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Shimla News: चेक बाउंस मामले में दोषी को दो महीने का कारावास
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90 हजार रुपये जुर्माना भी भरना होगा
दोषी ने बैंक से जमीन विकास के लिए लिया था ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (सीबीआई कोर्ट) डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी बीजा राम की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई सजा को बरकरार रखा है।
अदालत ने दोषी को आदेश दिए हैं कि वह फैसले के 30 दिन के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करें। निचली अदालत ने दोषी को दो महीने की कैद और 90 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले के अनुसार हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक ने नेरवा निवासी दोषी बीजा राम के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। दोषी ने बैंक से जमीन विकास के लिए 3 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण की किस्तें जमा न होने के कारण 82 हजार रुपये की देनदारी बकाया हो गई थी। इस बकाया राशि के भुगतान के लिए दोषी ने एक चेक जारी किया था जो बैंक खाते में पर्याप्त राशि न होने के चलते बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद भी जब राशि अदा नहीं की गई तो बैंक ने अदालत का रुख किया।
इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी चौपाल की अदालत ने 10 सितंबर 2025 को बीजा राम को दोषी ठहराया था और 10 अक्तूबर 2025 को उसे दो महीने के साधारण कारावास तथा 90 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई थी। जुर्माना न देने पर एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद का प्रावधान किया था। इस फैसले के खिलाफ बीजा राम ने सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की थी। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपील को आधारहीन करार दिया।
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दोषी ने बैंक से जमीन विकास के लिए लिया था ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (सीबीआई कोर्ट) डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी बीजा राम की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई सजा को बरकरार रखा है।
अदालत ने दोषी को आदेश दिए हैं कि वह फैसले के 30 दिन के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करें। निचली अदालत ने दोषी को दो महीने की कैद और 90 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले के अनुसार हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक ने नेरवा निवासी दोषी बीजा राम के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। दोषी ने बैंक से जमीन विकास के लिए 3 लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण की किस्तें जमा न होने के कारण 82 हजार रुपये की देनदारी बकाया हो गई थी। इस बकाया राशि के भुगतान के लिए दोषी ने एक चेक जारी किया था जो बैंक खाते में पर्याप्त राशि न होने के चलते बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद भी जब राशि अदा नहीं की गई तो बैंक ने अदालत का रुख किया।
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इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी चौपाल की अदालत ने 10 सितंबर 2025 को बीजा राम को दोषी ठहराया था और 10 अक्तूबर 2025 को उसे दो महीने के साधारण कारावास तथा 90 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई थी। जुर्माना न देने पर एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद का प्रावधान किया था। इस फैसले के खिलाफ बीजा राम ने सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की थी। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपील को आधारहीन करार दिया।
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