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पारंपरिक कोदरा, काउंणी और लाल चावल उगाएंगे किसान
Sat, 05 Oct 2019 12:59 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 05 Oct 2019 12:59 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में परंपरागत फसलों को बचाने के लिए जीरो बजट प्राकृतिक खेती परियोजना के अगले चरण में बीज ग्राम परियोजना 2020 तक शुरू की जाएगी। इसके लिए जीरो बजट प्राकृतिक खेती के तहत खाका तैयार कर लिया है। प्राकृतिक खेती कर रहे सफल किसानों के माध्यम से बीज ग्राम परियोजना से पुरानी और परंपरागत फसलों के बचाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
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बीज ग्राम परियोजना से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पुरानी फसलें कोदरा, काउंणी, चीणी, लाल चावल, धान, बीथू और मक्का उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में बीज ग्राम बनाए जाएंगे। आत्मा प्रोजेक्ट के तहत पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसी एक गांव को चुना जाएगा। जहां बड़े पैमाने पर पारंपरिक खेती कर इस बीज को अन्य गांव के किसानों को भी वितरित किया जाएगा।
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2020 में बीज ग्राम से परंपरागत किस्मों की फसलों के उगाने के लिए काम करना शुरू कर दिया जाएगा। प्राकृतिक खेती के राज्य परियोजना निदेशक राकेश कंवर ने बताया कि पुराने समय में परंपरागत फसलों के बीज तैयार करने की परंपरा थी, लेकिन पिछले कई वर्षों से न केवल खेती खत्म हो रही है, बल्कि बीज भी मुश्किल से मिल रहा है। इस दिशा में जिला स्तर पर समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। बीते दिनों जिला कुल्लू में इसी मकसद से बैठक की गई थी।
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पारंपरिक खेती में पौष्टिकता ज्यादा
आत्मा परियोजना कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. रमेश ठुकराल ने कहा कि पुरानी परंपरागत फसलों को संरक्षित करने की जरूरत है। उन बीजों से तैयार फसलों में पौष्टिकता ज्यादा थी। उन्होंने कहा कि आत्मा परियोजना शून्य लागत खेती के साथ पारंपरिक खेती की दिशा में भी काम कर रही है।