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Shimla News: प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण नहीं करवाने वाले भवन मालिकों और ठेकेदारों पर होगी कार्रवाई
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एसएसपी शिमला ने सभी थाना प्रभारियों को जारी किए निर्देश
दूसरे राज्यों से आने वाले मजदूरों का पंजीकरण करवाना अनिवार्य
स्थानीय लोगों की ओर से मिल रही शिकायतों को देखते हुए जारी किए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण नहीं करवाने वाले ठेकेदारों और मकान मालिकों के खिलाफ पुलिस कानूनी कार्रवाई अमल में लाएगी। पुलिस को स्थानीय लोगों से मिली शिकायतों से पता चला है कि बड़ी संख्या में हर महीने प्रवासी मजदूर शिमला शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आते हैं लेकिन इनका नियमित रूप से संबंधित थानों में पंजीकरण नहीं करवाया जाता है। कई बार यह प्रवासी मजदूर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। पंजीकरण नहीं होने के कारण ऐसे प्रवासियों को पकड़ने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसको देखते हुए एसएसपी शिमला ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश जारी कर उनके क्षेत्र के सभी ठेकेदारों और मकान मालिकों को अपने पास रहने वाले प्रवासी मजदूरों के बारे में जानकारी थाने को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। जिला शिमला में विभिन्न थानों में पंजीकृत प्रवासी मजदूरों की संख्या 19631 है। इसमें सबसे अधिक संख्या नेपाल से आने वाले प्रवासियों की है। नेपाल के प्रवासी मजदूरों की संख्या 6627 है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के 5547, बिहार के 2801, कश्मीर के 1485 और झारखंड के रहने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या 597 के करीब है। इसके अलावा घरेलू कार्य करने वाले प्रवासियों की संख्या 523 है। इसमें बिहार, झारखंड, कश्मीर और अन्य राज्यों के लोग शामिल हैं। पुलिस विभाग समय-समय पर प्रवासी लोगों के पंजीकरण और इनकी संख्या जुटाने के लिए विशेष अभियान भी चलाता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर हैं, जोकि लगातार काम के सिलसिलेे में यहां से वहां घूमते रहते हैं। इस वजह से इन प्रवासियों का पंजीकरण नहीं हो पाता है। ऐसे ही लोग जिले में कई अपराधी घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं और उनकी पहचान को लेकर कोई रिकॉर्ड नहीं होने के कारण उन्हें पकड़ने में पुलिस को परेशानी का सामना करना पड़ता है। एसएसपी शिमला संजीव कुमार गांधी ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण को लेकर संबंधित थाना प्रभारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। नियमों की अवहेलना करने वाले ठेकेदारों और मकान मालिकों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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दूसरे राज्यों से आने वाले मजदूरों का पंजीकरण करवाना अनिवार्य
स्थानीय लोगों की ओर से मिल रही शिकायतों को देखते हुए जारी किए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण नहीं करवाने वाले ठेकेदारों और मकान मालिकों के खिलाफ पुलिस कानूनी कार्रवाई अमल में लाएगी। पुलिस को स्थानीय लोगों से मिली शिकायतों से पता चला है कि बड़ी संख्या में हर महीने प्रवासी मजदूर शिमला शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आते हैं लेकिन इनका नियमित रूप से संबंधित थानों में पंजीकरण नहीं करवाया जाता है। कई बार यह प्रवासी मजदूर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। पंजीकरण नहीं होने के कारण ऐसे प्रवासियों को पकड़ने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसको देखते हुए एसएसपी शिमला ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश जारी कर उनके क्षेत्र के सभी ठेकेदारों और मकान मालिकों को अपने पास रहने वाले प्रवासी मजदूरों के बारे में जानकारी थाने को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। जिला शिमला में विभिन्न थानों में पंजीकृत प्रवासी मजदूरों की संख्या 19631 है। इसमें सबसे अधिक संख्या नेपाल से आने वाले प्रवासियों की है। नेपाल के प्रवासी मजदूरों की संख्या 6627 है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के 5547, बिहार के 2801, कश्मीर के 1485 और झारखंड के रहने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या 597 के करीब है। इसके अलावा घरेलू कार्य करने वाले प्रवासियों की संख्या 523 है। इसमें बिहार, झारखंड, कश्मीर और अन्य राज्यों के लोग शामिल हैं। पुलिस विभाग समय-समय पर प्रवासी लोगों के पंजीकरण और इनकी संख्या जुटाने के लिए विशेष अभियान भी चलाता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर हैं, जोकि लगातार काम के सिलसिलेे में यहां से वहां घूमते रहते हैं। इस वजह से इन प्रवासियों का पंजीकरण नहीं हो पाता है। ऐसे ही लोग जिले में कई अपराधी घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं और उनकी पहचान को लेकर कोई रिकॉर्ड नहीं होने के कारण उन्हें पकड़ने में पुलिस को परेशानी का सामना करना पड़ता है। एसएसपी शिमला संजीव कुमार गांधी ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण को लेकर संबंधित थाना प्रभारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। नियमों की अवहेलना करने वाले ठेकेदारों और मकान मालिकों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।