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Himachal: किन्नौर की भावावैली में पारंपरिक स्वांग नृत्य की धूम, देखें खूबसूरत वीडियो
Tue, 11 Mar 2025 01:50 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, भावानगर (किन्नौर)
संवाद न्यूज एजेंसी, भावानगर (किन्नौर)
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 11 Mar 2025 01:50 PM IST
सार
स्वांग नृत्य दल मुंह पर मुखौटा लगाकर और शरीर पर बकरे की खाल पहनकर और हाथ में तलवार लेकर नृत्य करता है। फागुली त्योहार के दौरान लोग अपने घरों में ना तो जोर से स्टीरियो बजाते हैं और ना ही शोर-शराबा करते हैं।
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किन्नौर की भावावैली में पारंपरिक स्वांग नृत्य की धूम
- फोटो : संवाद
विस्तार
किन्नौर जिले की भावावैली में इन दिनों पारंपरिक स्वांग नृत्य की धूम है। स्वांग नृत्य एक सप्ताह तक फागुली मेले के बाद मनाया जाता है। स्वांग नृत्य दल मुंह पर मुखौटा लगाकर और शरीर पर खाल पहनकर और हाथ में तलवार लेकर नृत्य करता है। फागुली त्योहार के दौरान लोग अपने घरों में ना तो जोर से स्टीरियो बजाते हैं और ना ही शोर-शराबा करते हैं। ऐसे में पाश्चात्य संस्कृति के दौर में भी जनजातीय जिला किन्नौर की भावावैली के लोग विरासत में मिली प्राचीन संस्कृति को संजो कर रखे हुए हैं। फागुली त्योहार के दौरान एक सप्ताह तक लोग अपने घरों में स्थानीय अनाज, तरह-तरह के पकवान बना अपने ईष्ट देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं।
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इसके साथ ही पितरों की पूजा करते हैं। लोगों में मान्यता है कि फागुली त्योहार स्वर्ग लोक से परियां मेहमान बनकर उनके घरों में वास करती हैं। इसके चलते लोग इस त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग के साथ मनाते हैं। फागुली त्योहार का समापन होने के बाद लोग अपने-अपने गांव में स्वांग नृत्य करते हैं। सर्वप्रथम स्वांग नृत्य दल स्वांग नृत्य अपने ईष्ट देवता के मंदिर से शुरू करते हैं। उसके बाद स्वांग नृत्य दल अपने गांव में हरे व्यक्ति के घर नृत्य पेश करते हैं। लोग उन्हें इसके बदले में पैसे और खाने-पीने की वस्तुएं भी भेंट करते हैं। आखिर में स्वांग नृत्य दल इस पैसे और खाने-पीने की वस्तुओं से एक जगह इकट्ठा होकर पार्टी करते हैं जिसमें गांव के लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है। भावावैली के काफनू, यांगपा, कटगांव, शौंग सहित अन्य गांव में स्वांग नृत्य दल घर-घर जाकर नृत्य पेश कर अपनी पारंपरिक संस्कृति को प्रस्तुत कर रहे हैं।
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