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जानिए हिमाचल के बजट पर क्या बोले नेता और आर्थिक विशेषज्ञ

Sun, 10 Feb 2019 11:47 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 10 Feb 2019 11:47 AM IST
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various leaders statement over himachal budget 2019

हिमाचल के बजट पर विभन्न नेताओं और आर्थिक विशेषज्ञों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि प्रदेश के सीमित साधनों के बावजूद सरकार ने समाज के प्रत्येक वर्ग को राहत पहुंचाने का प्रयास किया है।

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उन्होंने संतुलित बजट पेश करने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को बधाई दी है। कहा कि प्रदेश सरकार ने लोक भलाई करने वाली सरकार के दायित्व को पूरा किया है। प्रदेश सरकार ने एक सर्वस्पर्शी और सर्व हितकारी बजट पेश किया है।
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बजट में सरकारी कर्मचारियों, दिहाड़ीदारों का पूरा ध्यान रखा गया है। बेरोजगारी को कम करने के लिए नौकरी के हजारों अवसर प्रदान करने की बात की गई है।  किसानों और पशुपालकों के हितों का ध्यान रखा गया है। कृषि-बागवानी को सुदृढ़ करने की बात कही गई है।
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किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य की ओर एक कदम बढ़ाते हुए सरकार ने किसानों के लिए उचित प्रावधान किया है। गरीब व्यक्ति को अपना घर बनाने के लिए दी जाने वाली ग्रांट में बढ़ोतरी का स्वागत करते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री

आवास योजना के तहत घर की मरम्मत करवाने को दी जाने वाली सब्सिडी को बढ़ाना भी बहुत अच्छा कदम है। प्रदेश सरकार ने जो बजट पेश किया है वह आने वाले समय में कृषि उत्पादन बढ़ाने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को विकसित करने वाला है।  

शिक्षा के क्षेत्र में सहायक सिद्ध होगा बजट

various leaders statement over himachal budget 2019

सरकार ने युवाओं पर निवेश कर आर्थिक विकास को गति देने के संकेत दिए हैं। युवाओं के माध्यम से प्रदेश का भविष्य संवारने को पहली बार बजट में बच्चों की पढ़ाई और युवाओं के प्रशिक्षण को ध्यान में रखकर बजट का प्रावधान किया गया। बजट शिक्षा क्षेत्र में विकास के लिए सहायक सिद्ध होगा। आदर्श विद्या केंद्रों और वर्चुअल क्लास रूम की स्थापना छात्रों के विकास में योगदान देंगे। शिक्षा में निश्चित किया गया बजट शिक्षा के प्रचार-प्रसार में योगदान देगा। कौशल विकास में राशि का प्रावधान भी शिक्षा को रोजगार से जोड़कर छात्रों की रोजगार कौशल क्षमता बढ़ाएगा। सरकार ने शिक्षा पर 7598 करोड़ और प्रशिक्षण पर खर्च करने के लिए रखे 100 करोड़ के बजट का हालांकि निकट भविष्य में लाभ नहीं देखने को मिलेगा। बजट में छात्रों, युवाओं और कर्मचारियों पर जो भी खर्च होगा। इसके निकट भविष्य में परिणाम कम देखने को मिलेंगे, जबकि इस बजट से  शिक्षित बच्चे और प्रशिक्षित युवा दीर्घकाल में प्रदेश के विकास में अहम योगदान देंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सुरक्षा प्रदान करने के लिए पहले से स्थापित इन्फ्रास्ट्रक्चर से जहां सुरक्षा मिलेगी। विद्यार्थी वन मित्र योजना से पर्यावरण को लाभ मिलेगा। बजट में ज्यादातर योजनाएं ऐसी रखी गई हैं, जिससे प्रदेश सरकार के बजट को ज्यादा नुकसान न हो। 
- एनएन शर्मा, प्राचार्य ज्वाली महाविद्यालय एवं पूर्व डीन एकेडमिक एचपीटीयू 

बड़े तबके पर नजर, आर्थिक सेहत नजरअंदाज

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चुनावी वर्ष होने के नाते मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बजट में ज्यादा ध्यान समाज के बड़े समूहों पर केंद्रित किया है। समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखते हुए संतुलित बजट पेश करने का प्रयास किया गया है। घोषणाओं और प्रावधानों से प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है। वर्तमान में सरकार लगभग 46500 करोड़ से अधिक कर्ज में डूबी है। इसलिए इन घोषणाओं से आर्थिक स्थिति और बदतर हो सकती है।बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क एवं वायु परिवहन, कृषि, उद्योग, बागवानी, बिजली, पानी, सामाजिक सुरक्षा, सिंचाई, कौशल विकास, खुंब उत्पादन, पशुपालन, पंचायतीराज संस्थाएं, पंचायत प्रतिनिधियों, दिहाड़दा, बेरोजगारों, विधवाओं, गृहिणियों, विद्यार्थियों, महिला, सरकारी कर्मचारियों, पीटीए, पैट एवं एसएमसी शिक्षकों, अनुबंध कर्मचारियों एवं एचआईवी पीड़ितों के लिए वित्तीय राहत दी गई है। कर्मचारियों के लिए चार फीसदी डीए की घोषणा की गई है। दूसरी ओर, उनकी सातवें वेतन आयोग की मांग की अनदेखी हुई है। बेेरोजगारों के लिए ठोस नीति की घोषणा नहीं है। स्वरोजगार पर भी विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। अनुबंध कर्मचारियों की अवधि दो वर्ष न करने से निराशा का माहौल है। 2009-10 में नियुक्त अनुबंध कर्मियों को नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ न देकर उनकी मांग की अनदेखी की गई है। पीटीए, एसएमसी और पैट के मानदेय में बढ़ोतरी कर राहत दी है। किसानों-बागवानों और पशुपालकों के लिए बजट में अनुदान एवं अन्य वित्तीय प्रावधान करने से इन वर्गों में खुशी है। लावारिस पशुओं और बंदरों से फसलों को बचाने के लिए ठोस नीति की दरकार है। चुनिंदा जिलों को छोड़ औद्योगिक विकास के लिए खास रुचि नहीं दिखाई गई है। बजट में प्रदेश की सड़कों की माली हालत के लिए खास प्रावधान नहीं है। कर्मचारियों की लंबित मांग पुरानी पेंशन योजना की अनदेखी कर नई पेंशन योजना में चार फीसदी सीपीएफ बढ़ाकर खुश करने की कोशिश हुई है। विधायक क्षेत्र विकास निधि में 25 लाख की बढ़ोतरी कर क्षेत्र के विकास को सुनिश्चित किया गया है। कुल मिलाकर बजट प्रदेश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी वर्गों को राहत देने वाला है।   
- डॉ. संजीत सिंह ठाकुर, पीएचडी अर्थशास्त्र

उम्दा सिंचाई योजनाओं और रिसर्च से होगी किसानों की आय दोगुनी 

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उम्दा सिंचाई सिंचाई और रिसर्च पर फोकस करके हिमाचल सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल कर सकती है। तैयार फसल के लिए बाजार किसान को संजीवनी दे सकते हैं। जब तक फसलों की मार्केटिंग सही नहीं होगी और तैयार फसल का उचित दाम किसानों को नहीं मिलेगा, हालात सुधरने की स्थिति में नहीं आएंगे। किसानों के लिए टमाटर उत्पादन से आगे उसका सॉस तैयार करने या सेब उत्पादन से आगे जूस निकालने पर मंथन करना पड़ेगा। नई गुणवत्ता और उत्पादन में बढ़ोत्तरी के लिए बड़ी रिसर्च की जरूरत पड़ेगी और इसके लिए वैज्ञानिकों को सशक्त करना होगा। प्रदेश में करीब 40 प्रतिशत जमीन उपजाऊ होने के बावजूद खाली है। बंदर या खुले में घूमने वाले जानवर यहां फसल नहीं उगने देते। इस जमीन के सही उपयोग के लिए तारबंदी की योजना बिल्कुल सही है। साथ ही राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का जिक्र किया है। इसमें 338 करोड़ रुपये की लागत से 111 लघु सिंचाई योजनाओं पर काम करने की बात कही गई है। लेकिन असल में प्रदेश में सिंचाई के लिए 50 हजार करोड़ रुपये के बजट की जरूरत है। इस बजट से छोटे-छोटे बांध नदी-नालों पर बनाए जाने चाहिए ताकि हर जगह पानी पहुंच पाए। जहां ऐसा नहीं है वहां उठाऊ योजनाओं के माध्यम से पानी पहुंचाया जाना चाहिए। इससे कृषि व बागवानी दोनों क्षेत्रों में उपज बढ़ेगी। सबसे बड़ी बात जो युवा आज की तारीख में कुछ हजार रुपये की नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं उन्हें वापस खेतीबाड़ी की तरफ मोड़ना होगा। तभी कृषि उपज बढ़ेगी और किसानों को सही दाम मिलेंगे और सरकार 2022 तक आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल कर पाएगी।  
-डॉ. एचसी शर्मा, कुलपति, नौणी विश्वविद्यालय, सोलन 

हिमाचल के उद्योग जगत को भाया प्रदेश का बजट    

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 जयराम सरकार द्वारा पेश किए गए दूसरे बजट को हिमाचल प्रदेश के उद्योग जगत ने सराहा है। बददी में आयुर्वेदा उद्योग चल रहे लघु उद्यमी जयगोपाल शर्मा ने कहा कि बजट में ऐसे उद्योगों को बढावा देने की बात कही गई है जो कि स्थानीय संसाधनों व कच्चे माल पर आधारित हो जो कि सराहनीय है। इससे हिमाचल में रोजगार बढेगा। लघु उद्योग भारती के प्रदेश महामंत्री राजीव कंसल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए जो नई नीति लेकर आ रही है वह सराहनीय है। दूसरे प्रांतो में एमएसएमई के लिए अलग पॉलिसी पहले ही बनी हुई है और हिमाचल को इसकी जरुरत है। महिला उद्यमी सोनम बंसल ने कहा कि नई नीति में केंद्र बिंदू महिला उद्यमी को रखा जाना हमारे लिए गौरव की बात है वहीं सर्विस सैक्टर को बढावा देने से रोजगार सृजन होगा। स्टील विंग एलयूवी प्रदेशाध्यक्ष व बीबीएनडीए के सदस्य संजीव शर्मा ने कहा कि बीबीएन से आगे बढकर सरकार ने कागंडा के चन्नौर, बिलासपुर के गेहडंवी तथा ऊना जिला के बसौली बनगढ में नए औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित करने का निर्णय औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। 

मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाने के निर्णय का स्वागत किया  

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हिंदू मजदूर सभा के प्रदेशाध्यक्ष मेलाराम चंदेल ने मजदूरों की दिहाडी बढाने का निर्णय स्वागत योग्य है। अब 225 की बजाय 250 रुपये दिहाडी मिलेगी। बददी इंडस्ट्रीज युवा एसोसिएशन पवन कुमार ने मु यमंत्री स्वावल बन योजना में वर्तमान आयु सीमा 35 से बढाकर 45 वर्ष किया जाना एतिहासिक है वहीं परियोजना लागत 40 से 60 लाख किए जाने से लघु उद्योग को बढावा मिलेगा। 

विकास को मिलेगी गति  
बीबीएन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने कहा कि बीबीएन की अधोसरंचना को सुदृढ करने के लिए विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित के तहत संसाधन जुटाने से यहां के विकास को गति मिलेगी। ट्रांसपोटर कृष्ण कौशल ने बददी में ड्राइविंग टैस्टिंग स्कूल खोलने पर कहा कि इससे चालक परिचालकों को राहत मिलेगी और उनको दूसरे जिलों में नहीं जाना पडेगा।

जयराम ने पेश किया संतुलित बजट : शांता 

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भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद शांता कुमार ने कहा कि अपने दूसरे बजट में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सभी वर्गों के दिलों को छुआ है। मुख्यमंत्री ने हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए संतुलित बजट पेश किया है। यह ईमानदार सरकार का सार्थक प्रयास है।  

बजट में दूरदर्शी सोच नहीं दिखती : बाली 
पूर्व मंत्री जीएस बाली ने कहा कि जयराम सरकार के बजट में कुछ भी नया नहीं है। कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के लिए कोई बड़ी राहत नहीं दी गई। हिमाचल में पर्यटक कम हो रहे हैं, इसके बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया। प्रदेश अपनी आय कैसे बढ़ाएगा, इस पर कोई प्लान नहीं बताया गया। बेरोजगारों के लिए कुछ नया नहीं किया गया। बजट में दूरदर्शिता वाली सोच नहीं दिखती। 

मोदी की नकल करके बनाया बजट : विप्लव
राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री विप्लव ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नकल करके बजट बनाया है। इस बजट में जुमलों के अलावा कुछ खास नहीं है। प्रदेश को घाटे से उभारने के लिए कोई प्लान नहीं बताया गया। बजट का मतलब मानदेय बढ़ाना नहीं है। इसमें आम आदमी के विकास के लिए कुछ नहीं दिख रहा।

जयराम सरकार का बजट ऐतिहासिक : अनिल शर्मा 

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ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने मुख्यमंत्री जयराम के बजट को ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में प्रस्तावित धन के प्रावधान से 365 दिन प्रदेश की जनता को सुनिश्चित विद्युत आपूर्ति मिल पाएगी। उन्होंने कहा कि यह संतुलित बजट जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप है। उन्होंने बजट प्रस्ताव में ऊर्जा क्षेत्र को प्राथमिकता देने के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। उर्जा क्षेत्र के बजट प्रस्ताव के बारे में उन्होंने विस्तृत रूप से बताते हुए कहा के पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में शिथिलता आ गई थी। इस क्षेत्र को गति देने के उद्देश्य से 2019-20 में लगभग 500 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं शुरू होने की संभावना है।

मानदेय बढ़ोतरी कर गुमराह किया : मेहरा
आंगनबाड़ी कायकर्ताओं और सहायकों के मानदेय में बढ़ोतरी की बजट में की गई घोषणा गुमराह करने वाली है। यह बढ़ोतरी केंद्र सरकार की ओर से सितंबर 2018 और बाद में बीते दिनों पेश किए गए अंतरिम बजट में हो चुकी है। यह घोषणा कर मुख्यमंत्री झूठी वाहवाही लूटने की कोशिश कर रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
विजेंद्र मेहरा, सीटू, राज्य सचिव

चुनावी नफे-नुकसान  के गणित वाला बज

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जयराम सरकार के दूसरे बजट में आगामी लोकसभा चुनाव के नफे-नुकसान का गणित झलकता है। मुख्यमंत्री ने 2019-20 के बजट में बड़े वर्गों को साधने की कोशिश की है। इस बजट में कर्मचारी, बेरोजगार, किसान-बागवान के साथ पिछड़े वर्ग को खुश करने की कोशिश की गई है। प्रावधानों के मूर्त रूप लेने पर यह निश्चित रूप से राहत भी देगा। आम चुनावों की नजदीकी को देखते हुए कर्मचारियों को चार फीसदी महंगाई भत्ते की सौगात दी गई है। पंचायतीराज संस्थाओं, शहरी निकायों के चुनकर आए प्रतिनिधियों के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। नई पेंशन स्कीम के तहत सरकारी अंशदान बढ़ाकर 14 फीसदी करने से करीब 80 हजार कर्मचारियों को लाभ पहुंचेगा। अनुबंध कर्मी, दैनिक भोगी, अंशकालीन कर्मचारियों को भी आंशिक राहत देने का प्रयास किया गया है। दिहाड़ीदारों की दिहाड़ी में 25 रुपये की बढ़ोतरी की भी बात है। ऐसे ही कई अन्य प्रावधानों में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बजट की पोटली से कुछ ने कुछ देने की कोशिश हुई है। इस लिहाज से बजट में चुनावी वर्ष का असर साफ झलकता है। बजट को अर्थशास्त्र के जोड़-घटाव की कसौटी पर भी कसा जाए तो यह बीते वर्ष के बजट से ज्यादा संतुलित दिखाई दे रहा है। इस बार राजकोषीय घाटे, राजस्व घाटे, ऋण के घटक नहीं बढ़े हैं। किसी नए कर को लगाने या बढ़ोतरी करने से भी परहेज किया गया है। हालांकि कुछ वर्ग मायूस भी हुए हैं। मसलन, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू न करने से कर्मचारियों को निराशा हाथ लगी है। आउटसोर्स कर्मी भी नाखुश हैं। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि बजट में आम जनमानस के लिए राहत ज्यादा है जबकि मायूसी कम है। कुल मिलाकर जयराम सरकार के इस बजट को इस साल के चुनावी माहौल से प्रभावित कहा जा सकता है।
अर्थशास्त्री, विवि के पूर्व प्रति कुलपति, इक्डोल के पूर्व निदेशक प्रो. एनके शारदा 

विधानसभा अध्यक्ष ने सराहा बजट

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विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बजट को ऐतिहासिक व शानदर करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है। डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रदेश के हर वर्ग की जरूरतों और आकांक्षाओं का खास ख्याल रखा गया है। इसके लिए वह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार जताते हैं। डॉ. बिंदल ने कहा कि इस बजट मेें हिमाचल प्रदेश के किसानों की आमदनी को दोगुना करने पर फोकस किया गया है। सिंचाई योजनाओं के माध्यम से बिजली के खर्चे में कटौती, जल संरक्षण योजनाओं से बागवानी व कृषि उपदान बढ़ाने से हिमाचल का किसान समृद्ध होगा। उन्होंने कहा कि यह बजट पूरी तरह संतुलित, प्रगतिशील, विकास और रोजगारोन्मुखी है। किसान, बागवान, श्रमिक, कर्मचारी वर्ग, मध्यम वर्ग सहित समाज के हर व्यक्ति का ख्याल रखा गया है। प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। युवाओं की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। 

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