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शिमला हादसा : दो परिवारों में बचे देवर-भाभी और तीन बच्चे

Sun, 23 Sep 2018 10:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/रोहडू़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/रोहडू़ Updated Sun, 23 Sep 2018 10:22 AM IST
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Tracks accident jubble five member including three children survived in two families

हाटकोटी-त्यूणी मार्ग पर मुंगरा के पास ट्रैक्स हादसे में दो परिवारों ने अपना सब कुछ खो दिया। एक परिवार में देवर-भाभी तो दूसरे में तीन बच्चे बचे हैं। मातवर सिंह के घर में उनका छोटा बेटा मुकेश और बड़ी बहू ही बची हैं।

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इस हादसे में खुद मातवर सिंह, पत्नी, बड़ा बेटा, बेटी, दामाद और नातिन की मौत हो गई है। इनके अलावा मातवर का एक रिश्तेदार जबकि दामाद के भी दो रिश्तेदारों की मौत हुई है। वहीं, मातवर के भाई अतर सिंह के घर में आठवीं में पढ़ने वाला बेटा और बारहवीं में पढ़ने वाली दो बेटियां बची हैं।
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हादसे में अतर सिंह और उनकी पत्नी की जान चली गई है।  शनिवार सुबह करीब सवा नौ बजे नंडला से मातवर का परिवार टेंपो ट्रैक्स में उत्तराखंड के मंदिर में पूजा के लिए निकला था। रोहडू़ पहुंचने पर मातवर सिंह के दामाद और बेटी अपनी गाड़ी से ट्रैक्स के पीछे चल पडे़।
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ट्रैक्स में जगह की कमी पर मातवर सिंह का बेटा मुकेश जीजा-बहन के साथ उनकी कार में बैठ गया। कुड्डू में कुछ देर रुकने के बाद ये लोग फिर चल पड़े। कुड्डू से करीब तीन किलोमीटर आगे निकलते ही ट्रैक्स अनियंत्रित होकर पलटे मारते हुए खाई में गिर गई, जिसे मुकेश अपनी आंखों से देख रहा था।


 

मनोज को खींच लाई मौत

Tracks accident jubble five member including three children survived in two families

रोते-बिलखते मौके पर पहुंचे तो शव ढांक में इधर-उधर बिखरे पडे़ थे। फोन से आसपास के लोगों को बुलाया गया। पोस्टमार्टम के बाद बारिश के बीच रोते-बिलखते मुकेश ने शवों को घर पहुंचाया। हादसे के बाद से मुकेश सदमे में है। 

चौरी निवासी युवक मनोज अपने किसी अन्य काम के लिए कुड्डू में वाहन का इंतजार कर रहा था। चालक व अन्य लोगों से पहचान होने के कारण वह भी ट्रैक्स में बैठ गया। तीन किलोमीटर के सफर के बाद उसको भी हादसे का शिकार होना पड़ा।

हादसे का कारण अभी साफ नहीं
ट्रैक्स हादसे का कारण अभी तक साफ नहीं है। कोई तेज रफ्तार तो कोई कह रहा है कि पास देते समय हादसा हुआ है। डीएसपी रोहडू़ अनिल शर्मा का कहना है कि किसी वाहन को पास देते समय हादसा हुआ, इसका पुख्ता प्रमाण नहीं है।

क्रैश बैरियर होता तो बच जातीं तेरह जिंदगियां 

Tracks accident jubble five member including three children survived in two families

 हाटकोटी से त्यूणी तक सड़क पर सफर करना जोखिम भरा बन गया है। शनिवार को स्नैल के समीप सड़क हादसा वाहन को पास देते हुए हुआ है। सड़क पर क्रैश बैरियर नहीं लगे थे, जिस वजह से ट्रैक्स गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे लुढ़क गई।

यहां क्रैश बैरियर लगे होते तो 13 लोगों की जानें बच सकती थीं। लाल ढांक-पौंटा-रोहड़ू को नेशनल हाईवे का दर्जा तो पंद्रह साल पहले मिल गया लेकिन हाटकोटी से त्यूणी तक करीब 32 किलोमीटर मार्ग पर कहीं भी क्रैश बैरियर नहीं लगाए गए हैं। क्रैश बैरियर न होने से इस मार्ग पर कई हादसे हो चुके हैं।

हालांकि, सड़क पर क्रैश बैरियर लगाने के लिए टेंडर नेशनल हाईवे प्राधिकरण ने काफी पहले लगाए हैं लेकिन काम शुरू नहीं हो पा रहा। उधर, इस दर्दनाक हादसे की सूचना मिलने के बाद नेशनल हाईवे प्राधिकरण के अधिकारी हरकत में आए हैं।रविवार को एनएच प्राधिकरण के अभियंता मौके पर निरीक्षण करेंगे।

 नेशनल हाईवे प्राधिकरण के कनिष्ठ अभियंता रोहित कौशल ने बताया कि सड़क पर क्रैश बैरियर लगाने के टेंडर हो चुके हैं। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शीघ्र ही क्रैश बैरियर लगाने का कार्य शुरू किया जाएगा। रविवार को वह स्वयं मौके पर पहुंचकर सड़क का निरीक्षण करेंगे। 

हिमाचल में हुए बड़े हादसे

Tracks accident jubble five member including three children survived in two families

9 अप्रैल, 2018 : जिला कांगड़ा के नूरपुर में खाई में गिरी स्कूल बस। 23 बच्चों समेत 27 की हुई मौत।
20 अप्रैल, 2017 : यात्रियों से भरी उत्तराखंड की ओवरलोड निजी बस शिमला के गुम्मा के निकट खाई में गिरी, 45 की मौत।
5 नवंबर, 2016 : मंडी के बिंद्रावणी में ब्यास में गिरी बस, 17 की मौत और 26 घायल।
20 मई, 2016 : चंबा में बस हादसे में 14 मरे, 31 घायल।
23 जुलाई, 2015 : कुल्लू में पार्वती नदी में गिरी बस, 31 लोग बहे।
21 अगस्त, 2014 : किन्नौर के रुतरंग में बास्पा नदी में गिरी बस 23 की मौत, 20 घायल।
27 सितंबर, 2013 : रेणुका में ददाहू-टिक्कर संपर्क मार्ग पर निजी बस गहरी खाई में गिरी। बस सवार सभी 21 लोगों की मौत।
8 मई, 2013 : मंडी के झीड़ी में जोगणी माता मंदिर के पास ब्यास नदी में समाई बस, 40 मरे।
11 अगस्त, 2012 : चंबा-धुलाड़ा मार्ग पर गागला के पास ओवरलोड बस हादसा, 52 मरे।

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