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Shimla News: एसएफआई के सम्मेलन में प्रवेश को सौंपी इकाई प्रधान की कमान
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कालीबाड़ी हॉल में हुए सम्मेलन में कई प्रस्ताव पारित
अंशुल चुने गए शहरी इकाई के सचिव, शिक्षा के निजीकरण का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एसएफआई की शिमला शहरी इकाई का सोमवार को कालीबाड़ी हॉल में 22वां सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें प्रवेश शर्मा को शहरी इकाई का प्रधान और अंशुल मिन्हास को सचिव चुना गया।
सम्मेलन में 7 सदस्यीय सचिवालय का चुनाव भी किया गया जिसमें विवेक नेहरा, रिधिमा, कृतिका, निखिल, हरीश, तिलकराज, कमलेश, रिया, वीनस देष्टा इत्यादि को कमेटी सदस्य चुना गया। सम्मेलन का शुभारंभ एसएफआई के राज्य सचिव दिनीत देंटा ने किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज समावेशी और समतामूलक शिक्षा व्यवस्था पर हमले किए जा रहे हैं। यह लोकतांत्रिक शिक्षा प्रणाली के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में आपदा को अवसर बनाकर नई शिक्षा नीति-2020 को संसद में बिना चर्चा के छात्रों पर थोपने का काम किया। वर्तमान समय में देश में लगभग 13 करोड़ छात्र ऐसे हैं जो शिक्षा के मूल अधिकार से वंचित हैं। देश और प्रदेश में लगातार शैक्षणिक भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
एचपीयू में कई घोटाले हुए हैं, पूर्व सरकार के कार्यकाल में विवि में 200 से अधिक शिक्षकों को विचारधारा विशेष से जुड़ा होने पर योग्यता पूरी न करने के बावजूद भर्ती किया गया। एसएफआई आने वाले समय में शिक्षा से जुड़े मुद्दों और गलत नीतियों के खिलाफ उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी। इसके अलावा सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 वापस लो, लिंग संवेदनशील कमेटी, छात्र संघ चुनाव बहाली, महिलाओं पर बढ़ते हमले, बढ़ती बेरोजगार, देश प्रदेश में बढ़ती सांप्रदायिकता और नफरत, नशे की चपेट में बढ़ता युवा इत्यादि विषयों पर प्रस्ताव पारित किए गए।
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बेरोजगारी में प्रदेश दूसरे नंबर पर
सम्मेलन में जिला सचिव कमल ने कहा कि प्रदेश बेरोजगारी में दूसरे नंबर पर आ गया है। शिक्षा में लुढ़कर हिमाचल 21वें स्थान पर पहुंच गया है। यह सब सरकारों की गलत नीतियों का नतीजा है। एसएफआई 9 लाख बेरोजगारों की आवाज बनकर आंदोलन करेगी। सम्मेलन में संजौली महाविद्यालय में दो महीने से अवैध निष्कासन से पीड़ित छात्र और छात्राओं के लिए संघर्ष को तेज करने का फैसला हुआ।
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अंशुल चुने गए शहरी इकाई के सचिव, शिक्षा के निजीकरण का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एसएफआई की शिमला शहरी इकाई का सोमवार को कालीबाड़ी हॉल में 22वां सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें प्रवेश शर्मा को शहरी इकाई का प्रधान और अंशुल मिन्हास को सचिव चुना गया।
सम्मेलन में 7 सदस्यीय सचिवालय का चुनाव भी किया गया जिसमें विवेक नेहरा, रिधिमा, कृतिका, निखिल, हरीश, तिलकराज, कमलेश, रिया, वीनस देष्टा इत्यादि को कमेटी सदस्य चुना गया। सम्मेलन का शुभारंभ एसएफआई के राज्य सचिव दिनीत देंटा ने किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज समावेशी और समतामूलक शिक्षा व्यवस्था पर हमले किए जा रहे हैं। यह लोकतांत्रिक शिक्षा प्रणाली के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में आपदा को अवसर बनाकर नई शिक्षा नीति-2020 को संसद में बिना चर्चा के छात्रों पर थोपने का काम किया। वर्तमान समय में देश में लगभग 13 करोड़ छात्र ऐसे हैं जो शिक्षा के मूल अधिकार से वंचित हैं। देश और प्रदेश में लगातार शैक्षणिक भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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एचपीयू में कई घोटाले हुए हैं, पूर्व सरकार के कार्यकाल में विवि में 200 से अधिक शिक्षकों को विचारधारा विशेष से जुड़ा होने पर योग्यता पूरी न करने के बावजूद भर्ती किया गया। एसएफआई आने वाले समय में शिक्षा से जुड़े मुद्दों और गलत नीतियों के खिलाफ उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी। इसके अलावा सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 वापस लो, लिंग संवेदनशील कमेटी, छात्र संघ चुनाव बहाली, महिलाओं पर बढ़ते हमले, बढ़ती बेरोजगार, देश प्रदेश में बढ़ती सांप्रदायिकता और नफरत, नशे की चपेट में बढ़ता युवा इत्यादि विषयों पर प्रस्ताव पारित किए गए।
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बेरोजगारी में प्रदेश दूसरे नंबर पर
सम्मेलन में जिला सचिव कमल ने कहा कि प्रदेश बेरोजगारी में दूसरे नंबर पर आ गया है। शिक्षा में लुढ़कर हिमाचल 21वें स्थान पर पहुंच गया है। यह सब सरकारों की गलत नीतियों का नतीजा है। एसएफआई 9 लाख बेरोजगारों की आवाज बनकर आंदोलन करेगी। सम्मेलन में संजौली महाविद्यालय में दो महीने से अवैध निष्कासन से पीड़ित छात्र और छात्राओं के लिए संघर्ष को तेज करने का फैसला हुआ।