विश्वविद्यालय कोर्ट की बैठक: तीन महीने में एचपीयू शिमला की भर्ती प्रक्रिया पूरा करने के निर्देश
प्रदेश विश्वविद्यालय में लंबित गैर शिक्षकों के 274 पदों की भर्ती प्रक्रिया तीन माह में पूरा करने के निर्देश दिए। गुरुवार को राज्यपाल की अध्यक्षता में विवि में हुई विवि कोर्ट की 33वीं बैठक में विवि ईसी सदस्य राज कुमारी ने भर्ती में देरी का मामला उठाया था।
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राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में लंबित गैर शिक्षकों के 274 पदों की भर्ती प्रक्रिया तीन माह में पूरा करने के निर्देश दिए। गुरुवार को राज्यपाल की अध्यक्षता में विवि में हुई विवि कोर्ट की 33वीं बैठक में विवि ईसी सदस्य राज कुमारी ने भर्ती में देरी का मामला उठाया था। राज्यपाल ने कहा कि पिछले दो वर्षों से कोरोना के कारण सभी कार्य बाधित रहे, लेकिन वर्तमान में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा के लिए अनुकूल वातावरण है। प्रदेश में शैक्षणिक संस्थानों का वृहद नेटवर्क है। यहां कि शैक्षणिक दर भी बेहतर है। हमें इन सुविधाओं का लाभ सकारात्मक तरीके से उठाना चाहिए। कहा कि हिमाचल राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में देश के लिए एक उदाहरण बनकर उभर सकता है। उन्होंने राज्य में नशीले पदार्थों के बढ़ते प्रचलन पर चिंता जताई।
युवा पीढ़ी को इस खतरे से बचाने का आह्वान भी किया। बैठक में वर्ष 2017-2018 के वार्षिक लेखा एवं वर्ष 2019-20 के वार्षिक प्रतिवेदन को स्वीकृति दी। विवि के कार्यवाहक कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने गत वर्ष की गतिविधियों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के प्रबंधन, री-ओरिएंटेशन और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सहित तीन मानकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। विश्वविद्यालय के विजन डॉक्यूमेंट के अनुसार सभी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करना सुनिश्चित किया जाएगा। परिसर में अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र विकसित किया जाएगा। विवि में में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल अकादमी स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे। कुलसचिव सुनील कुमार ने बैठक का संचालन किया।
नई शिक्षा नीति का प्रभावी कार्यान्वयन जरूरी : राज्यपाल
प्रदेश के राज्यपाल एवं हिमाचल प्रदेश विवि के कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन करना अत्यंत आवश्यक है। नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन को लेकर बुलाई एचपीयू के अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों और कॉलेजों के प्राचार्यों की बैठक में राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ समन्वय बनाकर प्रभावी ढंग से इस नीति को लागू करने के लिए प्रयास करने होंगे। नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम इस प्रकार बनाए जाने चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को उसकी इच्छा का विषय पढ़ने के साथ पौराणिक, आधुनिक और भविष्य के लिए उनकी सोच को और अधिक निखारा जा सके। विवि के कार्यवाहक कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार विद्यार्थियों को सात वर्षों में अपना अध्ययन पूरा करना होगा।
इसमें उसके जमा अंक सुरक्षित रहेंगे (क्रेडिट बैंक), बीच में पढ़ाई छोड़कर छात्र दूसरा कार्य कर सकेगा, उसके बाद वह दोबारा अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगा। कहा कि फिलहाल स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर लिखित और व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली को 70-30 के अनुपात में अपनाना प्रस्तावित है, जिसमें कौशल विकास के लिए अलग से महत्व दिया जाएगा। प्रधान सचिव शिक्षा रजनीश कुमार ने बताया कि राष्ट्र निर्माण के लिए संस्कार युक्त शिक्षा का होना अति आवश्यक है। उसी के अनुरूप नई शिक्षा नीति का निर्माण किया गया है। उच्चतर शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत ने प्रदेश में शिक्षा विभाग की सभी गतिविधियों और आधारभूत संरचना का विस्तृत विवरण दिया। अधिष्ठाता अध्ययन आचार्य अरविंद कालिया ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया।