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हिमाचल में लागू नहीं किया ये कानून, उमंग फाउंडेशन ने उठाए गंभीर सवाल

Sun, 03 Dec 2017 09:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 03 Dec 2017 09:00 AM IST
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umang foundation pc new disability law not implemented in himachal

प्रदेश में दिव्यांगों के अधिकारों के लिए कार्य कर रही स्वयंसेवी संस्था उमंग फाउंडेशन ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए है। फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि पिछले पांच साल में सरकार ने इनके हालात में बदलाव को ठोस कदम नहीं उठाए। 

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संसद में पारित नए विकलांगता कानून को राज्य में लागू नहीं किया गया। हाईकोर्ट के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। दिव्यांगों को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण नहीं दिया जा रहा है। 
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थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को नए कानून के अंतर्गत दिव्यांगों की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन सरकार ने उन्हें अभी तक कोई सुविधा नहीं दी है। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस से एक दिन पूर्व अजय श्रीवास्तव ने ये मामला पत्रकार वार्ता में उठाया। 
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उमंग फाउंडेशन ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत को भी मांगपत्र भेजा है। इस दौरान प्रदेश विवि में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे दिव्यांग विद्यार्थियों में मुस्कान ठाकुर, मुकेश कुमार, अनुज कुमार, मोहित कपूर, सवीनाजहां, सतीश ठाकुर, अंजू वीरवानी आदि मौजूद थे।

दिव्यांगों के लिए कोर्ट ने दिया थ्‍ाा ये फैसला

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श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने चार जून, 2015 को अपने फैसले में कहा था कि सरकार दिव्यांगों पहली से विश्वविद्यालय स्तर तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराए। इसमें सभी तरह के प्रोफेशनल और वोकेशनल कोर्स शामिल हों।

प्रदेश विवि समेत राज्य के कृषि तथा बागवानी विश्वविद्यालयों ने हाईकोर्ट का फैसला लागू कर दिया। सरकार ने यह फैसला मानने से इनकार कर दिया। अपने महाविद्यालयों, आईटीआई, पॉलीटेक्निक, मेडिकल, नर्सिंग और इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे संस्थानों के दिव्यांग विद्यार्थियों से फीस वसूल रही है।

विकलांग जनाधिकार कानून 2016 को भी प्रदेश में लागू करने को कदम नहीं उठाए गए। कहा कि राज्यपाल को एक मांगपत्र भेजकर मांग की है कि दिव्यांगों के अधिकारों के संरक्षण को तुरंत कदम उठाए जाएं। कहा कि यदि कोई कार्रवाई नहीं होती है तो हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।

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