नहीं चला वीरु, गंभीर का बल्ला, दिल्ली हारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली के साथ हुए पहले मैच में वीरेंद्र सहवाग महज 11 रन बनाकर पेवेलियन लौट गए तो वहीं गंभीर भी महज 36 रन ही बना पाए। कुल मिलाकर इंटरनेशनल क्रिकेट के ये दिग्गज खिलाड़ी हिमाचल प्रदेश बिलासपुर की लुहणू क्रिकेट पिच पर जम्मू की टीम के आगे ढेर हो गए।
जम्मू के कप्तान परवेज रसूल लक्की प्लेयर साबित हुए। उन्होंने टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण का निर्णय लिया। जिसका जम्मू की टीम को पूरा फायदा मिला। दिल्ली के सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग का जादू नहीं चल सका।
मिलिंद कुमार, रजत भाटिया का अर्धशतक
इंडिया टीम की यह जोड़ी दिल्ली के लिए खास नहीं कर पाई। वीरेंद्र सहवाग मजूद की गेंद पर विकेट कीपर के हाथों आसान सा केच दे बैठे। हालांकि, इससे पहले हाथ में गेंद लगने से चोटिल भी हुए थे। गंभीर ने टीम को अच्छी शुरूआत देते हुए 36 रन बनाए ही थे कि उन्हें भी शम्मी बेगूल ने क्लीन बोल्ड कर दिया।
मिलिंद कुमार ने शानदार अर्धशतक जड़ते हुए 61 रनों का योगदान दिया। जबकि रजत भाटिया ने भी 50 रन बनाए। इसके अलावा कोई भी खिलाड़ी दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर सका। पूरी ठीक 50 ओवर में आठ विकेट के नुकसान पर 212 रन बना पाई।
जम्मू के राम दयाल ने दो, मजूद ने दो, शम्मी ने तीन और आदिल ने एक विकेट लिया। जवाब में 212 रनों का पीछा करने मैदान में उतरी जम्मू टीम की शुरूआत खास नहीं रही। टीम के तीन बल्लेबाजी सस्ते में ही निपट गए।
जम्मू से हारी दिल्ली
लेकिन, मध्यमक्रम में बल्लेबाजी करने आए परवेज रसूल के 74 रनों की शानदार पारी की बदौलत टीम जीत तक पहुंच सकी। वसीम राजा ने नाबाद 27 रन व समीउल्लाह बैग नाबाद 20 रन बनाए। टीम ने 49.2 ओवर में 213 रन बनाकर मैच जीत लिया।
दिल्ली टीम के आशीष नेहरा ने एक, सुमित ने एक, परबिंद्र अवाना ने तीन और रजत ने एक खिलाड़ी को आउट किया। लगातार चार साल तक इंटरनेशनल क्रिकेट में खेल की ओपनिंग करने वाले सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर को आज बिलासपुर में भी देखा गया। बिलासपुर के यह मैच क्रिकेट के इतिहास में जुड़ जाएगा।
गेंदबाजों के लिए लुहणू का यह क्रिकेट स्टेडियम लक्की साबित हुआ। सुबह पड़ी ओंस की बूंदा का फायदा उठाते हुए जम्मू ने टॉस जीत कर बल्ले बाजी का निर्णय लिया। जिसका उन्हें फायदा मिला। वहीं वीरेंद्र और गंभीर जैसे बड़े खिलाड़ी प्रशंसकों का दिल नहीं जीत सके।