश शर्मा के साथ संवाद हुआ। वहीं कार्टूनिस्ट और चित्रकार अजीत नारायण ने बच्चों को सरल रेखाओं और भाव-भंगिमाओं से पात्रों को जीवंत करना सिखाया। वक्तव्य प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने स्क्रीन की लत, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, किताब पढ़ने और इंटरनेट जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
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