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हिमाचल: बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग की राह होगी आसान, केंद्रीय मंत्री से मिले सीएम
Tue, 08 Sep 2026 04:54 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 08 Sep 2026 04:54 PM IST
सार
प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में जमा मलबे, बोल्डर, पत्थर और रेत को हटाने के लिए वैज्ञानिक ड्रेजिंग की राह आसान हो सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर इस संबंध में स्पष्ट और सक्षम दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया।
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सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से भेंट की।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में जमा मलबे, बोल्डर, पत्थर और रेत को हटाने के लिए वैज्ञानिक ड्रेजिंग की राह आसान हो सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर इस संबंध में स्पष्ट और सक्षम दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो जाता है।
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इससे नदियों की जल वहन क्षमता प्रभावित होती है और मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों तथा अन्य महत्वपूर्ण ढांचे पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा जोखिम कम करने के लिए वैज्ञानिक और समयबद्ध ड्रेजिंग जरूरी है। सुक्खू ने वन सलाहकार समिति के निर्णयों और सिफारिशों के आधार पर ड्रेजिंग प्रस्तावों के समयबद्ध निपटारे के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि परिवेश पोर्टल पर नदी ड्रेजिंग के लिए अलग श्रेणी बनाई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने ड्रेजिंग परियोजनाओं को क्षतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का भी आग्रह किया।
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उन्होंने कहा कि ड्रेजिंग में वन भूमि का गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए डायवर्जन नहीं होता, बल्कि इसका उद्देश्य नदी का प्रवाह सुचारु करना और बाढ़ का खतरा कम करना है। उन्होंने कहा कि राज्य में ड्रेजिंग कार्य वैज्ञानिक आकलन और विस्तृत ड्रेजिंग प्लान के आधार पर ही किए जाएंगे। कार्य केवल गैर मानसून अवधि में सभी पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा उपायों के तहत किए जाएंगे।
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ड्रेजिंग से निकलने वाली सामग्री के सुरक्षित और नियमन के तहत उपयोग व निस्तारण के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की गई। केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया कि हिमाचल में वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट और सक्षम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, प्रधान सचिव (वन) एम सुधा और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर मौजूद रहे।