1100 करोड़ के बागवानी घोटाले की अब विजिलेंस ब्यूरो करेगा जांच, पढ़ें पूरा मामला
विश्व बैंक की वित्तीय मदद से चलाए जा रहे बागवानी विकास प्रोजेक्ट के जरिये सेब पौधों के आयात को हिमाचल के अधिकारियों के बजाय एक विदेशी को ही इटली भेज दिया। जिसकी विजिलेंस जांच होगी।
बागवानी विभाग के अफसरों पर जांच का शिकंजा कसने जा रहा है। विश्व बैंक की 1138 करोड़ रुपये की योजना की मदद से बागवानी विकास प्रोजेक्ट में सेब के पौधे विदेश से आयात करने में तय प्रक्रिया की पूरी तरह से उपेक्षा करने का मामला विजिलेंस जांच को जाएगा।
सरकार देख रही है कि इस मामले में कौन-कौन से अधिकारी कसूरवार हैं। प्रोजेक्ट के तहत सेब के पौधों की खरीद में गड़बड़ी करने वाले कौन अधिकारी शामिल हैं। बागवानी विकास प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में करीब तीन लाख सेब के पौधे इटली से आयात किए गए हैं।
सेब के आयातित पौधों में से 25 फीसदी सूखे हुए थे और इनका सही इस्तेमाल नहीं हो पाया। सेब के पौधों के आयात के लिए बागवानी अधिकारियों की टीम को इटली भेजा जाना था। ऐसा न कर एक विदेशी को इटली भेजकर सेब के पौधे आयात किए गए।
टीम को आयात करने थे इटली से सेब के पौधे
प्रोजेक्ट के समझौते के अनुसार सेब पौधों का आयात करते समय डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिकों और बागवानी विभाग के अधिकारियों की टीम को इटली भेजा जाना था।
जब सेब के पौधे इटली से आयात किए जाने थे तो मौके पर जाकर टीम ने पौधों की स्थिति का जायजा लेना था। टीम के सदस्यों के समक्ष सेब के पौधों को नर्सरी से उखाड़ा जाना था। इसके बाद सेब के पौधों की पैकिंग भी टीम के सामने ही होती थी।
फरवरी से पहले आयात होने थे सेब के पौधे
इटली से हिमाचल को सेब के पौधे फरवरी से पहले भेजे जाने थे ताकि इन पौधों के नर्सरियों और बगीचों में लगाया जा सकता। ऐसा न करके सेब के पौधे मई और जून में आयात किए गए जबकि अधिक तापमान में नए सेब पौधे नहीं उगाए जा सकते। इनकी रोपाई सर्दी में ही होती है।
बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि बागवानी विकास मिशन के तहत खरीदे तीन लाख सेब के पौधों में से पचीस फीसदी से अधिक पौधे सूखे पाए गए हैं। ये पौधे गलत समय पर आयात किए गए। प्रोजेक्ट की शर्त के अनुसार नौणी विवि के वैज्ञानिकों और बागवानी अधिकारियों की टीम ने सेब के पौधे आयात करने जाना था। यह टीम न भेजकर एक विदेशी को इटली सेब के पौधों के लिए भेजा गया। इस कारण सरकार इस मामले की विजिलेंस जांच कराएगी। अभी सरकार को इस संबंध में लिखा जाना है ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके।