लाल और नीली बत्ती में उलझा हिमाचल
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हिमाचल प्रदेश के विधायक और अफसर लाल, एंबर और नीली बत्ती के चक्कर में उलझ गए हैं। राज्य के अफसरों से लेकर विधायकों तक को विकास और जनता के सरोकारों के बजाय बत्ती की पड़ी हुई है। हर किसी को लाल बत्ती चाहिए। किसी को एंबर या नीली रंग की बत्ती कतई स्वीकार नहीं है। कैबिनेट के फैसले के बाद जहां अफसरों ने राहत की सांस ली है, वहीं प्रदेश के विधायकों में उबाल है।
सत्ता से लेकर विपक्ष तक के विधायक कैबिनेट के फैसले के विरोध में खड़े हो गए हैं। यहां तक की अगले शीतकालीन सत्र में विधायकों ने इसे एक बड़ा मुद्दा विधानसभा में बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश के विधायकों ने बत्ती के मुद्दे को सीधे प्रोटोकाल से जोड़ दिया है। तर्क है कि प्रोटोकाल में विधायक राज्य के मुख्यसचिव से भी बड़ा होता है।
लालबत्ती छिनने से विधायक नाराज
ऐसे विधायकों को एंबर और मुख्यसचिव को लाल बत्ती कैसे दी जा सकती है। यह सीधे तौर पर प्रोटोकाल का उल्लंघन है। सूत्रों की मानें तो बत्ती देने को लेकर अफसरों से लेकर विधायकों तक ने मंत्रियों के पास जबर्दस्त तरीके से लाबिंग की, लेकिन विधायक लाल बत्ती ले पाने में मात खा गए। कैबिनेट ने उन्हें एंबर लाइट थमा दी है। इस पर कांग्रेस से लेकर भाजपा के विधायकों ने विरोध शुरू कर दिया है। जनहित को छोड़कर उनकी ओर से इसे खुद की प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाया जा रहा है।
कांग्रेस विधायक बंबर ठाकुर ने कहा कि विधायकों को लालबत्ती मिलनी चाहिए। कुछ मंत्री नहीं चाहते कि विधायकों को लाल बत्ती मिले, लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि विधायक ही एक मंत्री बनता है। दूसरी बात यह है कि एंबर रंग की लाइट कतई स्वीकार नहीं है। इससे बेहतर है कि उन्हें न मिले।
'विधायकों को किसी तरह की बत्ती की जरूरत ही नहीं'
भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि सचिवालय में बैठे अफसर या विधायकों को किसी तरह की बत्ती की जरूरत ही नहीं है।
विधायक, एमपी की अपनी पहचान है, लेकिन अफसरों को लाल और विधायकों को एंबर लाइट दी जाए, यह प्रोटोकाल का सीधा उल्लंघन
है।
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि विधायकों को किस रंग की बत्ती दी
जाए। इसका फैसला कैबिनेट ने किया है। ऐसे में मेरे लिए कुछ भी कहना बेहद
मुश्किल है।