फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Tribunal judgement over seniority to patwari

पटवारी को गलत तरीके से वरिष्ठता देने पर ट्रिब्यूनल ने लगाई रोक

Fri, 24 Mar 2017 09:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 24 Mar 2017 09:12 AM IST
विज्ञापन
Tribunal judgement over seniority to patwari

प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने हाईकोर्ट के आदेशों के विपरीत पटवारी ज्ञान चंद को गलत तरीके से वरिष्ठता देने पर रोक लगा दी है। ट्रिब्यूनल के चेयरमैन वीके शर्मा और प्रशासनिक सदस्य प्रेम कुमार ने अश्वनी कुमार व अन्य प्रार्थियों की दलीलों से प्रथम दृष्टया सहमति जताते हुए यह आदेश पारित किए। प्रार्थियों का आरोप है कि पटवारी ज्ञान चंद को वरिष्ठता उसकी नियुक्ति से नहीं बल्कि उसके द्वारा पास की गई पटवार परीक्षा से दे दी।

विज्ञापन


याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार हाईकोर्ट ने पटवारियों की वरिष्ठता से जुड़े एक मामले में यह व्यवस्था दी थी कि पटवारियों को वरिष्ठता उनकी नियुक्ति की तारीख से दी जाएगी न कि उनके द्वारा पटवारी का टेस्ट क्वालीफाई करने की तारीख से। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया था कि पहले नियुक्ति प्राप्त पटवारियों को क्वालीफाइड कनिष्ठ पटवारियों की नियुक्ति की तारीख से बाद वरिष्ठता नहीं दी जाएगी।
विज्ञापन


प्रार्थियों के अनुसार हाईकोर्ट के फैसले की अनुपालना में शिमला व कांगड़ा के भू व्यवस्था विभाग ने वरिष्ठता सूची जारी कर दी थी लेकिन मंडलायुक्त ने प्रतिवादी ज्ञान चंद पटवारी जो 1996 में बतौर पटवारी नियुक्त हुए थे, उन्हें वर्ष 1990 से वरिष्ठता दे दी। मंडलायुक्त कांगड़ा के अनुसार प्रतिवादी ज्ञानचंद ने वर्ष 1990 में पटवारी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इतना ही नहीं मंडलायुक्त कांगड़ा ने ज्ञान चंद पटवारी के प्रतिवेदन को स्वीकार करते हुए यह भी टिप्पणी की थी कि हाईकोर्ट ने विरोधाभासी निर्णय दिया है, जिस कारण हाईकोर्ट के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दे रखी है। प्रार्थियों के अनुसार मंडलायुक्त कांगड़ा का आदेश हाईकोर्ट के आदेशों के विपरीत है। उनके अनुसार प्रतिवादी ज्ञानचंद 22 जून 1996 को बतौर नियमित पटवारी नियुक्त हुए थे जबकि प्रार्थियों की नियुक्ति वर्ष 1990 के दौरान हुई है।


इस कारण मंडलायुक्त का फैसला हाईकोर्ट के आदेशों के विपरीत है और प्रतिवादी ज्ञानचंद पटवारी उनसे ऊपर वरिष्ठता लेने का हक नहीं रखते हैं। ट्रिब्यूनल ने प्रथम दृष्टया मंडलायुक्त कांगड़ा के 15 जून 2015 को पारित आदेश व एक नवंबर 2016 को भू व्यवस्था अधिकारी कांगड़ा द्वारा पारित कार्यालय आदेश को प्रथम दृष्टया गलत पाते हुए इन आदेशों पर रोक लगा दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed