आउटसोर्स कर्मियों के लिए नीति बनाएं, वरना करेंगे आंदोलन: संघ
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हिमाचल प्रदेश आउट सोर्स कर्मचारी संघ ने कहा है कि सरकार आउट सोर्स कर्मचारियों की सुध नहीं ले रही। संघ ने इस वर्ग के कर्मियों के लिए ठोस नीति बनाने की मांग उठाई है।
संघ के अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पिछले विधानसभा सत्र के दौरान कहा था कि आउट सोर्स कर्मचारियों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
उनकी सुनवाई नहीं की गई तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा। संघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र पंडित ने यहां कहा कि आउट सोर्स कर्मचारियों की सभी सरकारें घोर उपेक्षा करती रही हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भरोसा तो दिलाया लेकिन धरातल पर हालात नहीं बदलते हैं।
अब मंत्रिमंडल ने 2322 पदों को आउट सोर्स से भरने का फैसला लिया है। इस पर संघ के नेता कड़ी आपत्ति जताते हैं। आउट सोर्स कर्मचारी पिछले 15 साल से विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जबकि उन्हें वेतन के नाम पर महज 5-6 हजार रुपये प्रति माह वेतन ही दिया जा रहा है। संघ के अध्यक्ष धमेंद्र पंडित ने कहा कि सरकार आउट सोर्स कर्मचारी रखने वाली कंपनियाें की जेबें भरने के बजाय कर्मियों की सुध ले।
बिजली बोर्ड में युक्तिकरण करने के लिए कमेटियां गठित
दो हजार करोड़ के वित्तीय घाटे से गुजर रहे राज्य बिजली बोर्ड के खर्चे कम करने के लिए स्टाफ में कटौती करने को कमेटियां गठित कर दी गई हैं। शनिवार को बोर्ड प्रबंधन ने युक्तिकरण के लिए विभिन्न स्तर पर गठित कमेटियाें में शामिल अधिकारियों के नामों के आदेश जारी कर दिए हैं। 15 दिसंबर तक कमेटियों से रिपोर्ट मांगी गई है।
बिजली बोर्ड के दफ्तरों में अब काम के हिसाब से स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। बोर्ड प्रबंधन ने सरप्लस स्टाफ के संदर्भ में प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। जेई सब स्टेशन, जेई पावर हाउस सहित मिडल मैनेजमेंट में नियुक्त कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या कम करने का बिजली बोर्ड ने फैसला लिया है।
इन कर्मचारियों को बोर्ड के अन्य कार्यों में नियुक्त किया जाएगा। स्टाफ के युक्तिकरण के लिए हिमाचल बिजली बोर्ड उत्तराखंड के पैट्रन को अपना रहा है। शनिवार को जारी आदेशों में बताया गया है कि कमेटियां यह तय करेगी कि बिजली बोर्ड के दफ्तरों में किए जा रहे काम के लिए कितने स्टाफ की आवश्यकता है।
वर्तमान में वहां कितना स्टाफ नियुक्त है। कमेटियों को निगरानी अफसरों की संख्या भी कम करने के लिए प्रस्ताव बनाने के आदेश दिए गए हैं। चीफ इंजीनियरों को जोनल स्तर, अधीक्षण अभियंता को सर्किल स्तर, वरिष्ठ अधिशासी अभियंता को डिवीजन स्तर, सहायक अभियंता को सब डिवीजन स्तर और कनिष्ठ अभियंता को सेक्शन स्तर पर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।