मित्रा को आरोपी बनाने के लिए ब्यूरो ने सरकार से मांगी अनुमति
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गैर कृषकों को धारा 118 के तहत प्रदेश में जमीन खरीदने की मंजूरी देने की एवज में घूस लेने के कथित मामले में राज्य चुनाव आयुक्त की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। विजिलेंस ने सरकार को पत्र लिखकर उन्हें आरोपी के तौर पर पूछताछ में शामिल करने की अनुमति मांगी है।
इसका मतलब यह होगा कि इसके बाद अगर ब्यूरो को जरूरत लगी तो वह बिना सरकार से दोबारा अनुमति मांगे मित्रा की गिरफ्तारी तक कर सकती हैं। ब्यूरो अब तक की जांच में कई अहम सबूत हाथ लगने का दावा कर रहा है। ऐसे में मित्रा के लिए मामले में खुद को बचाना आसान नहीं होगा।
विजिलेंस मुख्यालय में दो बार पूछताछ के बाद तत्कालीन प्रधान सचिव राजस्व मित्रा को अब ब्यूरो ने आरोपी बनाने के लिए पत्र लिखा है। सूत्रों की मानें तो इस कदम से मित्रा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक सकती है।
जांच में पुख्ता सबूत हाथ लगे
जांच में उनके खिलाफ पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि मित्रा के वर्तमान में राज्य चुनाव आयुक्त के संवैधानिक पद पर आसीन होने के चलते गिरफ्तारी से पहले सरकार से अनुमति लेना आवश्यक होगा। ऐसे में ब्यूरो गिरफ्तारी के बजाय पहले ही आरोपी के तौर पर पूछताछ व अन्य कार्रवाई के लिए अनुमति मांग रहा है।
सूत्रों का कहना है कि अगर सरकार मित्रा को आरोपी के तौर पर देखने की मंजूरी देती है तो इसके बाद ब्यूरो को गिरफ्तारी के लिए मंजूरी नहीं लेनी होगी। इसके बाद भी अगर वह उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करना चाहेगा तो अभियोजन मंजूरी सरकार से लेनी ही पड़ेगी।