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Shimla News: एचपीयू को मिलेगी डिजिटल लाइब्रेरी और विधि भवन की सुविधा, सीएम ने रखी आधारशिला
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को जल्द डिजिटल लाइब्रेरी और विधि भवन की सुविधा मिलेगी। विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी और यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के नए प्रशासनिक भवन की आधारशिला रखी।
उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइब्रेरी से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक ई-संसाधनों तक आसान पहुंच मिलेगी, जबकि नए भवन से विधि शिक्षा की शैक्षणिक गतिविधियों को विस्तार मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप विकसित करने के लिए हरसंभव सहयोग देगी। उन्होंने विश्वविद्यालय को ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में नोडल संस्थान बनाने की दिशा में भी कार्य करने की बात कही। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी इसी परिसर से हुई थी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र आज देश और प्रदेश में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक और शोध को भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है। समारोह में विधायक हरीश जनारथा, उपायुक्त अनुपम कश्यप, महापौर सुरेंद्र चौहान, कुलसचिव ज्योति राणा, पूर्व छात्र और पीजीआई निदेशक डॉ. राज बहादुर, डॉ. विजय कुमार स्टोक्स सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। इस दौरान विश्वविद्यालय की वार्षिक उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। शोध प्रकाशनों का विमोचन हुआ तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
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रक्षा अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा
कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय को रक्षा और सामरिक अनुसंधान से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण परियोजनाएं मिली हैं। पहली परियोजना भारतीय सेना के सहयोग से उच्च हिमालयी क्षेत्रों के लिए विशेष सामग्री प्रौद्योगिकी विकसित करने की है जिसका उपयोग ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में किया जा सकेगा। दूसरी परियोजना डीआरडीओ की आईएनएमएएस प्रयोगशाला के सहयोग से डर्टी बमों के प्रभाव से सुरक्षा देने वाले सूक्ष्म जीवों पर अध्ययन से जुड़ी है। तीसरी परियोजना आधुनिक रडार प्रौद्योगिकी के विकास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अनुसंधान में भूमिका और मजबूत होगी।
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पेंशनरों, कर्मचारियों और शोध को लेकर कई अहम घोषणाएं
कुलपति ने 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लंबित एरियर जारी करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में महाविद्यालय शिक्षकों के लिए गाइडशिप, पार्ट टाइम पीएचडी और अनुसंधान संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता केंद्रों का विस्तार कर सभी विभागों को उनसे जोड़ा जाएगा, जिससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
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शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को जल्द डिजिटल लाइब्रेरी और विधि भवन की सुविधा मिलेगी। विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी और यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के नए प्रशासनिक भवन की आधारशिला रखी।
उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइब्रेरी से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक ई-संसाधनों तक आसान पहुंच मिलेगी, जबकि नए भवन से विधि शिक्षा की शैक्षणिक गतिविधियों को विस्तार मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप विकसित करने के लिए हरसंभव सहयोग देगी। उन्होंने विश्वविद्यालय को ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में नोडल संस्थान बनाने की दिशा में भी कार्य करने की बात कही। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी इसी परिसर से हुई थी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र आज देश और प्रदेश में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक और शोध को भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है। समारोह में विधायक हरीश जनारथा, उपायुक्त अनुपम कश्यप, महापौर सुरेंद्र चौहान, कुलसचिव ज्योति राणा, पूर्व छात्र और पीजीआई निदेशक डॉ. राज बहादुर, डॉ. विजय कुमार स्टोक्स सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। इस दौरान विश्वविद्यालय की वार्षिक उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। शोध प्रकाशनों का विमोचन हुआ तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
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रक्षा अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा
कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय को रक्षा और सामरिक अनुसंधान से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण परियोजनाएं मिली हैं। पहली परियोजना भारतीय सेना के सहयोग से उच्च हिमालयी क्षेत्रों के लिए विशेष सामग्री प्रौद्योगिकी विकसित करने की है जिसका उपयोग ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में किया जा सकेगा। दूसरी परियोजना डीआरडीओ की आईएनएमएएस प्रयोगशाला के सहयोग से डर्टी बमों के प्रभाव से सुरक्षा देने वाले सूक्ष्म जीवों पर अध्ययन से जुड़ी है। तीसरी परियोजना आधुनिक रडार प्रौद्योगिकी के विकास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अनुसंधान में भूमिका और मजबूत होगी।
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पेंशनरों, कर्मचारियों और शोध को लेकर कई अहम घोषणाएं
कुलपति ने 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लंबित एरियर जारी करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में महाविद्यालय शिक्षकों के लिए गाइडशिप, पार्ट टाइम पीएचडी और अनुसंधान संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता केंद्रों का विस्तार कर सभी विभागों को उनसे जोड़ा जाएगा, जिससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का लाभ मिलेगा।