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यूक्रेन संकट: धीरज बोले- धमाके की आवाज सुनते ही बंकर में छिप जाते हैं, विदेश मंत्रालय दो दिन में सुरक्षित निकालेगा

Wed, 02 Mar 2022 06:08 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा Published by: Krishan Singh Updated Wed, 02 Mar 2022 06:08 PM IST
सार

धीरज ने बताया कि विदेश मंत्रालय से भी उन्हें फोन आया था। कहा गया कि एक या दो दिन के भीतर सूमी में फंसे छात्रों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू कर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने छात्रों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने साथ पिट्ठु बैग, कपड़े, पानी की बोतल, मास्क, दवाइयां, पासपोर्ट और वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट साथ रखें। 

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Ukraine crisis: Dheeraj Kumar, a student of Chamba stranded in Sumy city
धीरज कुमार - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के चुराह उपमंडल के टिकरीगढ़ गांव के धीरज कुमार भी यूक्रेन के सूमी शहर में फंसे हुए हैं। वह सूमी स्टेट यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि धमाके की आवाज सुनते ही वे बंकर में छिप जाते हैं। धीरज ने बताया कि विदेश मंत्रालय से भी उन्हें फोन आया था। कहा गया कि एक या दो दिन के भीतर सूमी में फंसे छात्रों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू कर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने छात्रों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने साथ पिट्ठु बैग, कपड़े, पानी की बोतल, मास्क, दवाइयां, पासपोर्ट और वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट साथ रखें। धीरज कुमार वर्ष 2017 में सूमी गए थे। धीरज के परिजन चिंतित हैं। धीरज के पिता ललित कुमार को उम्मीद है कि बेटा जल्द सुरक्षित घर लौट जाएगा।

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यूक्रेन से पोती का दादी ने तिलक लगा किया स्वागत
 यूक्रेन से वापस चंबा पहुंचीं रिया नरयाल का दादी धनो देवी ने तिलक लगाकर स्वागत किया। पोती को देख उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। भाई और माता उसे लेने के लिए पालमपुर गए। यहां से गाड़ी में घर लाए। रिश्तेदार भी स्वागत करने के लिए पहले से मौजूद थे। रिया मंगलवार शाम को दिल्ली पहुंची थीं। यहां से पालमपुर पहुंचीं। बुधवार सुबह माता सविता नरयाल और भाई उन्हें लेने पालमपुर पहुंचे। मां ने बेटी को गले से लगा लिया। दोनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे। रिया ने बताया कि वह यूक्रेन की उजग्रोथ नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं। उनका चौथा सेमेस्टर था। जहां वह थीं, वहां हालात अभी ज्यादा खराब नहीं थे। उनके साथ भारत के अन्य छात्र भी पढ़ाई कर रहे थे। वे मंगलवार को उनके साथ दिल्ली पहुंचे। 

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