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Shimla News: माइट रोग नियंत्रण के लिए करें खनिज तेल का प्रयोग

Thu, 27 Mar 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Mar 2025 11:59 PM IST
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Use mineral oil to control mite disease
कृषि विशेषज्ञों की बागवानों को सलाह
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आधे इंच की पत्ती अवस्था में करें तेल का प्रयोग : उषा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। परागणकों की सुरक्षा और अच्छे फलों की सेटिंग को सुनिश्चित करना आवश्यक है, खासकर जब सेब के बगीचे विकसित अवस्था में हों। यह जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र शिमला की प्रभारी उषा शर्मा ने दी।

उन्होंने बताया कि सैनजो स्केल और माइट नियंत्रण के लिए बागवानी खनिज तेल (एचएमओ) का प्रयोग आधे इंच पत्ती से टाइट क्लस्टर अवस्था के दौरान करें। ध्यान रहे कि इसका छिड़काव कीटनाशकों के साथ न किया जाए ताकि लाभकारी कीटों की सुरक्षा बनी रहे। मधुमक्खी के बॉक्स बगीचों में रखें जिससे परागण दक्षता में सुधार हो और फलों की सेटिंग बेहतर हो। यह सेब की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।
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गुलाबी कली की अवस्था के दौरान अत्यधिक और अनावश्यक पोषक तत्वों के छिड़काव से बचें इससे परागकण अंकुरण में रुकावट आ सकती है। इसके बजाय विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुसार लक्षित पोषक तत्वों का प्रयोग करें। शुष्क परिस्थितियों में उचित नमी प्रबंधन सुनिश्चित करें ताकि सेब के पौधों में पर्याप्त नमी बनी रहे। इसके साथ ही अनावश्यक रसायनिक छिड़काव से बचें और नियमित रूप से रोग के लक्षणों की निगरानी करें।
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उषा शर्मा ने बताया कि कीट और रोग प्रबंधन के लिए डॉ. वाईएस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय तथा बागवानी विभाग द्वारा अनुमोदित स्प्रे सारणी का पालन करें। सही समय पर और उचित मात्रा में कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का उपयोग करें। साथ ही जैविक कीटनाशकों और प्राकृतिक मित्र कीटों का भी समर्थन करें। यदि कीट और रोगों के नियंत्रण के लिए उचित उपाय नहीं किए तो इससे सेब की उपज तथा गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संतुलित परागणक प्रबंधन और कीट तथा रोग प्रबंधन से आप अपनी सेब की उपज और गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार कर सकते हैं।
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