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अवैध टैक्सी कारोबार पर अंकुश की मांग
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Union Demand to take action on Elegal Taxi busniees
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अवैध टैक्सियों से पकड़े जाने पर वसूला जाए टैक्स
खुलेआम नियमों का हो रहा उल्लंघन, बतौर टैक्सी चल रही बाहरी राज्यों की निजी गाड़ियां
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। देवभूमि ऑल हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से बतौर टैक्सी चल रही निजी गाड़ियों को पकड़ने के बाद पंजीकरण से लेकर पकड़े जाने तक का टैक्स वसूलने की मांग उठाई है।
एसोसिएशन के संस्थापक नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि मौजूदा समय में ऐसी गाड़ियों का 10 हजार का चालान किया जा रहा है जो नाकाफी है। चालान होने के बावजूद निजी वाहनों को बतौर टैक्सी चलाने वाले बाज नहीं आ रहे। इन दिनों बाहरी राज्यों से निजी गाड़ियां सवारियां लेकर हिमाचल पहुंच रही हैं और साइट सीन करवाया जा रहा है। स्थानीय टैक्सी ऑपरेटर सवारियां न मिलने से बेकार बैठने को मजबूर हैं।
निजी वाहन चालक बिना टैक्स चुकाए मोटी कमाई कर रहे हैं, 10 हजार का चालान होने से भी यह नियम तोड़ने से बाज नहीं आ रहे। इनका कहना है कि चालान से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। मान लेंगे हिमाचल का टैक्स भर लिया। टैक्सी वालों की तरह हमें जगह जगह जलील नहीं होना पड़ेगा। न वर्दी पहननी पड़ेगी न बार-बार गाड़ी के कागज दिखाने पड़ेंगेे। प्रदेश के टैक्सी ऑपरेटर कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन की मार झेलने के बाद अब बतौर टैक्सी चल रहे निजी वाहनों के कारण नुकसान झेल रहे हैं। टैक्सी ऑपरेटर सालाना सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व देते हैं, बावजूद इसके टैक्सी आपरेटरों के हित सुरक्षित नहीं हैं।
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खुलेआम नियमों का हो रहा उल्लंघन, बतौर टैक्सी चल रही बाहरी राज्यों की निजी गाड़ियां
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। देवभूमि ऑल हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से बतौर टैक्सी चल रही निजी गाड़ियों को पकड़ने के बाद पंजीकरण से लेकर पकड़े जाने तक का टैक्स वसूलने की मांग उठाई है।
एसोसिएशन के संस्थापक नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि मौजूदा समय में ऐसी गाड़ियों का 10 हजार का चालान किया जा रहा है जो नाकाफी है। चालान होने के बावजूद निजी वाहनों को बतौर टैक्सी चलाने वाले बाज नहीं आ रहे। इन दिनों बाहरी राज्यों से निजी गाड़ियां सवारियां लेकर हिमाचल पहुंच रही हैं और साइट सीन करवाया जा रहा है। स्थानीय टैक्सी ऑपरेटर सवारियां न मिलने से बेकार बैठने को मजबूर हैं।
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निजी वाहन चालक बिना टैक्स चुकाए मोटी कमाई कर रहे हैं, 10 हजार का चालान होने से भी यह नियम तोड़ने से बाज नहीं आ रहे। इनका कहना है कि चालान से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। मान लेंगे हिमाचल का टैक्स भर लिया। टैक्सी वालों की तरह हमें जगह जगह जलील नहीं होना पड़ेगा। न वर्दी पहननी पड़ेगी न बार-बार गाड़ी के कागज दिखाने पड़ेंगेे। प्रदेश के टैक्सी ऑपरेटर कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन की मार झेलने के बाद अब बतौर टैक्सी चल रहे निजी वाहनों के कारण नुकसान झेल रहे हैं। टैक्सी ऑपरेटर सालाना सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व देते हैं, बावजूद इसके टैक्सी आपरेटरों के हित सुरक्षित नहीं हैं।
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