विपक्ष के दबाव में झुकने को मजबूर हुई सरकार, गतिरोध टूटा

Updated Tue, 01 Dec 2015 06:14 PM IST
vidhansabha second day seasion at tapovan dharamshala.
विज्ञापन
ख़बर सुनें
हिमाचल प्रदेश विधानसभा शीत सत्र के दूसरे दिन विपक्ष के दबाव के सामने सत्ता पक्ष झुका नजर आया। वीरभद्र मामले से विकास कार्यों के ठप होने के विपक्ष के आरोप पर सरकार चर्चा के लिए तैयार तो हो गई, मगर इसके लिए यह शर्त रखी कि यह चर्चा स्थगन प्रस्ताव लाकर नहीं होगी और इसे नियम 130 में सत्र के आखिरी दिन ही किया जाएगा।
विज्ञापन


हालांकि, विपक्ष के हंगामे के बीच स्पीकर को दोपहर से पहले एक बार कार्यवाही को बीस मिनट के लिए स्थगित तक करना पड़ा, मगर बाद में सत्ता पक्ष और विपक्ष की दोनों मुद्दों पर रजामंदी होने पर प्रशभनकाल शुरू कर दिया गया। मंगलवार को भी प्रदेश विधानसभा के शीत्र सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत हंगामेदार रही। सत्र का प्रारंभ 11 बजे हुआ तो नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने जोरावर स्टेडियम में रैली की अनुमति नहीं देने को विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया।


धूमल ने कहा कि विपक्ष यहां रैली करने के लिए जोरदार अपील करेगा। इस पर मु यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि इस बारे में गलतफहमी है। जोरावर स्टेडियम में किसी को भी रैली की अनुमति इसलिए नहीं दी गई है, क्योंकि यहां से विधानसभा एकदम सामने है। ऐसी रैलियों से सदन के कामकाज में बाधा नहीं पहुंचनी चाहिए। अभी सरकार अनुमति दे रही है, मगर भविष्य में यहां किसी को भी रैली करने की मंजूरी नहीं होगी।

सदन में होता रहा शोर शराबा

vidhansabha second day seasion at tapovan dharamshala 12
रैली स्थल की मंजूरी मिलने के बाद विपक्ष के सदस्य वीरभद्र मामले में स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मंजूरी नहीं मिलने से असंतुष्ट नजर आए। वे दोहराते रहे कि इस बारे में स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा करने के लिए दो अलग-अलग नोटिस दिए गए हैं। इन्हें मंजूर कर चर्चा की जाए। स्पीकर बुटेल इस बात को दोहराते रहे कि मामला अर्द्धन्यायिक होने के बाद मंजूरी नहीं दी जा सकती है।

दूसरा नोटिस जो विकास कार्यों के ठप होने का है, उसमें सरकार का जवाब आना है। भाजपा के मुख्‍य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि अगर इस बारे में चर्चा करने का कोई औचित्य ही नहीं था तो नोटिस को ही खारिज कर देना चाहिए था। यहां सरकारें हाईकोर्ट चला रहा है। सरकार जैसी कोई चीज ही नहीं है। जवाब क्यों नहीं आ रहा है। भाजपा विधायक रविंद्र रवि और राजीव बिंदल भी इस पर दबाव बनाते रहे।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अगिभनहोत्री ने कहा कि इस मामले में नियम 67 में चर्चा नहीं हो सकती है। सरकार इसे कनवर्ट कर चर्चा को तैयार है। इसी सत्र में विकास पर चर्चा होगी। इस बीच सदन में खूब शोर-शराबा होता रहा। विपक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी तो विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को बीस मिनट के लिए स्थगित कर दिया।

विपक्ष ने आरोप लगाया, वोल्वो खरीद में हुआ घोटाला

vidhansabha second day seasion at tapovan dharamshala 13
विपक्षी भाजपा ने वोल्वो बसों की खरीद में घोटाले के आरोप लगाते हुए सरकार की खूब घेराबंदी की। भाजपा विधायकों ने इसके लिए कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस संबंध में सिंगल टेंडर किया गया और कम सीटों की महंगी वोल्वो खरीदी गईं। भाजपा विधायकों का आरोप था कि जब टेंडर प्रक्रिया में सिंगल पार्टी आई तो इस मामले को कैबिनेट में क्यों नहीं ले गए।

भाजपा विधायकों के सदन के भीतर जुबानी हमलों पर परिवहन मंत्री लगातार सफाई देते रहे कि वोल्वो की खरीद में कोई घोटाला नहीं हुआ है। सदन में इस बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खूब नोकझोंक भी होती रही। झंडूता के भाजपा विधायक रिखीराम कौंडल के सवाल के जवाब में परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि एक जनवरी 2013 से लेकर 31 अक्तूबर 2015 तक हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम ने कुल दस बसों को खरीदा।

इन वोल्वो बसों की आपूर्ति को मैसर्ज वोल्वो बसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से 93,85,000 रुपये प्रति बस की दर से टेंडर दिए गए। परिवहन मंत्री के इस जवाब के बाद रिखीराम कौंडल ने पूछा कि पैंतालीस सीटों की बसों के बजाय उनतालीस सीटों की ही बसें क्यों खरीदी गईं। इसमें अंदरखाते गोलमाल की बू आती है। इस पर बाली ने कहा कि ये बसें सीट बेल्ट के साथ ली गई हैं।

दुर्घटनाओं के मद्देनजर ये स्टैंडर्ड की हैं। ये बिड डाक्यूमेंट के हिसाब से ही खरीदी गई हैं। इसमें कोई भी गोलमाल नहीं हुआ है। कौंडल ने इस पर पलटवार किया कि यहां एचआरटीसी में पेंशन नहीं दी जा पा रही हैं। जो बसें पहले ली जाती रही हैं, वे क्यों नहीं ली गईं। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने भी कहा कि दोबारा टेंडर करने की कोशिश क्यों नहीं की गई।

बाली ने सफाई दी कि इसके लिए प्रस्ताव वोल्वो और स्कैनिया दो कंपनियों ने ही दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार को काम करने दें या फिर वोल्वो बसों को क्या बंद ही करवा दिया जाए। हर चीज में घोटाला या बू न देखी जाए। रणधीर शर्मा ने पलटकर जवाब दिया कि गरीब लोगों के लिए दी जाने वाली दालों के सिंगल टेंडर आएं तो बार-बार टेंडर किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में करोड़ों रुपये का घोटाला उजागर होता है।
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00