HP High Court: पूर्व विधायक विजय अग्निहोत्री की सिफारिश पर किया तबादला आदेश रद्द
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पूर्व मंत्री या पूर्व विधायक की सांविधानिक तंत्र में कोई भूमिका नहीं है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक विजय अग्निहोत्री की सिफारिश पर किया तबादला आदेश रद्द कर दिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पूर्व मंत्री या पूर्व विधायक की सांविधानिक तंत्र में कोई भूमिका नहीं है। यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री भी अपने कार्यकाल के बाद आम नागरिक होता है। अदालत ने कहा कि पूर्व मंत्री या पूर्व विधायक के पास स्थानांतरण के लिए सिफारिश करने का कोई भी विशेषाधिकार नहीं है। यह शक्ति केवल विभाग या प्रशासन के पास निहित है। राज कुमार की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि उसे पूर्व विधायक की सिफारिश पर स्थानांतरित किया गया है।
अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता सोलन जिला के साई स्कूल में शिक्षक कार्यरत था। पारिवारिक समस्या को लेकर उसने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उसे नादौन के पन्सेई स्कूल में स्थानांतरित किया जाए। शिक्षा विभाग ने याचिकाकर्ता का तबादला पन्सेई स्कूल में कर दिया। प्रतिवादी वामदेव ने नादौन के पूर्व विधायक विजय अग्निहोत्री से सिफारिश करवाई और अपना तबादला पन्सेई स्कूल में करवाया। साथ ही पूर्व विधायक ने याचिकाकर्ता के स्थानांतरण आदेशों को रद्द करने की सिफारिश भी की थी। पूर्व विधायक की सिफारिश पर तबादला आदेशों को रद्द किए जाने को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया।
हत्या के आरोपी को हाईकोर्ट ने दी सशर्त जमानत
प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी मंडी निवासी पारुल ठाकुर को सशर्त जमानत दी है। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने अपने निर्णय में कहा कि कम उम्र होते हुए आरोपी को अभियोग के निपटारे तक जेल में रखना उचित नहीं है। जबकि इस मामले में अभियोजन की जांच पूरी हो गई है और सक्षम अदालत में चालान पेश कर दिया गया है। अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए है। मामले के अनुसार मृतक की मां ने पुलिस को शिकायत दी कि उसका लड़का गुम है। पुलिस को बताया गया कि उसके लड़के को नशे की लत लग गई थी और 26 अप्रैल को वह आरोपी के घर गया था। आरोपी चिट्टे का सेवन करता था। पुलिस ने जांच में पाया कि उसकी मौत चिट्टे की अधिक मात्रा में सेवन करने से हुई थी। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ जांच के दौरान पुख्ता सबूत हासिल किए गए हैं। जांच में पाया गया कि आरोपी ने अपने सह आरोपी विक्रांत गुलेरिया के साथ मृतक को नदी में फेंक दिया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आरोपी पर संगीन अपराध के लिए सक्षम अदालत में अभियोग चलाया गया है। उसे जमानत पर रिहा किया जाना उचित नहीं है।